उसका चाँद

12 दिसम्बर 2018   |  विजय कुमार तिवारी   (32 बार पढ़ा जा चुका है)

कहानी

उसका चाँद

विजय कुमार तिवारी


बचपन में चाँद देखकर खुश होता था और अपलक निहारा करता था। चाँद को भी पता था कि धरती का कोई प्राणी उसे प्यार करता है। दादी ने जगा दिया था प्रेम उसके दिल में, चाँद के लिए। बड़ी बेबसी से रातें गुजरतीं जब आसमान में चाँद नहीं होता। वैसे तो दादी नित्य ही चाँद को दूध-भात के कटोरे में उतारती और हर कौर में खिलातीं। तब शायद समझ नहीं थी और लगता था कि जो मीठापन है,वही चाँद है।दादी ने कहा कि चाँद रोज रात में उसके सिरहाने आ खड़ा होता है और प्यार की थपकी देता है। वह महसूस करता कि दादी की थपकी बंद हो गयी है और पूरी रात चाँद मीठी-मीठी थपकी देकर सुलाता है। उसे ऐसा भी लगता कि चाँद उसके साथ रातभर जागता है और उसकी रक्षा करता है।

माँ को जब दूसरी सन्तान बेटी हुई तो माँ ने कहा कि चाँद तुम्हारी बहन बनकर आया है।कई दिनों तक वह बाहर नहीं गया,अपनी बहन को देखता रहा।उसने आसमान की ओर नहीं देखा। उसे खुशी हुई कि चाँद धरती पर आ गया है और बहन को निहारता रहता। एक दिन उसे आसमान में फिर चाँद दिखाई दिया तो वह दौड़ कर बहन को देखने कमरे में पहुँचा। चाँद यहाँ भी है और बाहर आसमान में भी। उसने माँ को बताया और पूछा कि दो चाँद कहाँ से आ गये। माँ ने कहा,"दादी ही चाँद बनकर आसमान में टिक गयी हैं। अब उसके पास दो दो चाँद हैं। अक्सर वह बहन के आसपास रहता और जब उसकी स्मृतियों में दादी आतीं तो आँगन में आकर चाँद से बातें करने लगता। इसतरह उसके सारे प्रश्नों का जवाब दादी से मिल जाते। अपनी भाषा में उसने बहन को भी समझा दिया कि तुम्हारा चाँद भी उधर उपर आसमान में है। बहन किलकारी मारकर हँसती तो वह खुशी से झूम उठता।

स्कूल जाते समय उसकी बेचैनी बढ़ जाती।चाँद को घर में माँ के पास छोड़कर जाना पड़ता और दिन में आसमान में दादी दिखती नहीं । स्कूल की प्रार्थना से उसने सीखा और अपनी सारी बातें मन ही मन आसमान के चाँद को सुना देता। उसे विश्वास हो गया कि दादी सब सुनकर उसे सोते समय बता देती हैं।

किसी दिन कहीं सुन लिया कि सब का अपना अपना चाँद होता है। उसने मान लिया कि ऐसा हो सकता है। समस्या तब खड़ी हुई जब उसने पिता को माँ से कहते सुन लिया कि तुम्हीं मेरा चाँद हो।दादी ने तो कभी नहीं बताया कि माँ भी चाँद है। माँ को चाँद मानने के लिये उसका मन तैयार नहीं होता था,वह भी पिता का चाँद। माँ को वह बहुत प्यार करता था और माँ भी उसे बहुत प्यार करती थी। यदि माँ चाँद है तो उसका चाँद है,पिता का कभी नहीं। इसपर वह पिता से लड़ने को भी तैयार हो गया। माँ ने गौर किया कि बेटा थोड़ा खिन्न रह रहा है तो उसने पूछ ही लिया पर उसने कोई जवाब नहीं दिया।

एक दिन वह माँ के गले लग गया और दुलार दिखाने लगा। उसने पूछा,'माँ,तुम भी चाँद हो?"

