उद्यापन :-- आचार्य अर्जुन तिवारी

02 फरवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (19 बार पढ़ा जा चुका है)

उद्यापन :-- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *सनातन धर्म में समस्त मानव जाति को सुखी बने रहने के अनेकानेक उपाय बताये गये हैं | वैसे तो मनुष्य को सुख एवं दुख उसके आचरण के अनुसार ही प्राप्त होते हैं | हमारे ऋषियों ने प्रत्येक मनुष्य को सुखी रहने के लिए धर्म का पालन करने का निर्देश दिया है | धर्मपालन के कई अंग हैं उनमें सबसे सरल है व्रत करना | कोई भी व्रत किया जाय तो प्रत्येक वर्ष उस व्रत का उद्यापन करने का विधान भी बताया गया है | उद्यापन अर्थात नवीनीकरण करके व्रत का पालन पुन: पूर्व की भाँति करता रहे | उद्यापन किये बिना किसी भी व्रत का नहीं शुभ फल नहीं प्राप्त होता है | व्रत करना आसान है लेकिन व्रत पूरे होने पर उद्यापन भी करने की भी आवश्यकता होती है | कहने का तात्पर्य यह है कि बिना उद्यापन किया व्रत निष्फल ही रहता है इसलिये जरूरी है कि व्रत का उद्यापन किया जाये | भले ही किसी परिजन या परिचित को न बुलाया जाये या बहुत बड़ा आयोजन न करें, लेकिन योग्य ब्राह्मण से व्रत उद्यापन की विधि को संपन्न करना चाहिये | "निर्णय सिंधु" में यह वर्णन मिलता है कि :- "उद्यापनं विना यत्रु तद् व्रतं निष्फलं भवेत" अर्थात किसी भी व्रत का यदि उद्यापन न किया जाय तो उस व्रत का मनोवांछित फल नहीं प्राप्त हो सकता है , अत: किसी भी व्रत का पालन किया जाय तो उस व्रत का वार्षिक उद्यापन उतना ही आवश्यक है जितना कि व्रत करना | जिस प्रकार हम किसी भी वार्षिक त्यौहार पर नवीन हर्षोल्लास से ओतप्रोत होकर वह त्यौहार मनाते हुए नवजीवन की अपेक्षा करते हैं उसी प्रकार किसी भी व्रत का नवीनीकरण उद्यापन के माध्यम से किया जाता रहा है |* *आज के वर्तमान युग में जहाँ मनुष्य कोई भी व्रत - अनुष्ठान निष्काम भाव से करना ही चाहता वहीं किसी भी धार्मिक कृत्य का फल भी तुरंत चाहता है परंतु वह उसे प्राप्त नहीं हो पा रहा है | इसका प्रमुख कारण है कि आज के मनुष्यों के द्वारा धार्मिक कृत्य किये तो जा रहे हैं परंतु उनमें भावना कम एवं दिखावा अघिक ही रहता है साथ ही किसी भी धार्मिक कृत्य के विषय में जानकारी का अभाव भी एक कारण बन जाता है | जिस प्रकार किसी नदी को पार करने के लिए उसकी गहराई को मापना आवश्यक होता है उसी प्रकार किसी भी विधान को अपनाने के पहले उसके विषय में पूर्ण जानकारी प्राप्त कर लेना ही श्रेयस्कर होता है | मैं " आचार्य अर्जुन तिवारी" प्राय: देखता हूँ कि लोग शिकायत करते रहते हैं कि मैंने इस व्रत का पालन किया परंतु उसका यथोचित फल नहीं प्राप्त हुआ | इस विषय पर मैं यही कहना चाहूँगा कि लोग व्रत का मतलब यह समझते है कि व्रत करने से ही ईश्वर प्रसन्न होकर सभी मनोकामनाओं को पूरा कर देगा | व्रत करने के लिये न केवल मन और तन शुद्ध होना चाहिये वही व्रत करने के पीछे किसी प्रकार का लालच भी नहीं करें | इसके साथ ही किसी भी व्रत का पालन करने के बाद उसका उद्यापन भी करते रहना चाहिए | उद्यापन का अर्थ व्रत का समापन नहीं बल्कि व्रत नवीनीकरण करते हुए वर्षपर्यन्त हमसे जो सम्भव हो सका वह करने के बाद समर्पण करने की प्रक्रिया होती है |* *व्रत के पालन से अधिक आवश्यकता होती है व्रत के उद्यापन की | समय समय पर यह करते रहना चाहिए |*

