सामाजिक कुरीतियाँ

21 दिसम्बर 2018   |  साधना   (24 बार पढ़ा जा चुका है)

जब कभी भी हम सामाजिक कुरीतियों पर चर्चा करते हैं तो आमतौर पर जाती, धर्म भेदभाव, बालविवाह, अशिक्षा जैसी कुछ कुरीतियों पर ही ध्यान जाता है, जो कि अशिछित लोगों में ही प्रभावशाली पायी जाती हैं, या यो कहें की अशिक्षा ही कुरीतियों का मूल कारण है !


लेकिन क्या हम ऐसी सामाजिक कुरीतियों के बारे में जानते हैं जो शिछित लोगों द्वारा फैलाई जाती हैं, और जिनको फ़ैलाने में शिछित लोगों का हाथ है, जिन पर हमारा ध्यान नहीं जाता! ऐसी कुरीतियों या बुराईयों के शिकार वो लोग हो जाते हैं जिनको चालाकी नहीं आती, यानी सीधे सादे लोग !

ऐसी ही एक सामाजिक बुराई ये है की जब किसी व्यक्ति या परिवार को व्यवसाय या नौकरी करने के लिए अपने मूल राज्य या क्षेत्र को छोड़कर किसी दूसरे राज्य या क्षेत्र में जाना पड़ता है, तब अगर वह व्यक्ति या परिवार वहां के प्रभावशाली लोगों की या यो कहें की दादा लोगों की जी हुजूरी नहीं करता तो उसके परिवार की शान्ति कैसे भंग की जा सकती है! जिससे परेशान होकर वह परिवार अपनी मेहनत की कमाई से बने हुए घर को छोड़ कर अन्यत्र जाने की सोचने लगता है! आईये जानते हैं की कैसे उस परिवार को प्रभावित (परेशान) किया जा सकता है :

1. उस परिवार का पानी रोक देना

2. वक़्त बेवक़्त बिजली काट देना

3. वक़्त बेवक़्त बिना वजह घंटी बजाकर परेशान करना

4. डाक गायब कर देना

5. जहाँ तक दादा लोगों की पहुँच हो उस परिवार के हर कार्य में विघ्न डालना!

6. राजनीतिक पहुंचा होने पर योग्य होने पर भी उस व्यक्ति के अनावश्यक रूप आदि इस सबसे इस व्यक्ति को, और परिवार को मानसिक यातना झेलनी पड़ती हैं! कुल मिलाकर ये सामाजिक बुराई उन कुरीतियों से ज्यादा घातक हैं जो लम्बे समय से चली आ रही हैं! और इससे छुटकारा पाना अत्यंत महत्वपूर्ण है !




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