"9:45 की लोकल"

17 जनवरी 2019   |  इन्दर भोले नाथ   (38 बार पढ़ा जा चुका है)


ऑटो स्टैंड से दौड़ता हुआ , मैं जैसे ही रेलवे स्टेशन पहुँचा, पता चला 9:45 की लोकल जा चुकी है !
मेरे घर से तकरीबन 9 .कि.मि. दूर पर है रेलवे स्टेशन, छोटा सा स्टेशन है,लोकल ट्रेन के अलावा 1-2 एक्शप्रेस ट्रेन की भी स्टोपीज़ है, मैं स्टेशन मास्टर के पास गया और पूछा सर बनारस के लिए कोई ट्रेन है ! स्टेशन मास्टर ने बताया दोपहेर 2:45 पर 1 एक्सप्रेस है, वो भी 1 घंटा देर से है ! 10 बजने वाला था, तकरीबन 6 घंटे मुझे ट्रेन के लिए इंतेजारकरना पड़ेगा ! रेलवे स्टेशन से तकरीबन 100 मीटर की दूरी पर है, बस स्टैंड मैने सोचा चलो देखते है शायद कोई बस मिल जाए बनारस के लिए ! वहाँ जाकर पता चला के बनारस के लिए सुबह 8 बजे और शाम 5 बजे ही बस मिलती है! वापस रेलवे स्टेशन आकर मैं एक पेड़ के नीचे चबूतरा सा बना हुआ था, जहाँ 3 बुजुर्ग जो वहीं आस-पास के रहने वालेथे! बैठे बाते कर रहे थे, मैं भी उन्ही के बगल मे जाकर बैठ गया,
अभी 15-20 मिंन्ट ही गुज़रे होंगे, तभी 1 औरत जिनकी उम्र तकरीबन 50-55 साल की होगी, उन्होने मुझे हाथ से इशारा कर के बुलाया, मैने सोचा किसी और को बुला रही हैं, मैने ध्यान नही दिया, दुबारा फिर उन्होने बोला "बेटा ज़रा यहाँ आना" मैने सोचा यहाँ मेरी उम्र का कोई और तो दिख नही रहा, शायद मुझे ही बुला रही है, पर मैं तो इन्हे पहचानतानही ? हो सकता है ये मुझे पहचानती हो, ये सोचकर मैं उनके पास गया,
माफ़ कीजिएगा मैने आपको पहचाना नही क्या आप मुझे पहचानती है, मैने पास जाकर ये पूछा उन्होने कहा बेटा मैं (*******) गाव की रहने वाली हू, मेरे दो बेटे हैं बड़े बेटे की शादी हो गयी है उसके दो लड़के 1 लड़का 1 लड़की है, दिली मे अपने बीबी और बचों के साथ रहता है, दूसरा बेटा तुम्हारी ही उम्र का है, 3-4 दिन हुए वो भी भाई के पास दिल्ली गयाहुआ है, मुझे झुंझलाहट सा महसूस हुआ मैने कहा माजी आपने मुझे ये सब बताने के लिए यहाँ बुलाया, नही बेटा वो मैं अपने पत्ती के लिए दवा लेने आई थी उनकी दवा यही से चलता है, दवा लेके मैं ऑटो से बस स्टैंड रही थी,! मेरे पास 1 थैला था जिसमे कुछ समान थे, ऑटो वाले को किराया देकर मैने पैसे वाला बेग उस थैले मे रख दिया, जब मैं ऑटो से उतरी वो थैला ऑटो मे ही छूट गया,! जब मैं बस स्टैंड आई फिर मुझे ध्यान आया, वापस जाके देखा ऑटो वाला वहाँ नही था ! बेटा मेरा घर यहाँ से तकरीबन 25 किमी दूर है, मेरे पास पैसे नही हैं 35 रुपया बस का किराया लगता है, बेटे अगर तुम्हारे पास पैसे हो तो मुझे 35 रुपया दे दो ! जिस डॉकटर के यहाँ से दवा चलता है वहाँ जाने के लिए भी मेरे पास पैसे नही है,
पहले मुझे लगा झूठ बोल रही है, फिर सोचा कपड़े तो अच्छे पहने है, और देखने मे भी सीधी- साधी और सभ्य औरत मालूम हो रही थी, एक हाथ मे पोलिथीन का बेग था जिसमे टैब्लेट्स और कुछ कैप्सूल्स दिख रहे थे! मैने पर्स से 50 रुपया निकाला और उनकी तरफ बढ़ाया, उन्होने कहा बेटा मुझे सिर्फ़ 35 रुपया दे दो, मैने कहा माजी रख लो मेरे पास खुले नही है, पैसे लेते हुए बोली बेटा सुखी रहो भगवान तुम्हारी हर इच्छा पूरी करे, फिर उन्होने ने अपने घर का पता बताया और बोली बेटे कभी उधर आओगे तो मुझसे ज़रूर मिलना, मैने कहा ठीक है माजी, फिर वो बस स्टैंड की ओर जाने लगी,
