बात और थोड़े दिन की।

31 दिसम्बर 2018   |  जानू नागर   (99 बार पढ़ा जा चुका है)

बात और थोड़े दिन की।

चुरा लो और क्या चुराओगे?
पूछेगीं नज़रे,तो क्या बताओगे?
जुबान चुप होगी, होठ सिल जाएंगे।
मयते कब्र मे दफ़न हो जाएंगी।
अब वक्त शुरू हुआ हैं, विलय का।
बैंक ही नहीं सबकुछ विलय हो जाएगा।
चलता रहा यू ही कारवां, आने वाली पीढ़ियाँ भी विलय हो जाएंगी।
खोजते रहना जाति, धर्म, जब इंसानियत ही विलय हो जाएगी।
आसमान का टूटा तारा भी जमी मे आ जाता हैं।
हम सब तो पहले से जमी मे जमे हैं और उसी मे जमते जाएंगे।
तब न दफ़न होगी मइयते कब्र मे न जलेंगी समशान मे।
न होगा नशीब कफन का, बस साया होगा आसमान का

अगला लेख: छोड़ेंगे न साथ।



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
31 दिसम्बर 2018
सविता अपने बचपन की सारी खुशीयों को अपने माँबाप के साथ नही बाँट पाई। गाँव को समझ नही पाई, चाँद तारों की छाव में उनकीठंडक को भाँप नही पाई, चन्द सवाल ही पूछ पाती कि चंदा मामा कितनीदूर है? गोरी कलाइयों में बंधे दूधिया तागे कमजोर पड़ गए थे| पैरो में पड़ी पाज़ेब की खनक छनक से अपने नानी नाना के दिल को मोहने ल
31 दिसम्बर 2018
18 दिसम्बर 2018
*परमात्मा की बनाई हुई यह महान सृष्टि इतनी रहस्यात्मक किससे जानने और समझने मनुष्य का पूरा जीवन व्यतीत हो जाता है , परंतु वह सृष्टि के समस्त रहस्य को जान नहीं पाता है | ठीक उसी प्रकार इस धरा धाम पर मनुष्य का जीवन भी रहस्यों से भरा हुआ है | मानव के रहस्य को आज तक मानव भी नहीं समझ पाया है | इन रहस्यों क
18 दिसम्बर 2018
20 दिसम्बर 2018
हम आपके लिए 11 बहुत ही खूबसूरत तस्वीरें लेकर आए हैं। आज की तस्वीरों पर आपको गर्व जरूर होगा। क्योंकि ये तस्वीरें हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है। भारत में सैकड़ों धर्म मौजूद है। यहां पर हिंदू और मुस्लिम दो मुख्य धर्म है। इन दोनों धर्मो को मानने वाले करोड़ों लोग इस देश में रहते हैं दोनों ही समुदाय के
20 दिसम्बर 2018
20 दिसम्बर 2018
ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों की मनमानी के किस्से तो आपने सुने ही होंगे. ग्राहकों को लुभाने के लिए ये कंपनियां न जाने क्या-क्या हथकंडे अपनाती हैं. इनकी मनमानी इस कदर बढ़ गई है कि ये कुछ भी बेचने को तैयार हैं, चाहे उससे किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस ही क्यों न पहुंचे.Source: rack
20 दिसम्बर 2018
13 जनवरी 2019
छोड़ेंगे न साथ।परछाई ही हैं जो स्वयम के वजूद को और मजबूत करती हैं। बाकी तो सभी साथ छोड़ देते हैं। परछाई हर वक्त साथ रहती हैं। दिन हो तो आगे-पीछे अगल-बगल और जैसे ही ज़िंदगी मे अंधेरा होता हैं वह खुद मे समा जाती हैं पर साथ नहीं छोडती हैं। कभी आपसे आगे निकलती हैं और तो और वह आपसे बड़ी और मोटी भी हो जाती है
13 जनवरी 2019
04 जनवरी 2019
पा
पानी...अब न खोदो कुआँ न गाड़ों हैंड पम्प, न लो नाम समरसेबल का।नदी, नहर, सागर हो रहे प्रदूषित न नाम लो तालाबो का।बहने दो पानी को पाईप लाइनों मे, न नाम लो टैंकरो का। छत मे रखी टंकियाँ हो रही हैं बदरंग, न नाम लो आरो का।दूध से महंगा बिक रहा हैं, बंद बोतलों मे बिसलेरी का पानी।सरकार प्लांट लगवाए यह कहकर कि
04 जनवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x