आज भी सड़कों पर भीख मांगता है सुभाष चंद्र बोस के साथ देश की आजादी के लिए लड़ना वाला ये सिपाही

01 फरवरी 2019   |  अंकिशा मिश्रा   (299 बार पढ़ा जा चुका है)

आज भी सड़कों पर भीख मांगता है सुभाष चंद्र बोस के साथ देश की आजादी के लिए लड़ना वाला ये सिपाही

आज हम आज़ादी का मजा लेते हुए अपने घरों में बड़े-बड़े मुद्दों को बड़ी आसानी से बहस में उड़ा देते है, लेकिन कभी सोचा है कि जिन्होंने अपनी जान की परवाह ना करते हुए देश को आज़ाद कराया, उनमें से जो जिंदा हैं, वो किस हाल में हैं ?


ये हैं झाँसी के रहने वाले श्रीपत जी, 93 साल से भी ज्यादा की उम्र पार कर चुके श्रीपत जी झाँसी में दिए गये नेताजी सुभाषचंद्र बोस जी के भाषण से प्रभावित होकर आज़ाद हिन्द सेना में शामिल हुए थे । श्रीपत जी अपनी जान की परवाह किये बिना देश की आज़ादी के लिए लड़े, देश तो आज़ाद हो गया, लेकिन वो खुद हालातों के हाथों गुलाम हो गये, और गुलाम भी ऐसे हुए कि आज उन्हें अपनी जिंदगी गुजारने के लिए भीख तक मांगनी पड़ रही है । ऐसा नही है कि स्वतंत्रता सेनानी श्रीपत के हालात पहले से ही खराब थे, उनके पास झाँसी में 7 एकड़ जमीन, और एक लाइसेंसी बन्दूक भी थी, इनकी ज़िन्दगी अच्छी चल रही थी, लेकिन किस्मत ने पलटी मारी और आज़ाद हिन्द फ़ौज के इस सिपाही को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया । कभी देश के लिए लड़ने वाला ये सिपाही आज जिंदगी की तमाम परेशानियों से जूझ रहा है।




श्रीपत के बेटे तुलसिया को नशे और जुए की ऐसी लत लगी, जिसने अच्छी खासी चल रही जिंदगी को तबाह कर दिया । जुए और नशे की लत में तुलसिया 7 एकड़ जमीन के साथ-साथ सब कुछ बेचता चला गया, और धीरे धीरे ये परिवार कंगाल होता गया । श्रीपत ने तुलसिया को नशे से दूर रखने के लिए काफी उपाय किए, लेकिन तुलसिया नशें और जुए में ऐसा डूबा, जिसका नतीजा पूरे परिवार को भुगतना पड़ रहा है । जब तक हाथ-पैर काम कर रहे थे, तब तक खेतों में मजदूरी करते रहे, लेकिन जब शरीर से भी असमर्थ हो गये, तब असहाय होकर आज आज़ाद हिन्द फौज का ये सिपाही अपनी जिंदगी गुजारने के लिए दर-दर भटकते हुए भीख मांगने पर मजबूर हो गया।


श्रीपत कहते हैं कि मेरी हालत जो भी हो, लेकिन मरते दम तक मेरी इच्छा यही रहेगी कि मैं अपने देश के काम आ सकूँ । मेरा सौभाग्य था कि मैं नेताजी के साथ उनकी सेना में शामिल होकर देश के लिए लड़ सका । श्रीपत जी आजकल अपनी पत्नी के साथ हंसारी में एक झोपड़ी में रहतें हैं । ऐसा नही है कि आज़ादी की लड़ाई लड़ने वाले सेनानियों में सिर्फ यही अकेले हैं, ऐसे और बहुत से उदाहरण हैं हमारे देश में, जिन्होंने देश के लिए अपना सब कुछ लुटा दिया, लेकिन सुध लेने वाला कोई नही।


