३१कि पार्टी

03 जनवरी 2019   |  नृपेंद्र कुमार शर्मा   (98 बार पढ़ा जा चुका है)

2010 के 31 दिसंबर की कोहरे वाली रात थी, जगह जगह नए साल की पार्टी से शहर भर के होटल ढावे गेस्ट हाऊस रौनकमय होकर झूम रहे थे। शहर तो शहर आसपास के फार्महाउस उससे भी ज्यादा रंगीनी में डूबे हुए थे। युवाओं की पार्टी हो और शराब का दौर ना चले ऐसा होना असम्भव ही होता है ऐसे ही शहर से सूनसान में एक बड़ा फार्म हाउस था उसके मालिक के बेटे रोहन ने अपने दोस्तों को न्यू ईयर पर्टी दी थी। पार्टी में उसके पाँच दोस्त- विकास, प्रिया, रजनी, सुरेश और मनोज शामिल हुए, आधी रात तक शराब और नाच गाने का दौर चलने के बाद मनोज, प्रिया और रजनी के साथ वापस लौट आया लेकिन रोहन, विकास और सुरेश बची हुई शराब खत्म करते वहीं पर रुक गए। कोई एक घण्टा लगातर पीने के बाद तीनों की आंखे मुंदने लगी, उन्हें नशे ने पूरी तह अपनी गिरफ्त में ले लिया अब उनकी बातों में बातें कम और गाली ज्यादा निकल रही थीं। अरे यार सुरेश शराब हो गयी पार्टी खत्म हो गयी लेकिन 'मूड' नहीं बना, रोहन सिगरेट सुलगाते हुए बोला। हाँ यार जब तक फड़कता हुस्न और शबाब ना हो पार्टी का मज़ा अधूरा ही रहता है भ,,,का विकास ने भी एक भद्दी सी गाली से उसकी बात का समर्थन किया। आओ फिर चलते हैं शायद कोई मिल जाये, कोई आइटम हमारी तरह प्यासी पार्टी से लौटती हुई, क्यों सुरेश? रोहन हंसते हुए बोला। नहीं!!, तुम लोग हर बार ऐसा ही करते हो अच्छी बात है क्या यार, ओर फिर इतनी रात में इतने कोहरे के बीच,,, सुरेश कुछ सहमते हुए बोला। फट्टू साला, विकास हंसने लगा, अरे किस्मत आजमाने में क्या जाता है और कुछ नहीं तो कुछ हैंगओवर ही कम हो जाएगा, आओ चलते हैं यार एक राउंड मार कर आते हैं, विकास ने सुरेश को हाथ पकड़ कर खींचते हुए कहा और उसका दूसरा हाथ रोहन ने पकड़ लिया और उसे खींच कर बाहर ले आये। मरोगे सालो तुम ठंड में अब भ**वालो इतने कोहरे में अपनी उंगलिया तक महसूस नहीं हो रही ऐसे में तुम्हे छमिया की सूझ रही है, जाने को र**तुम्हारा इन्तज़ार कर रही है इस कोहरे में बैठी की आओ राजा मुझे,,,सुरेश उन्हें लगातार लौटने को कह रहा था। अबे ओ ग*** साले कभी तो अच्छा सोच लिया कर, क्या पता मिल ही जाए, ऐसे भी आज की रात कई कालगर्ल घूमती हैं फार्म हाउस के आसपास मोटे माल की उम्मीद में कोई मिल गयी तो साली जो मांगे हाँ कर देना हमें कौनसा कुछ देना है उसे सुबह ग** पर लात मारकर भगा देंगे भो**वाली र** को, रोहन गन्दी हंसी हँस रहा था। अभी ये लोग कोई आधा किलोमीटर ही चले होंगे कि तभी इन्हें किसी मधुर धुन में निकलती मुंह से बजती हल्की हल्की सीटी की आवाज सुनाई दी। इसस्सशः !!!