सनातन धर्म :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

24 जनवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (70 बार पढ़ा जा चुका है)

सनातन धर्म :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *सृष्टि के आदिकाल में जब धरती पर जीव का प्रादुर्भाव हुआ तब से ही इस धराधाम पर सनातन धर्म स्थापित हुआ है | सनातन का अर्थ है शाश्वत , अर्थात जिसका कोई आदि या अन्त न हो | सनातन धर्म की दिव्यता का आंकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि वरितमान में संसार भर में जितने धर्म / पंथ या सम्प्रदाय हैं सब सनातन की मान्यताओं को स्वयं में समाहित करके ही अलग हुए हैं | इस समय हमारे देश भारत में मूलरूप से चार धर्म मान्य हैं ! जिन्हें हिन्दू , मुस्लिम , सिक्ख एवं ईसाई के नाम से जाना जाता है | हिन्दू धर्म सनातन का पूर्णरूप है तो मुस्लिम धर्म के संस्थापक मोहम्मद साहब के पूर्वज भी सनातन के ही अनुयायी रहे हैं , इसका प्रमाण भी मिलता है | सिक्ख धर्म सनातन धर्म का दूसरा रूप है तो ईसाई धर्म भी यहीं से प्रकट हुआ है ! कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि सनातन धर्म यदि विशाल वृक्ष है तो अन्य धर्म उसकी शाखायें हैं | लोग सनातन से अलग होते गये और नये धर्म संसार में प्रकट होते रहे | जिस प्रकार एक पिता के चार पुत्रों की मान्यतायें उनके विचार एवं सोंच पृथक होती है | उनकी जीवनशैली एवं उनके मार्ग भी अलग होते हैं परंतु यदि पिता के नाम की आवश्यकता पड़ती है तो एक ही पिता का नाम की आवश्यकता पड़ती है तो उन्हें पिता के पास ही जाना पड़ता है , उसी प्रकार सनातन से प्रकट अनेक धर्म की मान्यतायें भले ही अलग - अलग हों परंतु यथा समय इन सबको सनातन में ही समाहित हो जाना है |* *आज संसार में कितने धर्म हो गये हैं इतनी गिनती भी कर पाना शायद सम्भव न हो | हिंदू धर्म को सनातन धर्म का पर्यायवाची कहा जाता है | आज का परिदृश्य यह है कि सनातन धर्म में ही अनेकों पंथ एवं संप्रदाय हो गए हैं , जो कि हिंदू धर्म के देवी-देवताओं एवं धर्मग्रंथों का विरोध करते हुए देखे जा सकते हैं | आज की स्थिति देख कर के अनेक सनातन मतावलम्बी चिंतातुर दिखाई पड़ते हैं | उनको लगता है कि सनातन धर्म का पतन हो रहा है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" ऐसे लोगों से यही कहना चाहूंगा की सनातन धर्म का पतन होना असंभव है | क्योंकि सनातन का अर्थ ही शाश्वत है जिसका कभी ना आदि होता है ना अंत | सनातन सत्य है और सत्य ना कभी पतित हो सकता है और ना ही कभी पराजित , तो ऐसे लोगों को सनातन धर्म की चिंता करने की आवश्यकता नहीं | भले ही आज अनेक मत पंथ एवं संप्रदाय हो गए हैं और वह भले ही सनातन धर्म की मान्यताओं का विरोध कर रहे हैं परंतु यह भी सत्य है ऐसे विरोधियों के पंथ संप्रदाय की मान्यताओं में सनातन धर्म कहीं ना कहीं परिलक्षित हो ही जाता है | वे इससे स्वयं को नहीं बचा सकते हैं | सृष्टि के आदिकाल से सनातन धर्म इस धराधाम पर था और प्रलय काल तक रहेगा इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए |* *सनातन धर्म था , सनातन धर्म है और सनातन धर्म रहेगा , अत: इसको मानने वाले स्वयं का संरक्षण करते रहें सनातन का संरक्षण स्वयं होता रहेगा |

