टहलना स्वास्थ्य के लिए वरदान :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

11 जनवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (44 बार पढ़ा जा चुका है)

टहलना स्वास्थ्य के लिए वरदान :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*प्राचीन काल के मनुष्य आज की अपेक्षा स्वस्थ तंदरुस्त एवं लंबी आयु वाले होते थे | उनकी लंबी आयु का रहस्य था शारीरिक व्यायाम | शारीरिक श्रम के साथ-साथ उनके सभी कार्य प्राय: टहलते - टहलते हो जाया करते थे | आज की अपेक्षा पहले यात्रा करने के साधन तो नहीं थे परंतु वे पैदल यात्रा करके स्वयं को एवं स्वयं के शरीर की हड्डियों को मजबूत करते हुए निरोगी रहा करते थे | अपने वनवास काल में मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने सृंगबेरपुर से लंका तक की यात्रा पैदल ही की थी | यह सुनकर आज आश्चर्य तो होता है परंतु सत्य यही है | पैदल चलना मानव स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक है | इससे हमारे तन और मन सुरक्षा मिलती है | प्रात: एवं सांध्यबेला में नियमित टहलने वालों का शरार सक्रिय रहता है | पूर्वकाल के मनुष्यों का मन इसीलिए स्वस्थ रहता था क्योंकि उनका शरीर स्वस्थ रहता था | जब मनुष्य का शरीर व मन स्वस्थ रहता है तो मनुष्य बीमारियों का शिकार कम ही होता है | क्योंकि कभी - कभी शरीर तो स्वस्थ रहता है परंतु मन बीमार रहता है | हमारे पूर्वजों के कार्य प्राय: शारीरिक श्रम वाले होते थे इसीलिए वे स्वस्थ व दीर्घायु होते थे | निरोगी रहने व दीर्घायु प्राप्त करने के लिए चिकित्सक भी नियमित पैदल चलने व शारीरिक श्रम करने की सलाह देते रहते हैं | जो कि हमारे पूर्वज पहले से करते आये हैं |* *आज मनुष्य भाँति - भाँति की बीमारियों से चारों ओर से घिरा हुआ है | इसका कारण यह है कि आज मनुष्य का खान पान एवं शारीरिक श्रम बदल गया है | गाँव के खेत जहाँ लोग दिन में मेहनत करके स्वयं को स्वस्थ रखते थे दुर्भाग्यवश वे लगभग समाप्ति की कगार पर हैं | मनुष्य को मजबूत एवं स्वस्थ बनाये रखने में सहायक की भूमिका निभाने वाले ग्रामीण खेल कुश्ती , खो खो व कबड्डी भी लगभग समाप्त ही हो गये हैं | आज इण्टरनेट के युग में युवावर्ग इन खेलों की अपेक्षा मोबाईल एवं कम्प्यूटर में ही सब कुछ पा लेना चाहता है | यह सत्य है कि मोबाईल और कम्प्यूटर पर आज सब कुछ प्राप्त कर सकता है परंतु शारीरिक स्वास्थ्य को मजबूत नहीं कर सकता बल्कि मानसिक बीमारी अवश्य मोल ले रहा है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज के परिदृश्य को देख रहा हूँ जहाँ लोग पैदस चलने में अपना अपमान समझने लगे हैं | दस कदम यदि बाजार जाना है तो हमारा युवावर्ग बिना बाईक या साईकिल के नहीं जाना चाहता है | इतना सब करने के बाद भी आज का मनुष्य पूंछता है कि पूर्वकाल के मनुष्य भला निरोगी रहते हुए लम्बा जीवन कैसे जी लेते थे | मैं इतना ही कहना चाहूँगा कि यदि इस रहस्य को जानना है तो आपको इंटरनेट के साथ हमारे सनातन ग्रंथों का भी अध्ययन करना होगा | आज की पीढ़ी सुविधाओं में आलसी होती जा रही है जिसका परिणाम हमें तरह तरह की बीमारियों के रूप में प्राप्त हो रहा है |* *यदि आज की पीढ़ी शारीरिक श्रम करने में अपना अपमान समझती है तो उसे कम से कम सुबह - शाम कुछ दूर पैदल ही चल लेना चाहिए , जिससे कि उनका शरीर स्वस्थ रहे |*

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