तिल चतुर्थी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

24 जनवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (58 बार पढ़ा जा चुका है)

तिल चतुर्थी :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *हमारे भारत देश में नित्य प्रति त्यौहार एवं पर्व मनाए जाते हैं | यहाँ कोई ऐसा दिन नहीं है जिस दिन कोई पर्व न हो | वर्ष के बारहों महीने के प्रत्येक दिन कोई ना कोई पर्व अवश्य होता है जिसे हम भारतवासी पूर्ण श्रद्धा से मनाते हैं | इसी क्रम में आज माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को "संकष्टी गणेश चतुर्थी" (तिलवा) भी कहते हैं | आज के दिन तिल चतुर्थी का व्रत करके माताएं घर परिवार की सारी वाधाएं दूर करके असीम सुख की प्राप्ति करने की कामना करती हैं | भगवान गणेश की आराधना करके अपने परिवार में समस्त विघ्नों का विनाश करने के लिए मातायें यह व्रत करती हैं | व्रत इसलिए महत्वपूर्ण क्योंकि आज के ही दिन भगवान गणेश ने संपूर्ण सृष्टि की परिक्रमा ना करके भगवान शिव एवं पार्वती की परिक्रमा करके संपूर्ण सृष्टि माता पिता में ही समाहित होने का संदेश दिया था | उनकी इस बुद्धिमत्ता से प्रसन्न होकर के भगवान शिव ने उनको वरदान दिया था कि माघ की कृष्ण चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा और चंद्रमा को अर्घ्य देगा उसके त्रिताप (दैहिक , दैविक एवं भौतिक ) दूर हो जाएंगे | इस प्रकार इस व्रत को करने से व्रतधारी के सभी तरह के दुख दूर हो जाते हैं , उसके जीवन सुख की प्राप्ति होती है , चारों तरफ से मनुष्य को सुख - समृद्धि एवं पुत्र - पौत्रादि की मंगल कामना एवं धन - ऐश्वर्य की कमी नहीं रह जाती है | परंतु विचारणीय है कि कोई भी व्रत करने में श्रद्धा एवं भाव का विशेष महत्व होता है श्रद्धा से किया हुआ कोई भी व्रत निष्फल नहीं जाता है |* *आज आधुनिकता के चकाचौंध में सभी व्रतों का स्वरूप भी आधुनिक एवं परिवर्तित हो गया है | आज सभी व्रत माताओं के द्वारा किया तो जाता है परंतु उनमें श्रद्धा एवं भाव का सर्वथा अभाव दिखाई पड़ता है | आज के दिन मातायें अपने परिवार विशेषकर संतान के लिए यह व्रत करती हैं | आज के व्रत को संकष्टी गणेश चतुर्थी , तिल चतुर्थी या आंचलिक क्षेत्रों में तिलवा भी कहा जाता है | पूरे दिन तिल का प्रयोग करके रात्रि काल में भगवान गणेश का पूजन करके तिल के लड्डू का भोग लगाने की विशेष परंपरा रही है | समाज में परिवार एवं समाज को सुखी बनाये रखने के लिए मातृशक्तियों के द्वारा समय - समय पर व्रत एवं अनुष्ठान किये जाते रहते हैं | यह कहा जा सकता है कि समाज को समृद्ध बनाने में नारियों का विशेष योगदान होते हुए भी उन्हें उपेक्षित होना पड़ता है | इसे पुरुष समाज अपनी बहादुरी तो समझ सकता है परंतु यह सम्पूर्ण समाज के लिए लज्जा की बात है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" ऐसी माताओं को भी देख रहा हूं जिन की संतानों ने उन्हें उपेक्षित जीवन जीने को मजबूर कर दिया है | परंतु फिर भी इन माताओं के द्वारा इस कठिन व्रत को किया जाता है | यह सत्य है कि पुरुष समाज कभी भी नारियों से उऋण नहीं हो सकता | पुरुषों के लिए नारियों द्वारा समय - समय पर किया जाने वाला व्रत पुरुषों को नित्य ऋणी बनाता रहता है | परंतु दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधिकतर पुरुष इसे मानने को तैयार नहीं होते हैं |* *आज गणेश पूजन के साथ ही चन्द्रोदय होने पर चन्द्रमा को अर्घ्य देकर ही व्रत का समापन किया जायेगा | धन्य है भारत देश एवं धन्य हैं हमारी मातृशक्तियाँ |*

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