बुराई/निंदा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

24 जनवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (28 बार पढ़ा जा चुका है)

बुराई/निंदा :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *मानव जीवन में कई पड़ाव आते हैं | सम्पूर्ण जीवनकाल कभी एक समान नहीं रहता है | यहाँ यदि मनुष्य की प्रशंसा होती है तो उसकी बुराई भी लोग करते रहते हैं | हालांकि संसार के लगभग सभी धर्म किसी की बुराई करना अनुचित मानते हैं परंतु मनुष्य अपनी आदत से मजबूर होकर ऐसा करता रहता है | इतिहास में अनेक ऐसे प्रसंग दृष्टिगत होते रहे हैं जहाँ लोगों ने अपनी कमियां छुपाने के लिए दूसरों की बुराई करके अपने लिए मार्ग प्रशस्त किया है , जबकि यह भी सत्य है कि ऐसे लोगों का इतिहास सुखद नहीं रहा है | दूसरों की बुराई करने वाला कभी सुखी नहीं रह सकता | इस संबंध में आचार्य चाणक्य कहते हैं कि :--- "अन्यथा वेदपाण्डित्यं शास्त्रम् आचारमन्यथा ! अन्यथा वदता शान्तं लोका: क्लिश्यन्ति चाऽन्यथा !! अर्थात :- वेद-पुराण की, पाण्डित्य की, शास्त्रों की, शान्त एवं सदाचारी व्यक्ति की बुराई जो लोग करते हैं वे स्वयं ही दुखी रहते हैं | बुराई को दो श्रेणियों में बाँटा जा सकता है - एक तो बुरे कर्म करने वाले की बुराई समाज में स्वत: फैल जाती है और दूसरे किसी व्यक्ति की उन्नति देखकर कुछ लोग उसकी जलन में उसकी बुराई करने लगते हैं | कुछ लोग किसी के द्वारा उनकी कुछ कमियाँ बताकर सावधान करने पर सावधान न होकर यह कहने लगते हैं कि अमुक व्यक्ति हमारी बुराई करता है | जबकि उस व्यक्ति का उद्देश्य बुराई करना नहीं अपितु आपको सावधान करना होता है | सावधान वही करता है जिसके हृदय में आपके लिए स्थान होगा |* *आज हम परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं , सब कुछ इस परिवर्तन से प्रभावित दिख रहा है | कहने के लिए तो आज लोगों की बौद्धिक क्षमता में पहले की अपेक्षा वृद्धि हुई है , परंतु कभी - कभी लोगों की बौद्धिक अपरिपक्वता के दर्शन हो जाया करते हैं | आज लोग स्वयं को ही सबसे अधिक बुद्धिमान एवं विद्वान समझते हुए शेष सबको तृण की भाँति समझने लगे हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज के युवा भारत को देख रहा हूँ जहाँके युवक आज किसी की भी बात मानने को तैयार नहीं होते | अपने माता - पिता , गुरु , मित्र एवं स्वजन - सम्बंधियों द्वारा यदि इन युवाओं को यह बताने का प्रयास किया जाता है कि :- "आप के द्वारा किये जा रहे कृत्य अनुकूल नहीं हैं" तो इन युवाओं को यह लगता है कि इन लोगों के द्वारा हमारी बुराई की जा रही है | और ऐसे लोग समाज में इधर - उधर अपने ही शुभचिंतकों के विषय मेंयह कहने लगते हैं कि :- मेरी उन्नति से ये लोग ईर्ष्या करने लगे हैं इसलिए बुराई कर रहे हैं | विचार करने की आवश्यकता है कि :- जिन लोगों ने आपको जीवन के किसी भी क्षेत्र में स्थापित करने के लिए दिन - रात आपका सहयोग किया है वे भला आपकी बुराई क्यों करेंगे ?? हाँ ! यह भी सत्य है कि आपके शुभचिंतक आपको अनुचित कृत्यों पर टोंकते रहेंगे यही आपको बुराई लगती है | आज के प्रतिस्पर्धी युग में जहाँ कोई किसी की उन्नति से प्रसन्न नहीं दिखाई पड़ता वहाँ आपको बात - बात पर टोंकने वाला आपका शुभचिंतक ही हो सकता है , क्योंकि वे सदैव यही चाहते हैं कि आपके द्वारा कभी भी कोई अनुचित कृत्य न हो | इसे बुराई की श्रेणी में कदापि नहीं रखा जा सकता |* *यदि कभी भी यह आभास हो कि किसी के द्वारा हमारी बुराई की जा रही है तो उस व्यक्ति को कुछ कहने के पहले स्वयं का अवलोकन अवश्य कर लेना चाहिए |*

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