वो बूढ़ी औरत…..

18 जनवरी 2019   |  इन्दर भोले नाथ   (85 बार पढ़ा जा चुका है)

रोज सुबह ड्यूटी पे जाना रोज शाम लौट के रूम पे आना,ये रूटीन सा बन गया था, मोहन के लिये ! हालाँकि रूम से फैक्ट्री ज़्यादा दूर नहीं था, तकरीबन१०-१५ मिनट का रास्ता है ! मोहन उत्तर प्रदेश का रहने वाला है,करीब २ सालों से यहाँ (नोएडा) मे एक प्राइवेट फैक्ट्री मे काम कर रहा है ! रोज सुबह ड्यूटी पे जाना,शाम को लौट के कमरे पे आना ऐसे ही चल रहा था !

एक शाम जब मोहन ड्यूटी से ऑफ हो के जैसे ही फैक्ट्री से निकला कमरे पे जाने को,देखा बाहर तो जोरों की बारिश लगी हुई है ! १०-१५ मिनट इंतेजार करने के बावजूद भी जब बारिश न रुकी,तो मोहन दौड़ता हुआ कमरे पे जाने लगा ! तभी उसकी नज़र सड़क के किनारे एक छोटी सी पान की दुकान पे पड़ी,दुकान बंद हो चुकी थी ! और उसी दुकान से चिपक के एक बूढ़ी औरत बारिश से बचने के लिये खड़ी थी ! फिर भी वो भीग रही थी, और ठंड से कांप रही थी,क्योंकि बारिश के साथ-साथ ठंडी हवा भी चल रही थी ! न जाने मोहन के दिमाग़ मे क्या ख्याल आया,वो रुका और उस दुकान की तरफ बढ़ने लगा ! मोहन ने उस औरत से पूछा….माँ जी कौन हो आप..? और इतनी बारिश मे यहाँ क्या कर रही हो ..?

उस बूढ़ी औरत ने कहा…..बेटा,मेरा बेटा और मेरी बहू यहीं रहते हैं,इसी शहर मे, शादी के बाद जब से बहू को लेके यहाँ आया तब से न ही गाँव मे हम से मिलने आया न ही कोई खबर दी ! एकलौता बेटा है मेरा वो, दिल कर रहा था उसे देखने को इसलिए मैं खुद को रोक नहीं पाई और उससे मिलने चली आई ! जब उसकी शादी नहीं हुई थी, तब मैं अपने बेटे के साथ एक बार पहले भी आई थी यहाँ ! वही लेकर आया था मुझे, कहता था माँ खाना बनाने मे दिक्कत होती है,चल तूँ मेरे साथ ही रहना !
फ़ोन भी की थी मैने उसको, कि बेटा मैं आ रही हूँ वहाँ तुम्हारे पास ! जब मैं वहाँ पहुँची जहाँ वो रहता है, तो देखा कमरे मे ताला लगा हुआ है ! लोगों से पूछने पर पता चला कि वो बहू को लेकर उसके मायके गया है,बहूकी माँ की तबीयत खराब है उसे ही देखने गया है ! और बेटा…. जब अपना बेटा ही अपने कमरे मे ताला लगा गया है,तो फिर ये अंजान लोग क्या पनाह देंगे मुझे…..!
इतना सुनते ही मोहन के मुँह से अनायास ही निकल पड़ा…..कैसा बेटा है अपनी माँ को इस हालत मे छोड़ सास को देखने गया है ! फिर मोहन उस बूढ़ी औरत से बोला…माँजी पास मे ही मेरा कमरा है, चलो आप वहीं रह लेना जब तक आप के बेटे और बहू नहीं आ जाते !
……………………………………………………….ख़त्म………………………………………………………………….
लेखक- इंदर भोले नाथ…
…..(१५/०३/२०१६)

अगला लेख: “अब भी आता है”



