बात और थोड़े दिन की।

31 दिसम्बर 2018   |  जानू नागर   (103 बार पढ़ा जा चुका है)

बात और थोड़े दिन की।

चुरा लो और क्या चुराओगे?
पूछेगीं नज़रे,तो क्या बताओगे?
जुबान चुप होगी, होठ सिल जाएंगे।
मयते कब्र मे दफ़न हो जाएंगी।
अब वक्त शुरू हुआ हैं, विलय का।
बैंक ही नहीं सबकुछ विलय हो जाएगा।
चलता रहा यू ही कारवां, आने वाली पीढ़ियाँ भी विलय हो जाएंगी।
खोजते रहना जाति, धर्म, जब इंसानियत ही विलय हो जाएगी।
आसमान का टूटा तारा भी जमी मे आ जाता हैं।
हम सब तो पहले से जमी मे जमे हैं और उसी मे जमते जाएंगे।
तब न दफ़न होगी मइयते कब्र मे न जलेंगी समशान मे।
न होगा नशीब कफन का, बस साया होगा आसमान का

अगला लेख: छोड़ेंगे न साथ।



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
19 दिसम्बर 2018
क्रिसमस ईसाई समुदाय का सबसे बड़ा त्यौहार है । जैसे हिन्दू समुदाय के लिए दीपावली, मुस्लिम समुदाय के लिए ईद और सिख समुदाय के लिए लोहड़ी का त्यौहार होता है ठीक उसी तरह क्रिसमस ईसाई समुदाय का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण त्यौहार होता है। क्रिसमस हर साल 25 दिसंबर के दिन मनाया जाता
19 दिसम्बर 2018
31 दिसम्बर 2018
2013 savita doosara bhag होली के रंग जीवन के संग। सर में पड़ा सूखारंग, नहाते वक्त ही बताता है कि मै कितना चटकीला हूँ। पानी की धार के साथ शरीरके हर अंग मे अपनी दस्तक की खबर के तार को बिछाता। उस समय यह अनुमान लगाना मुश्किलहो जाता है कि यह किसका रंग हैं? फाल्गुन का महिना आधा होचला था। चटकीले रंग फीके हो
31 दिसम्बर 2018
30 दिसम्बर 2018
(कसैलेपन का कसाव) मेड़मफोटो खीचेंगी यह लाईन अभद्रता भरी लाईन या अभद्रता की प्रतीक थी। एक चाटा भरी आवाजके साथ प्रतीक वर्दियों से घिर गया। किसी के कमर मे काली बेल्ट पैरो मे काले जूतेजिसमे चेरी की पोलिस ही चमक रही थी। किसी के कमर मे बंधी लाल बेल्ट पैरो मे लालजूता वह दरोगा या कह लो सब इंस्पेक्टर यह ला
30 दिसम्बर 2018
15 जनवरी 2019
पहले के दास आज के संत-योगी आज के संतो व योगी मे बहुत फर्क हैं। पहले का दास राजा के अधीन होकर अपनी रचनाओं से उन्हे सब कुछ बता देते थे। इनाम पाकर अपने आप को धन्य समझते थे। आज के योगी संत, राजा बनकर भी कुछ नहीं हासिल कर पाते। भगवान को, वह अपना आईना समझते हैं, और उसमे अपना बंदरो की तरह बार-बार चेहरा द
15 जनवरी 2019
31 दिसम्बर 2018
सविता अपने बचपन की सारी खुशीयों को अपने माँबाप के साथ नही बाँट पाई। गाँव को समझ नही पाई, चाँद तारों की छाव में उनकीठंडक को भाँप नही पाई, चन्द सवाल ही पूछ पाती कि चंदा मामा कितनीदूर है? गोरी कलाइयों में बंधे दूधिया तागे कमजोर पड़ गए थे| पैरो में पड़ी पाज़ेब की खनक छनक से अपने नानी नाना के दिल को मोहने ल
31 दिसम्बर 2018
03 जनवरी 2019
आशियाना नहीं धोखा हैं.डीडीए फ्लैट, यह नाम अपने आप मे बहुत बड़ा हैं दिल्ली शहर के लिए यह लाईन उस औरत केज़ुबान से सुना जिसने पहली बार सावदा घेवरा के फ्लैटों मे अपने कदमो को रखा थाजिसके पापा ने 1985 मे एक घर होने की चाहत को सजाया था। वह सफदर जंग कालोनी से आएथे उनके पास अपनी कार थी उसमे पाँच लोग सवार थे।
03 जनवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x