वचन ,विचार एवं व्यवहार :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

13 जनवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (53 बार पढ़ा जा चुका है)

वचन ,विचार एवं व्यवहार :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धरती पर इतने प्राणी है कि उनकी गिनती कर पाना संभव नहीं है | इन प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ प्राणी मनुष्य माना जाता है | मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी इसलिए माना जाता है क्योंकि उसमें जो विशेषतायें हैं वह अन्य प्राणियों में नहीं पायी जाती हैं | वैसे तो ईश्वर ने मनुष्य में विशेषताओं का भण्डार भर दिया है , परंतु इनमें भी तीन मुख्य विशेषतायें मनुष्य को सर्वप्रिय बनाते हुए समाज में स्थापित करती हैं | मनुष्य की तीन मुख्य विशेषतायें हैं :- विचार , वचन एवं व्यवहार | विचार करने की जो क्षमता मनुष्य मनुष्य में है वह किसी दूसरे प्राणी में नहीं है | वचन की जो शक्ति मनुष्य को ईश्वर ने दी है वह किसी भी प्राणी में देखने को नहीं मिलतीं | व्यवहार करने का जो गुण मनुष्य में है वह शायद ही किसी प्राणी में हो | ये तीन विशेषतायें ही मनुष्य को सभी प्राणियों में सर्वश्रेष्ठ बनाता है | विचार (चिंतन) मनुष्य की विशेष विशेषता है जिसके बल पर मनुष्य ने बहुत विकास किये है और करता चला जा रहा है | संसार की आधुनिकता एवं इसका बदला हुआ मनुष्य के चिंतन का ही परिणाम है | वचन में इतनी शक्ति है कि मनुष्य अपनी वाचनशक्ति से आज राज्य कर रहा है , वहीं मनुष्य का व्यवहार ही मनुष्य को मनुष्य बनाता है | अपने इन तीनों विशेष गुणों का सकारात्मक प्रयोग करके मनुष्य सर्वश्रेष्ठ बनकर स्थापित हुआ |* *आज हम वैदिकयुग से वैज्ञानिक युग में जीवन यापन कर रहे हैं | आज संसार में विकास तो नित्य हो रहा है परंतु उतना ही विनाश भी हो रहा है | चारों ओर त्राहि - त्राहि मची हुई है , एक अन्जाना भय चहुँओर व्याप्त है ! इसका कारण यह है कि आज मनुष्य नकारात्मकता का शिरार हो रहा है | आज यदि चारों ओर भय व्याप्त है तो उसका मुख्य कारण भी मनुष्य यही तीनों विशेष गुण :- वचन , विचार एवं व्यवहार ही हैं जो कि नकारात्मक हो गये हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज यदि देश व समाज की बात करने के पहले समाज की प्रथम ईकाई परिवार की बात करूँ तो वहाँ भी विघटन के मुख्य कारक मनुष्य के यही तीनों गुण ही दिखाई पड़ते हैं | मनुष्य अपने वचन , विचार एवं व्यवहार पर अंकुश नहीं लगा पा रहा है जिसके कारण परिवार विखण्डित हो रहे हैं | मनुष्य को किसी समाज कब क्या बोलना चाहिए इसका विचार करके ही मनुष्य सकारात्मक व्यवहार करे तो शायद यह स्थिति न बने | परंतु मनुष्य का सबसे बड़ा दोष यह है कि वह आज स्वयं को सबसे बड़ा बुद्धिमान एवं शेष सभी को मूर्ख समझने लगा है | प्राचीनकाल में गुरुकुल में शिष्यों को परिमार्जित करके इन गुणों से ओतप्रोत किया जाता था , परंतु आज की शिक्षाव्यवस्था में यह व्यवस्था ही समाप्त हो गयी है जिसका परिणाम है आज का समाज एवं सामाजिकता |* *आज मनुष्य वचन , विचार एवं व्यवहार की गम्भीरता का त्याग करता चला जा रहा है ! यही कारण है कि छोटी - छोटी बात पर रिश्तों में दरार आ रही है | इस पर विचार करना होगा |*

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