अगला लेख: सहनशीलता



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
11 जनवरी 2019
*प्राचीन काल के मनुष्य आज की अपेक्षा स्वस्थ तंदरुस्त एवं लंबी आयु वाले होते थे | उनकी लंबी आयु का रहस्य था शारीरिक व्यायाम | शारीरिक श्रम के साथ-साथ उनके सभी कार्य प्राय: टहलते - टहलते हो जाया करते थे | आज की अपेक्षा पहले यात्रा करने के साधन तो नहीं थे परंतु वे पैदल यात्रा करके स्वयं को एवं स्वयं के
11 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*इस धराधाम पर मनुष्य का एक दिव्य इतिहास रहा है | मनुष्य के भीतर कई गुण होते हैं इन गुणों में मनुष्य की गंभीरता एवं सहनशीलता मनुष्य को दिव्य बनाती है | मनुष्य को गंभीर होने के साथ सहनशील भी होना पड़ता है यही गंभीरता एवं सहनशीलता मनुष्य को महामानव बनाती है | मथुरा में जन्म लेकर गोकुल आने के बाद कंस के
22 जनवरी 2019
16 जनवरी 2019
*हमारे देश भारत में कई जाति / सम्प्रदाय के लोग रहते हैं | कई प्रदेशों की विभिन्न संस्कृतियों / सभ्यताओं का मिश्रण यहाँ देखने को मिलता है | सबकी वेशभूषा , रहन - सहन एवं भाषायें भी भिन्न हैं | प्रत्येक प्रदेश की अपनी एक अलग मातृभाषा भी यहाँ देखने को मिलती है | हमारी राष्ट्रभाषा तो हिन्दी है परंतु भिन्
16 जनवरी 2019
15 जनवरी 2019
*प्राचीन काल से ही सनातन धर्म की मान्यताएं एवं इसके संस्कार स्वयं में एक दिव्य धारणा लिए हुए मानव मात्र के कल्याण के लिए हमारे महापुरुषों के द्वारा प्रतिपादित किए गए हैं | प्रत्येक मनुष्य में संस्कार का होना बहुत आवश्यक है क्योंकि संस्कार के बिना मनुष्य पशुवत् हो जाता है | मीमांसादर्शन में संस्कार क
15 जनवरी 2019
17 जनवरी 2019
आपने भगवान विष्णु के पुत्रों के नाम पढ़े होंगे। नहीं पढ़ें तो अब पढ़ लें- आनंद, कर्दम, श्रीद और चिक्लीत। विष्णु ने ब्रह्मा के पुत्र भृगु की पुत्री लक्ष्मी से विवाह किया था। शिव ने ब्रह्मा के पुत्र दक्ष की कन्या सती से विवाह किया था, लेकिन सती तो दक्ष के यज्ञ की आग में कूदकर भस्म हो गई थी। उनका तो को
17 जनवरी 2019
11 जनवरी 2019
प्रिय मित्रों/पाठकों, आज के प्रतिस्पर्धा के इस दौर में हर कोई सफलता पाना चाहता है, लेकिन मेहनत के बाद भी सफल नहीं हो पाता है। इसका ये अर्थ नहीं होता है कि उस व्यक्ति की मेहनत में किसी तरह की कमी है।जीवन में सफलता हासिल करने के लिए सबसे जरूरी होता है इंसान को ऊर्जावान होना. स्वस्थ होना।अगर आप ऊर्जा स
11 जनवरी 2019
14 जनवरी 2019
*प्रत्येक मनुष्य एक मन:स्थिति होती है | अपने मन:स्थिति के अनुसार ही वह अपने सारे कार्य संपन्न करता है , परंतु जब मनुष्य की मन:स्थिति में विवेक सुप्तावस्था में होता है तो उसके निर्णय अनुचित होने लगते हैं | प्रत्येक मनुष्य को अपने भीतर के विवेक को जागृत करना चाहिये | जिस दिन विवेक जागृत हो जाता है मन
14 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
ग्रहों की स्थिति कब बदल जाये कुछ कहा नहीं जा सकता, ज्योतिष की मानें तो रोज़ाना किसी न किसी ग्रह में परिवर्तन ज़रूर होता है जिसकी वजह से 12 रशियन प्रभावित होती हैं। तो आइये जानते हैं पं दयानन्द शास्त्री से कि किन-किन राशियों पर है माँ लक्ष्मी की असीम कृपा और साथ ही कैसा रहेगा आपका आज का दिन । मेष किसी
18 जनवरी 2019
13 जनवरी 2019
*सनातन धर्म के नियम व सिद्धांत समस्त मानवजाति के लिए प्रेरणास्रोत होने के साथ ही जीवन को दिव्य बनाने वाले रहे हैं | एक मनुष्य का जीवन पापरहित रहते हुए कैसे दिव्य बन सकता है इन रहस्यों के दर्शन यदि कहीं प्राप्त हो सकता है तो वह है सनातन धर्म | सनातन धर्म ने मनुष्यों को अपने ज्ञान , विद्या व धन का अहं
13 जनवरी 2019
10 जनवरी 2019
ग्रहों की स्थिति कब बदल जाये कुछ कहा नहीं जा सकता, ज्योतिष की मानें तो रोज़ाना किसी न किसी ग्रह में परिवर्तन ज़रूर होता है जिसकी वजह से 12 रशियन प्रभावित होती हैं। तो आइये जानते हैं पं दयानन्द शास्त्री से कि किन-किन राशियों पर है भगवान विष्णु की असीम कृपा और साथ ही कैसा
10 जनवरी 2019
10 जनवरी 2019
दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक समारोहों में से एक है कुंभ मेला इस साल प्रयागराज में आयोजित होने वाला है। कुंभ हर छह साल में आयोजित किया जाता है, जबकि प्रयागराज में हर 12 साल में महाकुंभ आयोजित किया जाता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने कुंभ को ‘दिव्य कुंभ, भव्य कुंभ’ की संज्ञा दी ह
10 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*इस संसार में मनुष्य समय-समय पर सुख - दुख , प्रसन्नता एवं कष्ट का अनुभव करता रहता है | संसार में कई प्रकार के कष्टों से मनुष्य घिरा हुआ है परंतु मुख्यतः दो प्रकार के कष्ट होते हैं एक शारीरिक कष्ट और दूसरा मानसिक कष्ट | शारीरिक कष्ट से मनुष्य यदि ग्रसित है तो वह औषधि ले करके अपना कष्ट मिटा सकता है पर
22 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*सनातन धर्म इतना विस्तृत है , उसकी मान्यताएं इतनी विशाल हैं जिन्हें एक साथ समझ पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव है | हां यह कहा जा सकता है यदि प्राचीन सनातन संस्कृति को एक ही शब्द में समेटना हो तो वह है यज्ञ | हमारी भारतीय संस्कृति में यज्ञ का बहुत व्यापक अर्थ है | यज्ञ मात्र अग्निहोत्र ना होकर के
22 जनवरी 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
22 जनवरी 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x