माँ हँस पड़ी," हाँ,मैं भी कभी चाँद थी।"माँ को अपने बचपन से लेकर जवानी के दिन की मधुर स्मृतियाँ कौंध गयी।याद आया,अभी हाल में ही उसके पिता ने अन्तरंग क्षणों में उसे अपना चाँद कहा था। उसके मुह से निकल गया कि मैं तुम्हारे पिता का चाँद हूँ।वह बहुत गुस्सा हुआ," नहीं,तुम मेरा चाँद हो।" माँ को स्थिति समझते देर नहीं लगी। उसने खुश करने के लिये कहा कि हाँ हाँ,मैं तुम्हारा ही चाँद हूँ। उसे खुशी हुई और एक तरह की जीत भी। उसने दूर खड़े पिता को हँस कर देखा मानो कह रहा हो,बड़े आये चाँद लेने वाले। माँ ने प्यार से समझाया,"तुम्हारे पास पहले ही दो दो चाँद हैं और पिता के पास एक भी नहीं। तुम चाहो तो मुझ चाँद को बेचारे पिता को दे दो। देखो कैसे दुखी हो रहे है? "फिर ठीक है,"उसने खुश होकर कहा और पिता को आवाज दी," ले लो चाँद तुम भी।" पिता मुस्कराये और उसे गोद मे उठा लिया'।

थोड़ा बड़ा हुआ। स्कूल की कक्षायें उत्तीर्ण की। अगली कक्षा की मैडम बहुत स्नेह से पढ़ाती थीं। उसे बहुत दुलार से पेश आती थीं।वह उन्हें पसंद करता था।एक दिन उनकी सुन्दरता की चर्चा करते हुए दूसरी मैडम ने कहा,"आज तो तुम चाँद सी सुन्दर लग रही हो।"उसके कान खड़े हो गय़े। मन में चिन्ता और बेचैनी बढ़ने लगी। उसने अपनी मैडम से कहा,'आपसे एक बात पूछनी है।"

"हाँ हाँ,बोलो-क्या बात है?"

"आप चाँद हो"उसने धीरे से पूछा।

पहले तो उनकी समझ में कुछ भी नहीं आया। थोड़ी देर बाद उन्हें वस्तु स्थिति समझ आयी तो हँस पड़ी। अक्सर लोग उनके सौन्दर्य की चर्चा में चाँद से तुलना करते हैं। बोली,"तुम्हें किसने कहा?"

"उस दिन वो मैडम आपको बोल रही थी,"उसने कहा और पूछ बैथा," आप किसकी चाँद हो?"

बच्चे की बालसुलभ बातों को सुनकर वह खिलखिला कर हँस पड़ी और मुस्करा कर बोली," तुम्हारा।"

वह बहुत खुश हुआ और घर जाकर माँ से कहा,"मेरी मैडम भी मेरा चाँद हैं।"माँ को भी हँसी आ गयी। उसने रात में आसमान की ओर देख कर कहा," दादी,आज एक और चाँद मुझे मिला है।"उसे लगा,दादी मुस्करा रही हैं और कह रही है कि हाँ,मुझे पता है।

इण्टर में उसे एक विचित्र स्थिति का सामना करना पड़ा।पूरी कक्षा में साँवली सी मात्र एक लड़की थी। वह मन ही मन सोचता रहता था कि यह भी किसी न किसी की चाँद होगी ही। उसके चिन्तन में यह बात स्पष्ट हो चुकी थी कि सबके अलग-अलग चाँद हैं। उस लड़की ने उसकी नोटबुक वापस की तो उसमें एक पत्र मिला। गलती से उसने रख दिया था। वह समझ गया कि किसी ने उसे प्रेम पत्र दिया है। उसने वापस किया तो लड़की हँस पड़ी। उसने पूछा,"किसका है?"लड़की ने हँसते हुए जवाब दिया,"मेरे सूरज का। वह मेरा सूरज और मैं उसका चाँद।" वह भी हँस पड़ा।

उसने नौकरी शुरु की तो पिता ने माँ से कहा कि इसके लिये एक चाँद सी दुल्हन खोजते हैं।माँ बहुत खुश हुई। माँ ने उससे पूछा,'"क्या कोई चाँद तुम्हें मिली है?"वह शरमा गया। माँ ने कहा,"हम लोगों ने एक लड़की पसन्द की है। तुम भी चलो,देख लो।"

