सब कुछ लागे नया-नया

31 दिसम्बर 2018   |  जानू नागर   (25 बार पढ़ा जा चुका है)

सब कुछ लागे नया-नया ।

दे-दो जो देना चाहते हो नये साल मे,

यह नया साल हर ठंडी मे ही आता हैं।

भारतीय रीत रिवाज मे नया साल हम तब मनाते हैं जब हमारे देश का किसान व जवान दोनों खुश होते हैं। गाँव के खुले मैदान व खेतो मे बहन बेटियों की शादियाँ हो रही होती हैं। पेड़ों की छाव मे बिस्तर लगे होते हैं। कुआँ का ठंडा पानी जब हम चूल्लू भर-भर कर पानी पीते हैं। इन बातों को कौन मानता हैं? हम ये सारे गिले शिकवे भूलाकर आप सब को नया साल मुबारक !

अगला लेख: छोड़ेंगे न साथ।



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