फिर मेरे दिमाग़ मे ग़लत ख्याल आया मैने उसका पीछा किया, के कहीं झूठ तो नही बोल रही, फिर मैने देखा वो बस स्टैंड की तरफ गयी और एक बस मे चढ़ गयी, मुझे अपने आप पे बड़ा गुस्सा आया, फालतू मे मैने शक किया ! फिर मैं वापस स्टेशन मे आया और ट्रेन का इंतेजार करने लगा, 3 बज़कर 50 मिंट पर ट्रेन आई, टिकेट तो मैने पहले ही ले रखा था, रात को 9 बजे मैं बनारस पहुच गया, पूरी रात स्टेशन पर ही रहा, सुबह 9:30 बजे था, मेरे इंटरव्यू का टाइम मैं 9 बजे ही पहुच गया, मुझे नौकरी मिल गयी ! मैने अपना resume naukari.com पे डाल रखा था, वही से इंटरव्यू के लिए कॉल आया था !
2 साल बाद मेरे एक दोस्त की शादी थी, जो मेरे साथ ही काम करता था, बस से उतरने के बाद ऑटो द्वारा मैं दोस्त के घर की तरफ जा रहा था, तभी उसी ऑटो मे जिसमे मैं बैठा था, दो औरत चड़ी, एक की उम्र तकरीबन 50-55 के करीब होगा, और दूसरी 20-25 साल की होगी, उसकी गोद मे एक बचा भी था, जो 2-3 महीने का होगा, ऑटो चलने लगीवो बूढ़ी औरत बड़े ध्यान से मुझे देख रही थी, जब मैं उसकी तरफ देखा तो जैसे वो मुझे जानती हो वैसे मुझे देखकर हसने लगी, मुझे अजीब सा लगा, मैने ध्यान नही दिया, फिर देखा वो मेरी तरफ ही देख रही थी, मैं पूछने ही वाला था, के क्या आप मुझे जानती है, तभी उसने कहा बेटा तुम वही हो ना जिसने मुझे 50 रुपये दिए थे, जब मेरा पैसे वाला थैला,ऑटो मे छूट गया था, जैसे ही उन्होने ये बात कही मुझे याद आ गया, फिर मैने कहा वो आप ही है, उन्होने कहा हाँ बेटा वो मैं ही हू, ये मेरी बहू है दूसरे लड़के की पत्नी, मैने कहा वही जो दिल्ली नौकरी के लिए गया था बोली हाँ उसी की पत्नी है, और ये उसका बेटा है, इसी को लेकर डॉक्टर के पास गयी थी, हल्का सा बुखार है ! बहुत सारी बातें हुई, मेरे बारेपूछा क्या करते हो मैने बताया अपने बारे मे के 2 साल से नौकरी कर रहा हू, बनारस मे ! जिस दिन आप मुझे स्टेशन पे मिली थी न उस दिन मैं बनारस ही जा रहा था, इंटरव्यू के लिए ! बस गया और आपकी कृपा से नौकरी लग गयी, वहीं 2 साल से नौकरी कर रहा हू! फिर उन्होने अपने घर चलने को बहुत जिद्द किया,! मैने कहा माजी मेरे दोस्त की शादीहै, उसी के घर जा रहा हू, जो (******) गाव मे पड़ता है, उन्होने बताया जिस गाव मे जा रहे हो, वहाँ से हमारा गाव 4 किमी दूर है, कल शादी बीत जाए, परसों हमारे घर ज़रूर आना बेटे ! मैने कहा ठीक है माजी, मेरा स्टेशन आने वाला है , मैंने कहा ठीक है माजी मैं चलता हू, उन्होने अपने बैग से 500 रुपये का निकाला और मेरे पॉकेट मे डालने लगी! मैनेबहुत मना किया, पर वो नही मानी, बोली रख लो बेटा तुम मेरे बेटे जैसे हो और मेरे पॉकेट पैसा डाल दिया! मै वो पैसा पॉकेट से निकाल कर बचे के हाथ मे रखने लगा, उनके माना करने पर मैने कहा जब मैं आपके बेटे जैसा हू तो आपका बेटा मेरे भाई जैसा हुआ, और उसका बेटा मेरा भतीजा हुआ, इसलिए ये पैसा मैं अपने भतीजे को दे रहा हू ! ये कह करपैसा मैने बचे के हाथ मे थमा दिया ! उन्होने कहा ठीक है, लेकिन परसों तुम हमारे यहाँ ज़रूर आना बेटा, हम तुम्हारा इंतेजार करेंगे, और अपने बहू को बोली की बहू अपना मोबाइल नम्बर दे दो इनको, मोबाइल नंबर मैने लिख लिया, फिर मैं ऑटो से उतर गया,
