ना तेरा रहा ना मेरा रहा

17 जनवरी 2019   |  मंजू गीत   (56 बार पढ़ा जा चुका है)

ना तेरा रहा ना मेरा रहा। प्रेम में हिसाब-किताब रखने का ना बहिखाता तेरा रहा, ना मेरा रहा। दौर जिंदगानी का बितता रहा, ना ईष्र्या रही ना द्वेष रहा। अपनेपन का अहसास कुछ तुझमें बाकी रहा, कुछ मुझमें बाकी रहा। चंद सांसें एक दूजे में उलझ जाये, रिश्ता ये उल्फत का सितम बन कर जहने सहर से टकराता रहा। थाम ले जो डोर जमीं की गहराई से,आसमां की ऊंचाई तक, ना वो डोर तेरी रही, ना वो शोर मुझमें रहा। बहुत धीरे धीरे से छुआ, बस वो नज़रों से नज़रों में भरने का अहसास बाकी रहा, जो ख्वाबों की बगिया में कहानी कहता रहा। ना तेरा रहा, ना मेरा रहा।

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murari metha
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