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
18 जनवरी 2019
आँखों को जो उसका दीदार हो जाएमेरा सफ़र भी मुकम्मल यार हो जाएमैं भी हज़ारों ग़ज़ल लिखता उसपेकाश..हमें भी किसी से प्यार हो जाए==========================……......इंदर भोले नाथ…...……...
18 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
है महका हुआ गुलाब खिला हुआ कंवल है,हर दिल मे है उमंगेहर लब पे ग़ज़ल है,ठंडी-शीतल बहे ब्यार मौसम गया बदल है,हर डाल ओढ़ा नई चादर हर कली गई मचल है,प्रकृति भी हर्षित हुआ जो हुआ बसंत का आगमन है,चूजों ने भरी उड़ान जो गये पर नये निकल है,है हर गाँव
18 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
खे
गंगा नदी के तट से कुछ दूर पे एक छोटा सा गाँव (चांदपुर) बसा है ! जो उत्तर प्रदेश के बलिया जिले मे स्थिति है,उस गाँव मे (स्वामी खपड़िया बाबा ) नाम का एक आश्रम है, जहाँ बहुत से साधु-महात्मा रहते हैं !उन दिनों गर्मियों का मौसम था, एक महात्मा आए हुए थें ! जिनका नाम स्वामी हरिह
18 जनवरी 2019
11 जनवरी 2019
जि
हर तरफ है, मचा कोहराम,है बिखरा, टुकड़ों मे आवाम,है कहीं,नेताओं की मनमानी,सत्ता को समझे पुस्तानी…जिसे चुना, खुद को बचाने को,है वो तैयार, हमें मिटाने को…लड़ता रहा,जो सत्य के लिए,उसका कोई ज़िक्र नहीं…खुदा ढूंढते
11 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
उन गुज़रे हुए पलों से,इक लम्हा तो चुरा लूँ…इन खामोश निगाहों मे,कुछ सपने तो सज़ा लूँ…अरसा गुजर गये हैं,लबों को मुस्काराए हुए…सालों बीत गये “.ज़िंदगी”,तेरा दीदार किये हुए…खो गया है जो बचपन,उसे पास तो बुला लूँ…उन गुज़रे हुए पलों से,इक लम्हा तो चुरा लूँ…जी रहे हैं,हम मगर,जिंदगी
18 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
पर अब है,इतना वक़्त कहाँ...फिर लौट चलूं मैं,”बचपन” मे,पर अब है,इतना वक़्त कहाँ…खेलूँ फिर से,उस “आँगन” मे,पर अब है,इतना वक़्त कहाँ…क्या दिन थें वो,ख्वाबों जैसे,क्या ठाट थें वो,नवाबों जैसे…फिर लौट चलूं,उस “भोलेपन” मे,पर अब है,इतना वक़्त कहाँ…
18 जनवरी 2019
17 जनवरी 2019
"
ऑटो स्टैंड से दौड़ता हुआ , मैं जैसे ही रेलवे स्टेशन पहुँचा, पता चला 9:45 की लोकल जा चुकी है !मेरे घर से तकरीबन 9 .कि.मि. दूर पर है रेलवे स्टेशन, छोटा सा स्टेशन है,लोकल ट्रेन के अलावा 1-2 एक्शप्रेस ट्रेन की भी स्टोपीज़ है, मैं स्टेशन मास्टर के पास गया और पूछा सर बनारस के लिए कोई ट्रेन है ! स्टेशन मास
17 जनवरी 2019
05 जनवरी 2019
बहुत सारे लोगों का मानना ​​है कि जीवन का मात्र एक ही उद्देश्य है और वो है खुश रहना। क्योंकि सभी लोग दर्द और कठिनाई से गुजरते हैं और सोचते हैं किसी भी तरह से खुशी हासिल करना है। वास्तव में, यदि आप अपने चारों ओर देखते हैं, तो पाते हैं कि अधिकांश लोग अपने जीवन में खुशियों का
05 जनवरी 2019
17 जनवरी 2019
हे
हे कान्हा...अश्रु तरस रहें, निस दिन आँखों से बरस रहें,कब से आस लगाए बैठे हैं, एक दरश दिखाने आ जाते...बरसों से प्यासी नैनों की, प्यास बुझाने आ जाते...बृंदावन की गलियों मे, फिर रास रचाने आ जाते...राधा को दिल मे रख कर के, गोपियों संग रास रचा जाते...कहे दुखियारी मीरा तोह से,
17 जनवरी 2019
08 जनवरी 2019
जी
" नववर्ष मंगलमय हो " " हमारा देश और समज नशामुक्त हो " नशा जो सुरसा बन हमारी युवा पीढ़ी को निगले जा रहा है ,
08 जनवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x