श्रीपत की तरह बहराइच के प्रयागपुर में रहने वाले ओरीलाल 1942 में ब्रिटिश सेना छोड़कर आज़ाद हिन्द फ़ौज में शामिल हो गये थे । ओरीलाल ने दूसरे विश्व युद्ध में आजाद हिंद फौज की तरफ से रेडहिल इम्फाल में ऑपरेशन यूजीओ की कमान संभाली थी। 99 साल के हो चुके ओरीलाल का शरीर जवाब देने लगा है, स्वतंत्रता सेनानी होने के नाते उन्हें पेंशन तो मिलती है, लेकिन इस पेंशन से उनके घर का गुजारा नहीं हो पाता है, जिसके लिए उन्हें खाने के लिए दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है।




कक्षा पांच तक ही पढ़ाई करने वाले ओरीलाल 1939 में ब्रिटिश सेना में सिपाही के तौर पर भर्ती हो गए थे, अंग्रेजों के साथ आए दिन उन्हें अपने हिन्दुस्तानियों को पीटना पड़ता था। जिसके कारण वो अन्दर से पूरे टूट चुके थे, और 1942 में ब्रिटिश सेना की नौकरी छोड़कर वो आजाद हिंद फौज में शामिल हो गए। ओरीलाल कहते हैं कि संघर्ष के बीच जब देश आजाद हुआ तो लगा था कि देश की लड़ाई लड़ने वालों का सम्मान होगा, लेकिन लगता है कि देश आज भी गुलाम है। पहले 100 रुपए पेंशन मिलती थी, अब तीन सालों से चार हजार रुपए मिलने लगी है, इससे पूरे परिवार का गुजारा भी नहीं होता है। ऐसे में उन्हें लोगों के आगे हाथ फैलाना पड़ रहा है।

क्या आज़ादी के सिपाहियों का यही इनाम है ?

आखिर ऐसा क्यूं हो रहा है कि स्वतंत्रता सेनानियों ने जिनके लिए लड़ाई वो तो आज़ादी की हवा में आगे बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन उनकी हालत और उनके हालात की किसी को फ़िक्र नही । आखिर उन्हें कितनी ख़ुशी मिलती होगी उस देश में, जिसके लिए वो अपनी जिंदगी लुटा दिए कि देश आज़ाद हो सके, आज़ाद तो हुआ लेकिन उनकी हालत एक गुलाम से भी बद्तर हो गयी।


ओरीलाल और श्रीपत जैसे ना जाने कितने आज़ादी के सिपाही होंगे इस देश में, जो दर-दर भीख मांगकर जिंदगी जी रहे हैं । उन्होंने देश आज़ाद कराया था, तो क्या उसका यही सिला मिलना चाहिए कि उन्हें ज़िदगी की जंग भीख मांग कर गुजारनी पड़े ! वो सिपाही, वो वीर इस लायक भी नही कि वो अपनी जिंदगी सम्मान के साथ गुजार सकें । सरकार के साथ-साथ समाज की भी जिम्मेदारी बनती है, कि जिनकी वजह से वो आज़ादी में जी रहे हैं, उन्हें उनकी सही जगह मिले । सोचियेगा जरूर !


अगला लेख: आपके अनुसार महागठबंधन में से कौन सा नेता मोदी जी को टक्कर दे सकता है? आपको ऐसा क्यों लगता है?