कोई है आगे रोहन मुंह पर हाथ रखकर चुपचाप चलने का इशारा करते हुए बोला। कोई लड़की है यार इतनी मीठी आवाज में सीटी बजा रही है खुद कितनी स्वाद होगी साली, विकास अपने होंठों पर जीभ फिराता हुआ वहशियाना हँसी धीरे से हँसा। चलो जल्दी देखते हैं कौन है पक्का कोई चालू माल होगी यार काम बन गया अपना बस जितने भी मांगे एक दो बात करके मान लेना, रोहन की आंखों में कामुकता की चमक थी और होंठो पर वहशियत की हँसी। थोड़े और आगे बढ़ने पर इन्होंने देखा एक पतली छरहरी अल्हड़ जवान लड़की जीन्स टॉप पहने उछलती गाती सीटी बजाती मस्ती में चल रही थी। कौन है वहाँ विकास ने जोर से पुकारा। तभी वह लड़की पलटी रात के अंधेरे और घने कोहरे में भी उसका गोरा रंग चान्दनी जैसा चमक रहा था और उसके गुलाबी होंठो पर खिली हंसी दूर से दिख रही थी। कककोंन!!! हो आप? सुरेश घबराते हुए बोला क्योंकि उसने ज्यादा नहीं पी थी, ऐसे भी वह हमेशा गलत काम का विरोध करता था लेकिन दोस्ती निभाना उसके स्वभाव में था। मैं परी, उस लड़की ने मुस्कुरा कर कहा जो दिसम्बर की कड़क ठंड और घने कोहरे के बावजूद स्लीवलेस टॉप ओर चुस्त जीन पहनी थी, उसके आस पास जाने कैसा प्रकाश फैला था, जिसमें उसका गोरा रंग ज्यादा ही सफेद लग रहा था और उसकी आंखें बिल्ली जैसी चमक रही थीं। उसके आने के बाद वातावरण में अजीब सी सिहरन महसूस हो रही थी, उल्लू ओर चमगादड़ बार बार उसके पैरों के पास से उड़ रहे थे, जैसे उसके पैर छू रहे हों। चलो यार वापस चलते हैं, सुरेश वातावरण के संकेत समझकर विकास को कोहनी मारते हुए धीरे से बोला। सुरेश उस वातावरण में ख़ौफ़ जदा हो रहा था उसने कोहनी मारकर विकास और रोहन को लौट चलने के लिए कहा लेकिन वे दोनों तो उसकी खूबसूरती में खोए थे तो उन्होंने सुरेश की बात पर ध्यान नहीं दिया। आप किसके साथ हो ?? सुरेश ने परी से सवाल किया। अकेली। उसने संक्षिप्त उत्तर दिया, और हँसने लगी। आपको डर नहीं लगता इतनी रात में यूँ अकेले?? डर! किससे?? इंसानो से ?? कुछ लुटने का,?? जो मेरे पास था वो तो पहले ही तुम लोग,,,,परी का चेहरा गुस्से में लाल हो गया लेकिन अगले ही पल वह होंठो पर मुस्कान ला कर बोली, हम तो "उसे" बेचती हैं ,तो किसी को लूटने की क्या ज़रूरत और फिर कोई कोशिश भी करे लूटने की तो मैं ऐसे ही तैयार हो जाती हूँ। बाकी रही जंगली जानवरों की बात तो वे हमला तो करते हैं लेकिन केवल पेट की भूख लगने पर, ऐसे वासना में अंधा होकर तो बस कोई इंसान,,,, नहीं नहीं कोई वहसी दरिंदा ही हो सकता है जो वासना की खातिर किसी मासूम लड़की को शिकार बनाये, वह घृणा से देख रही थी। लेकिन तुम लोग?? वह उनकी और देखती हुई बोली। हम भी वही खरीदने निकले हैं जो