लघुकथा-छह

04 जनवरी 2019   |   आई बी अरोड़ा   (27 बार पढ़ा जा चुका है)

‘बच्चे, उस बाड़ से दूर रहना, उसे छूना नहीं. उसमें बिजली चल रही है.’

‘लेकिन यह बाड़ यहाँ क्यों है? इसमें बिजली क्यों चल रही है.’

‘यह सब हमारी सुरक्षा के लिये है.’

‘हमारी सुरक्षा? किस से?’

वृद्ध एकदम कोई उत्तर ने दे पाए. कुछ सोच कर बोले, ‘बच्चे, यह बात तो मैं भी समझ नहीं पाया.’

‘वह हमें मूर्ख बना रहे हैं.’

‘शायद तुम सही कह रहे हो.’

तभी तीन आदमी आ पहुंचे. तीनों एक जैसे दिख रहे थे.

‘दादाजी, रोबोट आ गये!’

‘आपने कर देने में फिर देरी कर दी?’ एक आदमी बोला.

‘मुझे थोड़ा समय और चाहिये.’

‘आपका समय तो कब का समाप्त हो चुका है,’ दूसरे ने कहा.

तीसरे ने वृद्ध को उठा कर बाड़ की ओर धकेलना शुरू कर दिया.

अगला लेख: मृत्युदंड



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
सम्बंधित
लोकप्रिय
26 दिसम्बर 2018
22 दिसम्बर 2018
12 जनवरी 2019
28 दिसम्बर 2018
22 दिसम्बर 2018
मृ
17 जनवरी 2019
28 दिसम्बर 2018
21 दिसम्बर 2018
12 जनवरी 2019
26 दिसम्बर 2018
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x