शादी हुई बहुत धूमधाम से और बहुत सुन्दर दुल्हन आयी। उसने आसमान में अपनी दादी को देखा। उसकी आँखें भर आयीं। उसे खुशी हुई कि दादी ने आशीर्वाद दिया। वह निकल पड़ा अपने चाँद को लेकर चाँद दिखाने। चारो ओर शीतल चाँदनी फैली थी और दोनो मुस्करा रहे थे।


अगला लेख: ट्रेन यात्रा



उदय पूना
16 दिसम्बर 2018

जीवन में सौंदर्य बोध का महत्त्व है, इस बात को आपकी कहानी में बतलाया है, बो भी सुंदरता और प्यार से, बधाई, प्रणाम,

धन्यवाद् आपको

Tushar Thakur
14 दिसम्बर 2018


Thanks For Posting such an amazing article, i really love to read your Post
regulearly on this community of shabd.


Also Visit :bharatstatus &
Read Also: WhatsApp Funny jokes
Read Also:attitude status in hindi

रेणु
13 दिसम्बर 2018

आदरणीय विजय जी -- आपकी खास शैली में लिखी गयी ये कहानी बहुत खास है | नमन करती हूँ आपकी इस अनुपम शैली को | आजकल मैं बस आपके अलावा दो तीन रचनाकारों को और पढने ही यहाँ आती हूँ| कल आपकी एक रचना अपने गूगल प्लस पर शेयर की थी | हार्दिक बधाई आपको इस चाँद जैसी सुंदर शीतल रचना के लिए | सादर --

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
17 दिसम्बर 2018
एलीना अपने नौवें जन्मदिन पर एक स्मार्टफोन चाहती था। उसकी मां और सौतेले पिता उसे फोन देने के लिए अनिच्छुक थे, क्योंकि वे मानते थे कि स्मार्टफोन बच्चे के लिए एक लक्जरी गैजेट हैं। सोचने विचारने के बाद आखिरकर एलीना के माता-पिता अपनी पुत्री को आश्चर्यचकित करने के लिए तैयार
17 दिसम्बर 2018
03 दिसम्बर 2018
एक आदमी फूल की दुकान के सामने रूका, जिसका उद्देश्य दो सौ मील दूर रहने वाली मां को गुलदस्ता भेजने के लिये बुकिग कराना था, ताकि कुछ फूलों को दो सौ मील दूर रहने वाली मां को भेजा जा सके। जैसे ही वह अपनी कार से निकल कर बाहर आया तो उसने देखा
03 दिसम्बर 2018
29 नवम्बर 2018
चो
सुबह के साढ़े आठ बज रहे थे, मैं घर के कामों में व्यस्त थी। चोर! चोर! शोर सुनकर मैं बेडरूम की खिड़की से झाँककर देखने लगी। एक लड़का तेजी से दौड़ता हुआ गली में दाखिल हुआ उसके पीछे तीन लोग थे जिसमें से एक मंदिर का पुजारी था, सब दौड़ते हुये चिल्ला रहे थे, "पकड़ो,पकड़ो चोर है काली माँ का टिकुली(बिंदी) चुर
29 नवम्बर 2018
15 दिसम्बर 2018
कहानीअन्तर्मन की व्यथाविजय कुमार तिवारी"है ना विचित्र बात?"आनन्द मन ही मन मुस्कराया," अब भला क्या तुक है इस तरह जीवन के बिगत गुजरे सालों में झाँकने का और सोयी पड़ी भावनाओं को कुरेदने का?अब तो जो होना था, हो चुका,जैसे जीना था,जी चुका। ऐसा भी तो नही हैं कि उसका बिगत जीवन बह
15 दिसम्बर 2018
02 दिसम्बर 2018
कौ
गीत कौन सा पतझड़ मिले? विजय कुमार तिवारी और गा लूँ जिन्दगी की धून पर, कल न जाने प्रीति को मंजिल मिले? दर्द में उत्साह लेकर बढ़ रहा था रात-दिन, आह में संगीत संचय कर रहा था रात-दिन। आज सावन कह रहा है बार-बार, क्यों लिया बंधन स्व-मन से रात-दिन? सोचता हूँ चुम लूँ वह पंखुड़ी, कल न जाने कौन सी बेकल खिल
02 दिसम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x