तुम बेचती हो, विकास उसे घूरते हुए बोला। ओह्ह!! ठीक है चलो फिर, परी बोली। लेकिन आप?? सुरेश ने कुछ बोलना चाहा। लेकिन परी ने उसे चुप कराते हुए कहा," अरे चलो यहां से कोई और आ जायेगा तो मुश्किल हो जाएगी ऐसे भी आजकल पुलिस बहुत परेशान करती है बाकी तुम जो दोगे हो जाएगा, चलो मेरे साथ। परी एक तरफ चल दी और ये तीनों उसके पीछे चलने लगे। लगभग बीस मिनट चल कर ये लोग एक ऐसी जगह आ गए जहां बहुत ऊंचे और घने पेड़ों के बीच आठ दस गज का एक गोल मैदान था जो चाँद की रोशनी में एकदम साफ दिखाई दे रहा था। ये हमें कहाँ ले जा रही है यार इधर तो हमारा फार्म हाउस नहीं है, सुरेश रोहन का हाथ पकड़कर रोकते हुए बोला, मुझे तो बहुत डर लग रहा है यार देखो इसे, लगता है जैसे इसे इस अंधेरे में इतना साफ दिखाई दे रहा है जितना हमें दिन के उजाले में। अरे चुप कर डरपोक रोहन उसकी खिल्ली उड़ाते हुए बोला। आओ दोस्तों तभी उसका खनकता स्वर गुंजा। आसपास का वातावरण कुछ ज्यादा ही सर्द हो रहा, हवा के झोंके रह रह कर पेड़ों को झुका रहे थे , चमगादड़ ओर उल्लू भी उस लड़की से डर रहे थे ,उसका चेहरा ऐसे चमक रहा था जैसे चँदा अपनी सारी चान्दनी बस उसी पर लुटा रहा हो। आस पास गहन अंधकार फैला था लेकिन उसकी देह दूध सी चमक रही थी और आंखे दिए सी जल रही थीं। चारों ओर भयंकर डरावना शोर हो रहा था, सुरेश ने विकास और रोहन को इशारा करके समझाया। रोहन उस लड़की के चेहरे को ध्यान से देखने लगा, उसके चेहरे की जगह बस एक काला घेरा था, उसमें उसकी डरावनी आंखें दिए कि लौ जैसे चमक रहीं थी,अभी रोहन विकास की ओर पलटा तभी, परी के मुंह से दो दांत लम्बे होकर बाहर आने लगे ,,,, उफ़्फ़फ़!!! भागो चुड़ैल है ये धोखा देकर लायी है हमें यहाँ, कहकर रोहन एक ओर दौड़ा लेकिन अचानक विकास और सुरेश की दर्दभरी चीत्कार सुनकर रुक गया। उसने पलट कर देखा, सुरेश और विकास के सामने की जमीन फ़टी हुई थी और ये दोनों कमर तक जमीन में धँसे हुए थे। नहीं!!! रोहन के हलक से भय चीख बन कर निकला और वह उनकी ओर दौड़ा ,अभी मुश्किल से दो कदम बढ़ाए होंगे कि बिछुओं की पूरी फ़ौज उन दोनों पर झपटी काले काले बड़े बड़े बिछु अपने डंक उठाये उधर लपक रहे थे। ओ गॉड,,,, नहीं!! नहीं! कहता हुए वह नीचे बैठने लगा तभी परी ने अपने हाथ को घुमाया और जहाँ रोहन बैठ रहा था उसी जगह एक नुकीला खूंटा जमीन से निकला और रोहन के 'जिस्म' में घुसता चला गया,वह तड़फ उठा उसकी दर्दनाक चीख निकल गई। कौन है तू क्या कर रही है हमारे साथ,, रोहन दर्द से तड़फते हुए चीखा। अचानक परी उसके ठीक सामने आकर खड़ी हो गयी अब उसका चेहरा बिल्कुल अलग लग रहा था बहुत मासूम पहले से भी बहुत ज्यादा खूबसूरत। ले