सामाजिक एकता

10 जनवरी 2019   |  अमोल   (125 बार पढ़ा जा चुका है)

सामाजिक एकता  - शब्द (shabd.in)

2018 समाप्त हुवा । बदलाव , परिवर्तन निसर्ग का एक नियम है । आज विश्व काफी तीव्रगति से चल रहा है । और परिवर्तन की दौड़ मैं कई पीछे छुट रहे है तो कई काफी तेजीसे आगे भी बढ़ रहे है । समाज की एकता और प्रेम तभी आपसे में एक रूप हो सकते है जब हम इस बढ़ती तेज रफ़्तार में एक दूजे के सहायक बन एक दूजे को भी साथ लेकर चले । परिवर्तन और चढ़ा औड़ की दौड़ में अक्सर हम अकेले ही रहते है चाहे शीर्ष पर हो या अधोगति में । सामाजिक एकता को बल देना एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य विचार है । आप आप के स्वयं के साथ समाज की पहचान भी दर्शाते हो । तो इस आधार पर सामाजिक सहयोग की विचारधारा को भी हमे बढ़ावा देने की आवश्कता है । चिंतन और मनन से एक सशक्त समाज का हम निर्माण कर सकते है । *2019 को इस संकल्प के साथ लेकर चले 2020 में हम इसके सकारत्मक परिणाम की सुरवात मिलेगी और आगे की पीढ़ी के लिए हम एक संघटित समाज देकर आपने सामाजिक दायत्व का निर्वाह कर सकते है ।

जय सियाराम

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