बरसों बाद लौटें हम...

18 जनवरी 2019   |  इन्दर भोले नाथ   (28 बार पढ़ा जा चुका है)


बरसों बाद लौटें हम,
जब उस,खंडहर से बिराने मे…
जहाँ मीली थी बेसुमार,
खुशियाँ,हमें किसी जमाने मे…
कभी रौनके छाई थी जहाँ,
आज वो बदल सा गया है…
जो कभी खिला-खिला सा था,
आज वो ढल सा गया है…
लगे बरसों से किसी के,
आने का उसे इंतेजार हो…
न जाने कब से वो किसी,
से मिलने को बेकरार हो…
अकेला सा पड़ गया हो,
वो किसी के जाने से…
लगे सिने मे उसके गम,
कोई गहरा हुआ सा हो..
वो गुज़रा हुआ सा वक़्त,
वहीं ठहर हुआ सा हो…
घंटों देखता रहा वो हमें,
अपनी आतुर निगाहों से…
कई दर्द उभर रहे थें,
उसकी हर एक आहों से…
कुछ भी न बोला वो बस,
मुझे देखता ही रहा गया…
उसकी खामोशियों ने जैसे,
हमसे सब कुछ हो कह दिया…
क्या हाल सुनाउँ मैं तुमसे,
अपने दर्द के आलम का…
बिछड़ के तूँ भी तो,
हमसे तन्हा ही रहा…
बरसों बाद मिले थें हम,
मिलके,दोनो ही रोते चले गये…
निकला हर एक आँसू,
ज़ख़्मों को धोते चले गये…
घंटों लिपटे रहें हम यूँही,
एक-दूसरे के आगोश मे…
जैसे बरसों बाद मिला हो,
बिछड़ के कोई “दोस्ताना”…
मैं और मेरे गुज़रे हुए,
मासूम सा “बचपन” का वो ठिकाना…
Acct- इंदर भोले नाथ…
२८/०१/२०१६

अगला लेख: हे कान्हा....



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
18 जनवरी 2019
कुछ तो बहेका होगा,रब भी तुझे बनाने मे…सौ मरतबा टूटा होगा,ख्वाहिशों को दबाने मे…!!आँखों मे है नशीलापन,लगे प्याले-ज़ाम हो जैसे…गालों पे है रंगत छाई,जुल्फ घनेरी शाम हो जैसे…सूरज से मिली हो लाली,शायद,लबों को सजाने मे…कुछ तो बहेका होगा,रब भी तुझे बनाने मे…!!मलिका हुस्न की हो या,हो कोई अप्सरा तुम…जो भी हो
18 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
गुजरें जो गली से उसके,वो-दीदार याद आया पलते नफ़रतों के दरमियाँ,वो-प्यार याद आया आँखों से मिलने का वो इशारा करना उसका फिर करना तन्हा मेरा,वो इंतेजार याद आया शिकवे लिये लबों पे,बेचैन वो होना मेरा फिर चुपके से लिपट के उसका,वो इज़हार याद आया मिल के उससे दिल का,वो फूल सा खिल जा
18 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
बिखरे हुए ल्फ्ज़,अल्फाज़ों मे निखर गयें,निखरे मेरे-अल्फ़ाज़,जब हम बिखर गयें…——————————————————–Acct-इंदर भोले नाथ…08/02/2016
18 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
ज़रा टूटा हुआ है,मगर बिखरा नहीं है ये,वफ़ा निभाने का हुनर इस दिल को अब भी आता है…तूँ भूल जाए हमे ये मुमकिन है लेकिन,हर शाम मेरे लब पे तेरा ज़िक्र अब भी आता है…हज़ारों फूल सजे होंगे महफ़िल मे तेरे लेकिन,मेरे किताबों मे सूखे उस गुलाब से खुश्बू
18 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
है महका हुआ गुलाब खिला हुआ कंवल है,हर दिल मे है उमंगेहर लब पे ग़ज़ल है,ठंडी-शीतल बहे ब्यार मौसम गया बदल है,हर डाल ओढ़ा नई चादर हर कली गई मचल है,प्रकृति भी हर्षित हुआ जो हुआ बसंत का आगमन है,चूजों ने भरी उड़ान जो गये पर नये निकल है,है हर गाँव
18 जनवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x