पहचान मुझे कुत्ते, उसने रोहन के सर पर हाथ रख कर थोड़ा नीचे दबाया जिससे खूंटा उसके अंदर सरकने लगा। नही मत करो छोड़ दो हमें हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है रोहन के हाथ आपस में जुड़ गए। गौर से देख मुझे पहचान मुझे क्योंकि जब तक तू मुझे ना पहचाने तुझे तड़फते देखने में कतई मज़ा नहीं आएगा। याद कर इस जगह को मा***द याद कर 31 की रात आज ही का दिन यही जगह,,, पूरे एक साल इंतज़ार किइस मैंने तुम दरिन्दों का परी ने जोर से उसके सर को झटका दिया। रोहन आंखे फाड़ कर उसे देखने लगा उसके चेहरे को देखते देखते वह पिछले साल की 31 की पार्टी की याद में चला गया ,,, उस दिन भी ये तीनों आज ही की तरह नशे में डूबे किसी कालगर्ल की तलाश में घूम रहे थे, अचानक किसी ने इनकी गाड़ी को हाथ देकर रुकने का इशारा किया। गाड़ी की लाइट की रौशनी में रोहन ने देखा सामने एक बहुत ही खूबसूरत लड़की खड़ी थी,उसे देखकर रोहन का पांव गाड़ी के ब्रेक पेर जम गया गाड़ी चरररर की जोरदार आवाज करती हुए घिसटकर एकदम उस लड़की के सामने जाकर रुकी। कोन हो कहाँ जाना है? रोहन ने पूछा। शहर ,उसने धीरे से कहा। शहर तो नहीं जा रहे हम लेकिन आपको छोड़ देंगे, रोहन पास बैठे विकास को पीछे जाने का इशारा करते हुए बोला। ओर वह लड़की आगे उसके पास आकर बैठ गई। क्या नाम है आपका? रोहन ने मुस्कुरा कर पूछा। परीधी, उसने धीरे से मुस्कुरा कर जबाब दिया। वाओ परी धी,, ब्यूटीफुल नेम, बिल्कुल आपही की तरह स्वीट,,। थैंक यू उसने मुस्कुरा कर जबाब दिया। लेकिन इतनी रात को आप इस सुनसान में अकेले??, नहीं मैं अपने दोस्त के साथ थी लेकिन साले ने पार्टी में ज्यादा पी ली और यहाँ सुनसान जंगल में मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा मुझे बहुत गुस्सा आया तो मैने उसको थप्पड़ मार दिया और हमेशा के लिए रिश्ता तोड़ने को कहा। तब वो कमीना,, मुझे यहाँ अकेले छोड़कर भाग गया। भड़वा साला, भ***का परी ने अजीब मुंह बनाकर एक भद्दी गली दी और गुस्से से थूकने लगी। तो अब? रोहन ने मुस्कुरा कर पूछा। मूड ऑफ हो गया यार अब घर जाकर सोऊंगी, परी गुस्से में बोली। क्यों ना आप हमारे फॉर्म हाउस पर चलें ??जो नज़दीक ही है, वहाँ हम जल्दी पहुंच जाएंगे आप आराम से आराम करना और हम आपका साथ देंगे, रोहन ने अर्थपूर्ण शब्द कहे। नहीं अब तो बस घर जाकर सोना है, अब मन नहीं है पार्टी का। जितने कहेगी उतने पैसे दे देंगे यार आज रात हमारी पार्टी बना दे, रोहन गन्दी नज़रो से उसे घूरते हुए कहा। नहीं, आयी अम नॉट आ प्रॉस्टिट्यूट एंड नॉट आ कॉलगर्ल सो प्ल्ज़ डोंट टॉक लाइक आ डर्टी माइंड विध मी। रेट बोल साली ज्यादा पवित्र मत बन तभी विकास ने