धीरूभाई अम्बानी की कहानी : मात्र 500 रूपये से बनाया 75000 करोड़ का साम्राज्य

11 दिसम्बर 2018   |  अंकिशा मिश्रा   (32 बार पढ़ा जा चुका है)

धीरूभाई अम्बानी की कहानी : मात्र 500 रूपये से बनाया 75000 करोड़ का साम्राज्य   - शब्द (shabd.in)

महज़ 500 रूपये से अपने सफर की शुरुआत करने वाले धीरूभाई अंबानी कैसे 75000 करोड़ के मालिक बन गए। ये कोई जादू नहीं बल्कि कड़ी मेहनत और धैर्य का नतीज़ा है। अंबानी परिवार का नाम दुनियाभर में बड़े उद्योगपतियों में शुमार होता है। अपनी मेहनत से उन्होंने दुनिया में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। देश - विदेश में आज हर कोई मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी को पहचानता है। आपको बता दें कि इन दिनों ये परिवार अपनी बेटी ईशा अंबानी की शादी को ले कर सुर्ख़ियों में बना हुआ है। मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी यूँही आज दुनियाभर में मशहूर हो गए और बड़े उद्योगपति बन गए। कहते हैं न हर क़ामयाब इंसान के पीछे किसी न किसी का हाथ ज़रूर होता है और अंबानी परिवार की कामयाबी के पीछे हाथ है अनिल अंबानी और मुकेश अंबानी के पिता धीरूभाई अंबानी का है ।




कहा जाता है की धीरूभाई अंबानी जब गुजरात से मुंबई आये थे तो उनकी जेब में केवल 500 रूपये थे , कड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद उन्होंने ये अरबों का साम्राज्य खड़ा किया और आज देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी अंबानी परिवार की अपनी अलग पहचान है। धीरूभाई का मानना था की यदि अपने सपने खुद नहीं बनोगे तो कोई और आपके सपने बुनने लग जायेगा। कड़ी मेहनत से धीरूभाई अम्बानी ने जो सपना देखा वो पूरा किया और पूरी दुनिया को ये बता दिया की यदि व्यक्ति कड़ी मेहनत और संघर्ष के लिए तैयार हो तो कोई उसे सफल होने से नहीं रोक सकता। कई वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद आज वे जाने माने व्यवसायी और रिलायंस इंडस्ट्री के चैयरमैन बन गए।




आपको ये बात जानकर हैरानी होगी की धीरूभाई पहले भजिया तलने का काम करते थे। उसके बाद उन्होंने एक जूनागढ़ की एक कंपनी में 300 प्रतिमाह के वेतन पर भी नौकरी की। लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्होंने मुंबई आने का फैसला किया। बता दें कि जब धीरूभाई अंबानी मुंबई आये तो उनके पास केवल 500 रूपये थे ,लेकिन मायानगरी मुंबई ने उनकी किस्मत बदल दी। मात्र 500 रूपये लेकर आये व्यक्ति ने साल 1966 में गुजरात के नादौरा में पहली टेक्सटाइल मिल खोल ली। महज़ 14 महीनों में उन्होंने 10000 टन पॉलीएस्टर यार्न संयन्त्र स्थापित करने का वर्ल्ड रिकॉड बनाया। उन्होंने खुद का ब्रांड लॉन्च किया जिसका नाम विमल रखा। भले ही आर्थिक तंगी के चलते धीरूभाई अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर सके पर बिज़निस की काफी अच्छी समझ थी। उन्हें समझ आ गया था कि कैसे शेयर मार्केट को अपनी तरफ किया जाता है।




अपनी मेहनत से ही धीरूभाई अंबानी ने रिलायंस इंडस्ट्री को आज इस मुकाम पर पहुँचाया है।1976 में 70 करोड़ की कंपनी 2002 तक 75000 करोड़ की बन गई। कम्पनी की इतनी तेज़ी से बढ़ी की आज ये विश्व की टॉप 500 कंपनियों में शामिल है। आपको बता दें की फोब्स ने साल 2002 में अमीर उधोगपतियों की लिस्ट ज़ारी की थी जिसमे धीरूभाई अंबानी 138 वें स्थान पर थे और उसी साल 6 जुलाई को उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।




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