स्वाति बरूआ : असम की पहली और देश की तीसरी जज जिन्होंने LGBT समुदाय को……

12 दिसम्बर 2018   |  अंकिशा मिश्रा   (36 बार पढ़ा जा चुका है)

स्वाति बरूआ : असम की पहली और देश की तीसरी जज जिन्होंने LGBT समुदाय को……  - शब्द (shabd.in)

न्यायपालिका प्रजातंत्र के चार स्तम्भों में से एक है। न्यायपालिका ही वो जगह है जहाँ हर किसी को इंसाफ मिलता है और अपने हक़ मिलते है। आज उसी न्यायपालिका में अपने हक़ की लड़ाई हमेशा लड़ती आ रहीं ट्रांसजेंडर स्वाति बरूआ न्याय की कुर्सी पर बैठ के न्याय करेंगी।बता दें कि 26 वर्षीय स्वाति अब असम की पहली और देश की तीसरी ट्रांसजेंडर जज हैं।


LGBT (समलैंगिकों) समुदाय हमेशा से ही अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाते रहे हैं। इसी में आते हैं ट्रांसजेंडर यानि जिन्हें आम भाषा में हिजड़ा कहा जाता है और भारत में आज भी इस मुद्दे पर बात करने से लोग कतराते हैं। समाज में हमेशा से ही LGBT (समलैंगिकों) को अलग नज़रों से देखा जाता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे ही ट्रांसजेंडर महिला की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने समाज के मुँह पर अपनी क़ाबलियत का तमाचा मारा है और अपने और अपने तबके के लोगों के लिए सफलता की कई रहें खोली साथ ही अपने सपने को पूरा किया।


swati baruah -indian transgender judge


ये कहानी है गुवाहाटी की रहने वाली स्वाति बरुआ की जो अब शहर की राष्ट्रीय लोक अदालत में बतौर जज काम करेंगीं । स्वाति को डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी द्वारा नियुक्त किया गया।कड़ी मेहनत और समाज द्वारा उत्पन्न की गयीं कई समस्याओं के बाद स्वाति ने ये मुकाम हांसिल किया। स्वाति भी बाकी ट्रांसजेंडर्स की तरह समाज के ताने सुनते हुए गुमनामी के अंधेरों में जी रहीं थी। साल 2012 में स्वाति उस वक्त चर्चा में आईं, जब अपने अधिकार की लड़ाई लड़ते हुए वह बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचीं।


बता दें कि स्वाति लंबे समय से ट्रांसजेंडर अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। वह कहती हैं, “हम ट्रांसजेंडर्स को समाज में तिरस्कार का सामना करना पड़ता है। हमें बाकी इंसानों से अलग देखा जाता है।” इस नियुक्ति के बाद स्वाति का मानना है कि उनकी नियुक्ति के बाद से समाज में ट्रांसजेंडर्स के लिए एक नई राह खुलेगी और ट्रांसजेंडर्स के प्रति लोगों की मानसिकता भी बदलेगी।


इस साल स्वाति ने गुवाहाटी हाई कोर्ट में एक पीआईएल फाइल की थी, ताकि ट्रांसजेंडर के अधिकारों से जुड़े 2014 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश को प्रदेश में लागू करवाया जा सके। गुवाहाटी हाई कोर्ट ने मई 2018 में राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि छह महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश को नियमानुसार लागू किया जाए।




अगला लेख: निदा फ़ाज़ली -दिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती In Hindi



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
12 दिसम्बर 2018
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में फुटपाथ पर एक अलग ही दुनिया बसती है।जिसमें अधिकतर बसेरा बच्चों का हैं।ये बच्चे न जाने रोज़ कितने समस्याओं से झुझते हैं जिसमें नशे की लत, अभद्र व्यवहार और हिंसा का शिकार तो जैसे
12 दिसम्बर 2018
03 दिसम्बर 2018
चुनाव शुरू होते ही हर पार्टी अपने नए नए पैंतरे अपनाना शुरू कर देती है। बता दें कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इन दिनों कई मंदिरों में दर्शन करते हुए दिख जाते हैं।और इतना ही नहीं राहुल गाँधी ने खुद को जनेऊधारी हिंदू और शिवभक्त तक बताया है। लेकिन उनके इस बयानों और उनके उठाये क़दमों ने विर
03 दिसम्बर 2018
27 नवम्बर 2018
Hindi poem -Nida Fazliदिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलतीदिल में ना हो ज़ुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलतीख़ैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलतीकुछ लोग यूँ ही शहर में हमसे भी ख़फा हैंहर एक से अपनी भी तबीयत नहीं मिलतीदेखा था जिसे मैंने कोई और था शायदवो कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलतीहँसते हुए चेहरो
27 नवम्बर 2018
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x