उसे घूरते हुए कहा। डोंट टॉक लाइक दिस, आयी एम ऑलरेडी हर्ट बैडली, प्ल्ज़ ड्राप मी इन सिटी आयी थिंक यू बोथ आर गुड़ फेलो, आयी नीड तो बे एट होम एज सून एज पॉसिबल,,उसने मुस्कुराने की कोशिश करते हुए कहा। चरररर अचानक रोहन ने गाड़ी रोक दी,उतर ,,चल नीचे आ, रोहन गाड़ी से उतरते हुये बोला। य यहाँ!!, क्यों रोक दी गाड़ी, क्या तुम भी मुझे छोड़कर,,?? उसने आंखों में आंसू भरकर कहा। हम उस लौंडे की तरह चूतिया नहीं हैं जो ऐसे माल की यूँही छोड़ कर चले जाएं, रोहन जोर से हंसते हुए बोला। नहीं!!, हटो ,,, परी रोहन को धक्का मारकर एक तरफ भागी लेकिन विकास ने दौड़ कर उसे पकड़ कर जमीन पर पटक दिया और दोनों जोर जोर से हँसने लगे। इसे जाने दो यार ऐसे जबरदस्ती करना ठीक नहीं, सुरेश बहुत धीरे से बोला, ऐसे जबरदस्ती करके क्या मिलेगा हमें रोहन? सुरेश ने डरते हुए बोला। ओ, फट्टू फिर फट गई तेरी? रोहन ने उसे झिड़का और परी का टॉप पकड़ कर खींच दिया जो चरररर कि आवाज करता फट गया और परिधि मुंह के बल जमीन पर गिर पड़ी। तुम्हे भगवान का वास्ता मुझे जाने दो,मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है प्ल्ज़ छोड़ दो मुझे। परी रोते हुए अपने हाथ सीने से चिपकाने लगी। छोड़ देंगे परेशान क्यों हो रही है तू बस हमें खुश कर दे, विकास हँसते हुए बोला। नहीं !!! परी जोर से चीखी, बचाओ बचाओ,, और विकास ने उसके मुंह पर हाथ रखकर उसकी आवाज दबा दी। परिधि?? रोहन काँपती आवाज में बोला ,, लेकिन तुम तो। हाँ मर गई थी मैं तुमने मार दिया था मुझे तड़फा तड़फा कर, कितना रोई थी मैं लेकिन तुम दरिन्दों ने,,, कहते हुए परी ने रोहन के सर पर रखे हाथ को जोर से दबाया, जिससे खूंटा एक झटके में उसके अंदर सरकने लगा। देख इस जगह को ध्यान से दरिंदे यही वह जगह है जहाँ उस दिन तुमने मेरी इज्जत,,, परी क्रोध में जलने लगी उसका गोरा रंग क्रोधाग्नि से लाल हो गया उसने रोहन के सर को जोर से दबाया। आहहहहहहह!! रोहन के मुँह से बहुत तेज़ चीख निकली, परी मुझे माफ़ कर दो मर जाऊंगा मैं बहुत पेन हो रहा है,, रोहन रोने लगा। अर्रे यार कुछ नहीं होगा बस थोड़ा ही तो ओर है उसके बाद बहोत मज़ा आएगा मेरी जान,,, परी जोर से हँसी। रोहन को फिर वह मंजर याद आ गया जब वे लोग परिधि के साथ जबरदस्ती,, मुझे छोड़ दो मर जाऊंगी मैं , परी अपने ऊपर से रोहन को धक्का देते हुए बोली। चटाख!! साली नखरे करती है रोहन उसके गाल पर जोर से मार कर बोला, अरे बस थोड़ा और फिर तुझे भी मज़ा आएगा ऐसे भी कोई नहीं मरता इस खेल से और वह गन्दी हंसी हंसते हुए जबरदस्ती परी में समाने की कोशिश करने लगा। नहीं!!!!, छोड़ दो कमीनो परी ने अपनी टांग पकड़े विकास के मुंह पर