अगर

09 दिसम्बर 2018   |  शिशिर मधुकर   (85 बार पढ़ा जा चुका है)

अगर

मुहब्बत तेरे सीने में, अगर मुझ सी पली होती

कमी मेरी दो बाहों की, तुझे हरदम खली होती


अगर तुम साथ में रहते, तो रौनक बज्म में होती

ये शब देखो निरी तन्हा, ना फिर ऐसे ढली होती


ढूँढ़ने साथिया मन का, जब भी राहें चुनी मैंने

काश उन राहों में शामिल, एक तेरी गली होती


कभी ऐसे भी क्षण आए , सांस लेना हुआ दूभर

दम ना घुटता हवा जो, तेरी खुशबू की चली होती


ज़रा सा साथ दे देती, अगर किस्मत यहाँ मेरी

चिता अरमानों की मेरे, नहीं मधुकर जली होती



अगला लेख: ये बारिश प्रेम की



रेणु
10 दिसम्बर 2018

अभिनंदन |

रेणु
09 दिसम्बर 2018

कभी ऐसे भी क्षण आए , सांस लेना हुआ दूभर
दम ना घुटता हवा जो, तेरी खुशबू की चली होती
बहुत खूब आदरणीय शिशिर जी -- सादर

शिशिर मधुकर
10 दिसम्बर 2018

आदरणीय रेनू जी आपकी सतत्त प्रतिक्रियाएं मेरे उत्साह को बढ़ाती है. इसके लिए आपका तहे दिल से शुक्रिया . आपका मुझ पर ऐसे ही स्नेह बना रहेगा ऐसी मुझे आशा है .

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