दोस्त के घर पहुँच गया! अगले दिन शादी बीत जाने पर ! मैं और मेरा दोस्त उस गाव मे गये, पता पूछते हुए पहुँच गये, आगे बड़ा सा दालान था, उस दालान से ही सट्टे पीछे की तरफ तकरीबन 10-12 घर थे ! चारो तरफ से बाउंड्री दिया हुआ था, बड़ा सा लोहे का गेट लगा हुआ था, गेट खुला था ! हम अंदर चले गये, बाइक खड़ा कर के दालान मे गये, साइडके एक कमरे मे तकरीबन 60-65 साल के एक बुजुर्ग बैठे थे ! हमे देख के वो कमरे से बाहर आए, और हमे बैठने का इशारा किया, दालान मे 7-8 कुर्सिया रखी हुई थी, हम बैठ गये ! फिर वो घर की तरफ आवाज़ लगते हुआ बोलें "मनोज" (शायद उनके बेटे का नाम हो) दो लोग आए है, मीठा और पानी लाना ! अंदर से एक लड़का आया जो मेरे ही उम्र काथा, आया हमे देख कर फिर अंदर चला गया ! थोड़ी देर बाद एक प्लेट मे 4 लड्डू,एक जग मे पानी और 2 गिलास लेकर बाहर आया, लड्डू हमारे पास रख के गिलास मे पानी डालते हुए बोला पानी पीजिए ! हम पानी पीने लगे, फिर वो अंदर की तरफ आवाज़ लगाते हुए बोला माँ चाय बनाना !
हमारे पानी पीने के बाद हमसे पूछा कहाँ से आए हैं, आप लोग और किससे मिलना है ! मैने कहा जी मेरा नाम "इंदर" है, वो माजी से मिलना था ! इंदर ? कहीं आप आप वो तो नही जो रेलवे स्टेशन पर मेरी माँ से.....! मैने कहा जी मैं वही हू, फिर क्या था, इतना सुनना था के उसने मुझे गले लगा लिया, बोला बहुत-बहुत धन्याबाद भाई साहब, और फिरभागता हुआ अंदर की तरफ गया !
अंदर की तरफ से वो ही औरत आईं, नमस्ते माजी" खुश रहो बेटे आओ अंदर आओ,और हमे अंदर ले गयी, बहू फटाफट दो खाना लगाना, हमने माना किया, माजी हम खाना खा के आए है, पर वो हमारी एक सुनी, खाना लग गया, खाना खाने के बाद 2 घंटे तक हम बाते करते रहे, जिस तरह से वो पूरा परिवार हमारे साथ बर्ताव कर रहे थे, लग रहा थाजैसे मैने उन पर बहुत बड़ा एहसान किया हो, उस दिन मुझे अपने आप पर बड़ा गर्व महसूस हो रहा था ! और साथ ही उस दिन मुझे एक बात का एहसास हुआ, के चाहे इंसान कितना ही पैसे वाला क्यों ना हो पर "मजबूरी हर इंसान को मजबूर कर देती है" ! तभी तो वो औरत मुझसे मात्र 35 रुपये माँगने पर बिवस हो गई थी, जिसके घर और खेतों मे 100रूपये रोजाना काम करने वाले जाने कितने मजदूर काम कर रहे थें !
हमारे बहुत कहने बाद उन्ह लोगों ने हमे जाने की इजाज़त दी, मनोज गाव के बाहर तक हमे छोड़ने आया, मेरा मोबाइल नंबर लेते हुए बोला भाई साहब कभी भी कोई काम हो, या किसी चीज़ की ज़रूरत पड़े बस हमे एक कॉल कर देना, हमे बहुत खुशी होगी, के हम आपके कुछ काम सकें ! अपना नंबर भी हमे दिया,
फिर वहाँ से हम चल दिए, उस दिन दोस्त के घर ठहरा, अगले दिन अपने घर गया !
ख़त्म”

दोस्तो कभी भी कोई मजबूर और लाचार इंसान आप से मदद माँगे, तो आप उसकी मदद ज़रूर करना ! क्या पता वो इंसान सच मे मजबूर हो और इतने लोगों के बीच सिर्फ़ आपके पास आस लगा के आया हो आप से मदद माँगने ! कभी भी किसी ऐसे मजबूर इंसान को नज़र अंदाज़ नही करना,


Writer : इंदर”

Acct- (IBN_

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