72 घंटे तक चीनी सैनिकों पर अकेले भारी पड़े थे जसवंत सिंह, आज भी इनके नाम से कांपते हैं दुश्मन

21 जनवरी 2019   |  अभय शंकर   (98 बार पढ़ा जा चुका है)

72 घंटे तक चीनी सैनिकों पर अकेले भारी पड़े थे जसवंत सिंह, आज भी इनके नाम से कांपते हैं दुश्मन

फिल्मी दुनिया अब तक देशभक्ति पर कई फिल्में बन चुकी हैं, जिसमें हाल ही में उरी बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा रही है। देशभक्ति पर आधारित फिल्म उरी दर्शकों के बीच खूब पसंद हो रही है। उरी का जोश अभी लोगों के बीच खत्म नहीं हुआ कि एक और देशभक्त पर आधारित फिल्म रिलीज हो चुकी है। जी हां, राइफलमैन जसवंत पर आधरित फिल्म पर्दे पर आ चुकी है। तो चलिए जानते हैं कि हमारे इस लेख में आपके लिए क्या खास है?

राइफलमैन जसवंत सिंह का नाम तो सभी ने सुना ही होगा? यदि आपने नहीं सुना है तो आपको इन पर बनी फिल्म को ज़रूर देखना चाहिए। इस फिल्म को देखने के बाद हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। और मालूम चलेगा कि 1962 में चीन हम पर भारी नहीं पड़ा था, बल्कि हम तो हालात की वजह से बौने हो गये थे। जी हां, यह फिल्म 1962 के कई बड़े राज खोल रही, जिससे भारतीयों का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा। बता दें कि यह फिल्म सेना के जवान जसवंत सिंह पर आधारित है, जोकि 1962 में शहीद हो गये थे।

300 चीनी सैनिको पर अकेले भारी पड़े थे जसवंत सिंह


21 साल की उम्र में जसवंत सिंह रावत 72 घंटो तक अकेले चीन के 300 सैनिक से अकेले लड़े थे। भूखे प्यासे रहते हुए भी इन्होंने आखिरी सांस तक चीनी सैनिको से लड़ते रहे और आखिरी में ये शहीद हो गये। जसवंत सिंह के त्याग बलिदान और देशप्रेम को आज भी कोई भूला नहीं पाया है। ऐसे में शौर्य, देशप्रेम और बलिदान से भरी यह हैरतअंगेज कहानी पहली बार सिनेमा के पर्दे पर देखने को मिल रही है, जोकि हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा कर देगी।

बता दें कि पर्दे पर यह फिल्म काफी धमाल मचा रही है। इस फिल्म का नाम ’72 ऑवर्स : मार्टियर हू नेवर डाइड’ है। इस फिल्म में चौथी गढ़वाल राइफल के राइफलमैन जसवंत सिंह रावत की नूरांग में लड़ी वीरता की कहानी को दर्शाया गया है, जोकि हर किसी को देखना चाहिए। आज भी राइफमैन जसवंत सिंह रावत के नाम से चीन में दशहत होती है।

’72 ऑवर्स : मार्टियर हू नेवर डाइड’ के डायरेक्टर ने कही ये बात


फिल्म रिलीज होने के बाद ’72 ऑवर्स : मार्टियर हू नेवर डाइड’ के डायरेक्टर अविनाश ने कहा कि जब मैंने इसकी कहानी लिखी तो मैंने शहीद जसवंत सिंह की आत्मा अपने आसपास महसूस की। मुझे काफी गर्व हुआ इनकी लिखने में। अविनाश ने आगे कहा कि मेरे पिता भी सैनिक थे और बचपन में अक्सर पिता से मैं राइफलमैन जसवंत की वीरता के किस्से सुना करता था, जिससे मैं उन्हें आज पर्दे पर ले आया।

लोगों के दिलों में आज भी जिंदा है जसवंत सिंह


भूखे प्यासे 300 दुश्मनों से अकेले मुकाबला करने वाले जसवंत सिंह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। जी हां, अरुणाचल प्रदेश के तवांग में बाबा जसवंत सिंह नाम से मंदिर बना हुआ है और उनके नाम पर एक स्थानीय क्षेत्र का नाम जसवंतगढ़ पड़ गया। ऐसे में स्थानीय लोग आज भी मानते हैं कि बाबा जसवंत सिंह72 घंटे तक 300 चीनी सैनिकों पर अकेले भारी पड़े थे जसवंत सिंह, आज भी बार्डर की करते हैं हिफाजत 72 घंटे तक 300 चीनी सैनिकों पर अकेले भारी पड़े थे जसवंत सिंह, आज भी बार्डर की करते हैं हिफाजत 72 घंटे तक 300 चीनी सैनिकों पर अकेले भारी पड़े थे जसवंत सिंह, आज भी बार्डर की करते हैं हिफाजत बॉर्डर पर उनकी रक्षा करते हैं। इतना ही नहीं, लोगों का मानना है कि जसवंत सिंह की वजह से आज हम काफी ज्यादा सुरक्षित हैं। बता दें कि आज भी जसवंत सिंह के नाम पर छुट्टियां मिलती है और उन्हें प्रमोशन मिलता है। इसके अलावा इनके जूते भी लोग साफ करके रखते हैं।

72 घंटे तक चीनी सैनिकों पर अकेले भारी पड़े थे जसवंत सिंह, आज भी इनके नाम से कांपते हैं दुश्मन

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72 घंटे तक चीनी सैनिकों पर अकेले भारी पड़े थे जसवंत सिंह, आज भी इनके नाम से कांपते हैं दुश्मन

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