संतुष्टि :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

11 दिसम्बर 2018   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (51 बार पढ़ा जा चुका है)

संतुष्टि :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*ईश्वर ने मनुष्य को इस संसार में सारी सुख सुविधाएं प्रदान कर रखी है | कोई भी ऐसी सुविधा नहीं बची है जो ईश्वर ने मनुष्य को न दी हो | सब कुछ इस धरा धाम पर विद्यमान है आवश्यकता है कर्म करने की | इतना सब कुछ देने के बाद भी मनुष्य आज तक संतुष्ट नहीं हो पाया | मानव जीवन में सदैव कुछ ना कुछ अपूर्ण ही रहा है | मनुष्य कभी पूर्ण न हो पाया है और न ही हो पाएगा क्योंकि पूर्ण तो सिर्फ परमात्मा है | इस तथ्य को जानते हुए भी मनुष्य अपनी अपूर्णता का दोष ईश्वर को ही लगाता रहा है | कहने का मतलब यह है कि ईश्वर ने मनुष्य को सब कुछ तो दे दिया परंतु मनुष्य को संतुष्ट कर पाने में वह परमपिता परमेश्वर भी सक्षम नहीं हो पाया , क्योंकि इस धरा धाम पर आने के बाद मनुष्य की इच्छाएं अनंत हो जाती हैं और किसी की भी प्रत्येक इच्छा का पूर्ण हो पाना कठिन ही नहीं असंभव भी है | क्योंकि मनुष्य की इच्छाओं के साथ साथ उसके कर्म भी प्रभाव डालते हैं | मनुष्य किसी न किसी विषय में सदैव असंतुष्ट ही रहता है कभी परिवार से , कभी बच्चों से , कभी समाज से , कभी देश की सरकार से , तो कभी ईश्वर से | पूर्ण संतुष्ट मनुष्य कभी नहीं हो पाता है क्योंकि मनुष्य सब कुछ अपने अनुसार चाहता है , यदि कोई भी कार्य उसके विरुद्ध हो जाता है या किसी कार्य से उसका स्वयं का हित प्रभावित होता है तो वह असंतुष्ट हो जाता है | यह मानवीय प्रवृत्ति है इसको पूर्ण कर पाना शायद ईश्वर के भी बस की बात नहीं है |* *आज यदि अपने मस्तिष्क को एकाग्र करके विचार किया जाय तो यही परिणाम निकल कर आता है कि ईश्वर तो संपूर्ण सृष्टि का पालन कर रहा है | परंतु एक साधारण सा मनुष्य जिसके परिवार में माता , पिता , पत्नी के साथ - साथ कई बच्चे भी होते हैं , जिनके पालन पोषण के लिए वह दिन-रात मेहनत करता है | और सबको समान रूप से सारी सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास करता रहता है , परंतु यह भी अकाट्य सत्य है कि परिवार के सभी सदस्य उससे संतुष्ट नहीं रह पाते हैं | किसी न किसी को कुछ न कुछ कमी अवश्य बनी रहती है | विचार कीजिए इसमें परिवार के अभिभावक का क्या दोष है ?? क्योंकि वह तो सबके लिए समान व्यवस्था बनाने का प्रयास करता रहता है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज समाज की एवं सरकार की हालत देख कर विचार करता हूं कि अभी कुछ दिन पहले तक जब देश व प्रदेश में खुलेआम गोवंश की हत्या की जाती थी तब प्रत्येक चौराहे पर इसके लिए सरकार को दोषी मानकर प्रदर्शन किए जाते रहे हैं | परंतु जनता की इस मांग को देख कर के जब सरकार ने गौ हत्या पर पूर्ण विराम लगा दिया तो आज गोवंश किसान के खेतों में जाकर के नुकसान कर रहे हैं | इसके लिए भी आज किसान प्रदर्शन करने पर आमादा है | विचार कीजिए सरकार का क्या दोष है ?? यदि सकारात्मक कदम उठाती है तो दोषी है नकारात्मक में तो दोषी है ही | इस विषय को उठाने का इतना ही तात्पर्य है कि चाहे वह सत्तासीन सरकार हो , चाहे परिवार का अभिभावक हो या फिर स्वयं परमात्मा हो वह सब को कभी भी संतुष्ट नहीं कर सकता |* *आज मनुष्य स्वयं एवं स्वयं के कार्य से भी असंतुष्ट है तो दूसरों के कार्य से या परमात्मा के विधान से संतुष्ट हो पाना असंभव है |*

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