नाम का प्रभाव :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

02 फरवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (46 बार पढ़ा जा चुका है)

नाम का प्रभाव :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *मानव जीवन में दुख एवं सुख की अनुभूति समय समय पर होती रहती है | जीवन में दुख के दिन किसी के लिए पहाड़ से होते हैं तो किसी के लिए मात्र साधारण बात | जिस तरह रात के बाद दिन आता है ठीक वैसे ही दुख के बाद सुख आता है पर हम कुछ मामूली मगर बड़े काम के उपायों से इन अनचाहे दुखों को कम कर सकते हैं कभी-कभी एक दम कम कर सकते हैं | जीवन रूपी इस नैया को संतुलित रखने में “राम” नाम का विशेष महत्‍व है | सभी दुखों से छूटकारा दिलाने वाला तारक मंत्र श्री राम, जय राम, जय जय राम का जप इस साधारण दिखने वाले मंत्र में असीम शक्ति छिपी हुई | या यूं कहें कि ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली नाम राम का नाम है जिसका स्‍मरण करने से एक पल में मनुष्‍य सारे पापों से मुक्ति पा जाता है | एक सार्थक नाम के रूप में हमारे ऋषियों-मुनियों ने राम नाम के महत्व को पहचाना | उन्होंने इस पूजनीय नाम की परख की और नामों के आगे लगाने का चलन प्रारंभ किया | प्रत्येक हिन्दू परिवार में देखा जा सकता है कि बच्चे के जन्म में श्री राम के नाम का सोहर होता है | विवाह आदि मांगलिक कार्यों के अवसर पर श्री राम के गीत गाए जाते हैं , यहां तक कि मनुष्य की अंतिम यात्रा में भी राम नाम का ही घोष किया जाता है | तुलसीदास जी ने लिखा है :- "तुलसी रा के कहत ही निकसत पाप पहार ! फिर आवन पावत नहीं देत मकार किंवार !! अर्थात :- जब व्यक्ति ‘रा’ शब्द का उच्चारण करता है तो इसके साथ-साथ उसके आंतरिक पाप बाहर आ जाते हैं | इस समय अंतःकरण निष्पाप हो जाता है | अब ‘म’ का उच्चारण करें | ‘म’ शब्द बोलते ही दोनों होठ स्वतः एक ताले के समय बंद हो जाते है | और इस प्रकार वाह्य विकार के पुनः अंतःकरण में प्रवेश पर बंद होठ रोक लगा देते हैं | यह है राम नाम का रहस्य |* *आज युग व्यतीत हो जाने के बाद भी श्री राम नाम की महिमा विद्यमान है | प्राचीन काल में इस नाम की महिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए माता पिता के द्वारा अपने बच्चों का नाम भगवान श्री राम के नाम पर रखा जाता था , जिसका मुख्य उद्देश्य होता था कि इसी बहाने भगवान का नाम उच्चारण तो होगा ही साथ ही बच्चे में भी भगवान राम के आदर्श प्रभावी होंगे , और ऐसा देखने को भी मिलता था | हमारे महापुरुषों ने बताया है :- "यथा नामो तथा गुणे " जैसा जिसका नाम होता है वैसे गुण उसके जीवन में परिलक्षित होते हैं | परंतु मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देख रहा हूं कि आज जिस प्रकार बच्चों का नामकरण टिंकू , पिंकू , बबलू , डब्लू आदि हो रहा है उसी प्रकार उनके आचरण भी दिखाई पड़ रहे है | हम अपने बच्चों को तो दोषी कहते हैं परंतु हमने उनका नामकरण कैसा किया है इस पर ध्यान नहीं देना चाहते | यदि आज की पीढ़ी को यह दोष दिया जाता है कि वह भ्रमित हो रही है तो सारा दोष उनका ही नहीं बल्कि इसमें माता पिता भी दोषी हैं , जिन्होंने अपने बच्चों को राम नाम की महत्ता को समझाने का प्रयास नहीं किया |* *सृष्टि के कण-कण में , मनुष्य के रोम रोम में रहने वाले श्री राम के नाम का महत्व समझना एवं समझाना होगा |*

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