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
07 फरवरी 2019
“कहाँ राजा भोज कहाँ गंगू तेली” ये कहावत तो आपने कई बार सुनी होगी, कभी किसी पर तंज कसते हुए, तो कभी गोविंदा के गाने में. साफ़ शब्दों में कहा जाए तो हज़ारों बार आप ये कहावत आम बोलचाल में सुन चुके होंगे. कई बार इसका इस्तेमाल किसी छोटे व्यक्ति की बड़े व्यक्ति से तुलना के लिए किया जाता है. भले ही ये कहावत म
07 फरवरी 2019
30 जनवरी 2019
हर माँ-बाप अपने बच्चों के लिए कोई न कोई सपना ज़रूर देखते हैं कोई चाहता हैं उनका बच्चा डॉक्टर बने तो किसी का ख्वाब होता है कि उनका बच्चा इंजीनियर बने लेकिन आपको ये बात सुनकर थोड़ी हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश के मैनपुरी ज़िले में नगला दरबारी नाम का एक गांव है, जहां माता-पिता बच्चों को इंजीनियर या डॉक्टर
30 जनवरी 2019
21 जनवरी 2019
मै
इंसानियत की बस्ती जल रही थी, चारों तरफ आग लगी थी... जहा तक नजर जाती थी, सिर्फ खून में सनी लाशें दिख रही थी, लोग जो जिंदा थे वो खौफ मै यहा से वहां भाग रहे थे, काले रास्तों पर खून की धारे बह रही थी, हर तरफ आग से उठता धुंआ.. चारों और शोर, बच्चे, बूढ़े, औरत... किसी मै फर्क नही किया जा रहा, सबको काट रहे ह
21 जनवरी 2019
26 जनवरी 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *आज भारत अपना गणतंत्र दिवस मना रहा है | आज के ही दिन आजाद भारत में भारत के विद्वानों द्वारा निर्मित संविधान धरातल पर आया | भारत गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था तब भारत के वीर सपूतों ने अपनी जान की बाजी लगाकर अपने प्राण निछावर करके देश को आजादी दिलाई | गणतंत्र का अर्
26 जनवरी 2019
06 फरवरी 2019
भविष्य जानने के लिए कभी कभी इतिहास में झांकना पड़ता है और वर्तमान को समझना पड़ता है। इस प्रश्न का उत्तर तो एक ही लाइन में है लेकिन इसे सभी पक्ष को ध्यान में रखते हुए समझते हैं। मोदी जी के विषय में अंत में बात करेंगे क्योकि पहले बुरा भाग ही देखना हम पसंद करते हैं।महागठबंधन में सभी दलों में कुछ बातें एक
06 फरवरी 2019
30 जनवरी 2019
हर माँ-बाप अपने बच्चों के लिए कोई न कोई सपना ज़रूर देखते हैं कोई चाहता हैं उनका बच्चा डॉक्टर बने तो किसी का ख्वाब होता है कि उनका बच्चा इंजीनियर बने लेकिन आपको ये बात सुनकर थोड़ी हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश के मैनपुरी ज़िले में नगला दरबारी नाम का एक गांव है, जहां माता-पिता बच्चों को इंजीनियर या डॉक्टर
30 जनवरी 2019
21 जनवरी 2019
हर कोई व्यक्ति चाहता है कि वह अपने माता-पिता का नाम रौशन करें जिसके बारे में वह काफी सोचता है उसका ऐसा मानना होता है कि हमारे माता-पिता ने बहुत ही दुख और कष्ट झेल कर हमको इतना बड़ा किया है उसके बदले में हमारा भी यह कर्तव्य होता है कि हम अपने माता-पिता के लिए कुछ करें
21 जनवरी 2019
23 जनवरी 2019
देवी-देवताओं को लोग पवित्र मानकर पूजा करते हैं, उनमें विश्वास रखते हैं। वहीं एक बीयर कंपनी ने भगवान की फोटो का गलत इस्तेमाल करते हुए बोतल पर गणेश जी की फोटो डाली है। जाहिर है, इससे दुनियाभर में फैले हिंदू आहत हुए हैं। लोग कंपनी के खिलाफ जमकर गुस्सा उतार रहे हैं। सोशल
23 जनवरी 2019
09 फरवरी 2019
आज़ादी इज़हार की इनायत ख़ुदा की है, आज़ादी पे काबू तौहीन- ए - ख़ुदा है. (आलिम)
09 फरवरी 2019
08 फरवरी 2019
आज के समय में लोगों की जिंदगी इतनी व्यस्त हो गई है कि लोग अपने स्वास्थय पर ध्यान ही नहीं दे पाते हैं। आजकल की लाइफस्टाइल और दिनचर्या लोगों के स्वास्थय के लिए काफी नुकसानदायक होती है। लेकिन अपने बिजी शेड्यूल के चलते लोग अपने स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। बता दें कि वैसे तो रेग्यूलर चेकअप हमार
08 फरवरी 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x