जोर से लात मारी जिससे वह चिढ़कर उसके मुंह पर नाखून गड़ा कर चिल्लाया, साली ज्यादा मर्द बन रही है, रोहन कर जल्दी साली बहुत उछल रही है, और विकास ने उसके मुंह मे ****वह तड़फ उठी उसकी चीखें उसके गले में घुट कर रह गईं। थोड़ा और,,, परी जोर से हंसते हुए रोहन को जोर से दबाने लगी। रोहन दर्द से तड़फते हुए रोता रहा, तभी परी ने हाथ से इशारा किया उसका इशारा पाते ही सारे बिच्छू एक साथ विकास और सुरेश पर झपटे,,, नहीं,,!!!,सुरेश और विकास एक साथ चीखे,,, कई बिछु दौड़ कर एक साथ विकास के मुंह में घुस गए और उसके होंठों पर डंक मारने लगे। कुछ बिछु सुरेश के पैरों पर चढ़ गए। मैंने क्या किया??? सुरेश चीखा, मैं तो इन्हें मना कर रहा था परी और मैने तुम्हे हाथ भी नहीं लगाया था, सुरेश गिड़गिड़ाया। हुँह!! बचाया भी तो नहीं था तूने मुझे कितना तड़फ रही थी मैं तू भी तो देख कितना दर्द होता है कहकर परी ने इशारा किया और एक बिच्छु ने उसके पैर पर अपना डंक गड़ा दिया आहहहहहहहह नहीं ,,!!, सुरेश दर्द से तड़फ उठा। इधर बिछुओं ने डंक मार मार कर विकास के होंठ सुजा दिए थे वह चीख रहा था रो रहा था उसकी आवाज गले में घुट रही थी, वह हाथ जोड़ कर इशारे से छोड़ देने की गुहार लगा रहा था। ऐसा,!< बिल्कुल ऐसा ही लग रहा था मुझे भी उस वक्त जब तू मेरे मुंह मे,,, परी गुस्से से चीखी,अब समझ आया तुझे की कैसा लगता होगा जब किसी की बिना मर्जी तुझ जैसे घिनोने लोग अपनी जबरदस्ती, और परी ने इशारा किया तो सारे बिच्छू एक साथ विकास के मुँह, आँख, कान और नाक में घुंस गए और थोड़ी ही देर में दम घुटने से उसकी मौत हो गई, परी ने घृणा से मुँह बिगाड़ कर उसके मुंह पर थूक दिया। अब तो तेरा बदला पूरा हो गया चुड़ैल अब हमें छोड़ दे, रोहन फिर गिड़गिड़ाया। नही!!ं अभी नहीं कहते हुए परी ने भरपूर ताकत से उसके सर को दबाया जिससे खूँटा पूरा उसके पेट में घुस गया और उसकी आँते फट कर बाहर आ गयीं,उसी के साथ बाहर आ गई उसकी आखिरी सांस भी। अब परी सुरेश की तरफ पलटी , सुरेश चेहरे पर दर्द लिए हाथ जोड़े कातर नजरों से उसे ही देख रहा था। नहीं!! मुझे मत मारो ,मैने तो कई बार इनसे तुम्हे छोड़ने को कहा था लेकिन इन्होंने मेरी बात नहीं सुनी । लेकिन इन्होंने तुम्हे जान से तो नहीं मारा था फिर तुम कैसे मरी? सुरेश ने पूछा। उस दुष्कर्म के बाद मैं क्या मुंह लेकर जीती?? तो मैंने पुल से कूद कर अपनी उस घिनोनी जिंदगी का अंत कर दिया और फिर जब मुझे मुक्ति नहीं मिली तो मेरे मन में अपना बदला लेने की चाहत होने लगी और आज मेरा बदला पूरा हुआ आज खत्म हुआ मेरी जिंदगी का आखिरी साल, अब आएगा मेरी मुक्ति का नया साल, और देखते ही देखते वह सफेद धुंआ बनकर उड़ गई, सुरेश भरी आंखों से उसे जाता देखता रहा। समाप्त ©नृपेंद्र शर्मा'सागर' बिल्कुल="" ऐसा="" ही="" लग="" रहा="" था="" मुझे="" भी="" उस="" वक्त="" जब="" तू="" मेरे="" मुंह="" मे,,,="" परी="" गुस्से="" से="" चीखी,अब="" समझ="" आया="" तुझे="" की="" कैसा="" लगता="" होगा="" जब="" किसी="" की="" बिना="" मर्जी="" तुझ="" जैसे="" घिनोने="" लोग="" अपनी="" जबरदस्ती,="" और="" परी="" ने="" इशारा="" किया="" तो="" सारे="" बिच्छू="" एक="" साथ="" विकास="" के="" मुँह,="" आँख,="" कान="" और="" नाक="" में="" घुंस="" गए="" और="" थोड़ी="" ही="" देर="" में="" दम="" घुटने="" से="" उसकी="" मौत="" हो="" गई,="" परी="" ने="" घृणा="" से="" मुँह="" बिगाड़="" कर="" उसके="" मुंह="" पर="" थूक="" दिया।="" अब="" तो="" तेरा="" बदला="" पूरा="" हो="" गया="" चुड़ैल="" अब="" हमें="" छोड़="" दे,="" रोहन="" फिर="" गिड़गिड़ाया।="" नही!!ं="" अभी="" नहीं="" कहते="" हुए="" परी="" ने="" भरपूर="" ताकत="" से="" उसके="" सर="" को="" दबाया="" जिससे="" खूँटा="" पूरा="" उसके="" पेट="" में="" घुस="" गया="" और="" उसकी="" आँते="" फट="" कर="" बाहर="" आ="" गयीं,उसी="" के="" साथ="" बाहर="" आ="" गई="" उसकी="" आखिरी="" सांस="" भी।="" अब="" परी="" सुरेश="" की="" तरफ="" पलटी="" ,="" सुरेश="" चेहरे="" पर="" दर्द="" लिए="" हाथ="" जोड़े="" कातर="" नजरों="" से="" उसे="" ही="" देख="" रहा="" था।="" नहीं!!="" मुझे="" मत="" मारो="" ,मैने="" तो="" कई="" बार="" इनसे="" तुम्हे="" छोड़ने="" को="" कहा="" था="" लेकिन="" इन्होंने="" मेरी="" बात="" नहीं="" सुनी="" ।="" लेकिन="" इन्होंने="" तुम्हे="" जान="" से="" तो="" नहीं="" मारा="" था="" फिर="" तुम="" कैसे="" मरी?="" सुरेश="" ने="" पूछा।="" उस="" दुष्कर्म="" के="" बाद="" मैं="" क्या="" मुंह="" लेकर="" जीती??="" तो="" मैंने="" पुल="" से="" कूद="" कर="" अपनी="" उस="" घिनोनी="" जिंदगी="" का="" अंत="" कर="" दिया="" और="" फिर="" जब="" मुझे="" मुक्ति="" नहीं="" मिली="" तो="" मेरे="" मन="" में="" अपना="" बदला="" लेने="" की="" चाहत="" होने="" लगी="" और="" आज="" मेरा="" बदला="" पूरा="" हुआ="" आज="" खत्म="" हुआ="" मेरी="" जिंदगी="" का="" आखिरी="" साल,="" अब="" आएगा="" मेरी="" मुक्ति="" का="" नया="" साल,="" और="" देखते="" ही="" देखते="" वह="" सफेद="" धुंआ="" बनकर="" उड़="" गई,="" सुरेश="" भरी="" आंखों="" से="" उसे="" जाता="" देखता="" रहा।="" समाप्त="" ©नृपेंद्र="" शर्मा'सागर'="">



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x