अगला लेख: आत्मबल :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
24 जनवरी 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *सकल सृष्टि में चौरासी लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मनुष्य को माना गया है | कालांतर में चार वर्ण बन गये | इन चारों वर्णों में हमारे पुराणों ने ब्राम्हण को सर्वश्रेष्ठ कहा है | ब्राह्मण सर्वश्रेष्ठ अपने त्याग एवं तपस्या से हुआ है | त्यागमय जीवन एवं तपस्या के बल पर ब्रह्म
24 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*हमारा देश भारत सामाजिक के साथ - साथ धार्मिक देश भी है | प्रत्येक व्यक्ति स्वयं को धार्मिक दिखाना भी चाहता है | परंतु एक धार्मिक को किस तरह होना चाहिए इस पर विचार नहीं करना चाहता है | हमारे महापुरुषों ने बताया है कि धार्मिक ग्रंथों की शिक्षाओं और उसके चरित्रों को केवल उसके शाब्दिक अर्थों में नहीं ले
22 जनवरी 2019
29 जनवरी 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *परमपिता परमात्मा की अद्भुत सृष्टि में विनाश एवं सृजनजन अनवरत चलता रहता है | सतयुग से प्रारंभ हुआ सृजन समय-समय पर पुरानी सृजित वस्तुओं , सभ्यताओं एवं राष्ट्रों का विनाश कर के नई वस्तुओं , नई सभ्यता , नए-नए राष्ट्रों का सृजन परमात्मा के द्वारा किया जाता रहा है | कलियु
29 जनवरी 2019
21 जनवरी 2019
हर कोई व्यक्ति चाहता है कि वह अपने माता-पिता का नाम रौशन करें जिसके बारे में वह काफी सोचता है उसका ऐसा मानना होता है कि हमारे माता-पिता ने बहुत ही दुख और कष्ट झेल कर हमको इतना बड़ा किया है उसके बदले में हमारा भी यह कर्तव्य होता है कि हम अपने माता-पिता के लिए कुछ करें
21 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*सनातन धर्म इतना विस्तृत है , उसकी मान्यताएं इतनी विशाल हैं जिन्हें एक साथ समझ पाना मुश्किल ही नहीं बल्कि असंभव है | हां यह कहा जा सकता है यदि प्राचीन सनातन संस्कृति को एक ही शब्द में समेटना हो तो वह है यज्ञ | हमारी भारतीय संस्कृति में यज्ञ का बहुत व्यापक अर्थ है | यज्ञ मात्र अग्निहोत्र ना होकर के
22 जनवरी 2019
24 जनवरी 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *इस संसार में संपूर्ण धरा धाम पर मनुष्य एक दूसरे से जुड़ा हुआ है | मानव जीवन में शब्दों का बड़ा प्रभाव पड़ता है | ऐसे ही दो शब्द मानव जीवन की धारा को बदल देते हैं जिसे अपमान एवं सम्मान के नाम से जाना जाता है | मनुष्य मन के अधीन माना जाता है और मान शब्द मन से ही बना है
24 जनवरी 2019
23 जनवरी 2019
हमारा भारत वर्ष बहुत ही धार्मिक देश है यहां पर भिन्न भिन्न प्रकार की जातियों के लोग मौजूद हैं परंतु यह सभी भाई चारे से एक साथ रहते हैं और यह अपने अपने धर्म के अनुसार अपने-अपने देवताओं की पूजा करते हैं वैसे देखा जाए तो जब हम मंदिरों में भगवान की पूजा करने जाते हैं तब हम अप
23 जनवरी 2019
24 जनवरी 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *ईश्वर ने सर्वप्रथम जड़ शरीर का सृजन किया फिर उसमें आत्मारूपी चेतनाशक्ति प्रकट की | देखना , सुनना , अनुभव करना , विचार करना , निर्णय करना आदि सभी कार्य चेतनाशक्ति के कारण होते हैं | चेतना के अभाव में यह जड़ शरीर कुछ भी नहीं कर सकता | यह चेतनशक्ति तीन अवस्थाओं में रहती
24 जनवरी 2019
24 जनवरी 2019
!! भगवत्कृपा हि केवलम् !! *सृष्टि के आदिकाल में जब धरती पर जीव का प्रादुर्भाव हुआ तब से ही इस धराधाम पर सनातन धर्म स्थापित हुआ है | सनातन का अर्थ है शाश्वत , अर्थात जिसका कोई आदि या अन्त न हो | सनातन धर्म की दिव्यता का आंकलन इसी बात से लगाया जा सकता है कि वरितमान में संसार भर में जितने धर्म / प
24 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
हमारा घर (भवन/आवास/मकान) एक ऐसी जगह होती है जहां खुलकर सांस ले सकते हैं ।अगर घर में सभी जरूरी चीजों के लिए शुभ-अशुभ दिशाओं का ध्यान रखा जाए तो नकारात्मकता से मुक्ति मिल सकती है। वास्तु शास्त्र में घर के लिए कई नियम बताए गए हैं, इनका पालन करने पर घर की पवित्रता बनी रहती है। उज्जैन के वास्तु विशेषज्ञ
22 जनवरी 2019
22 जनवरी 2019
*इस धराधाम पर मनुष्य का एक दिव्य इतिहास रहा है | मनुष्य के भीतर कई गुण होते हैं इन गुणों में मनुष्य की गंभीरता एवं सहनशीलता मनुष्य को दिव्य बनाती है | मनुष्य को गंभीर होने के साथ सहनशील भी होना पड़ता है यही गंभीरता एवं सहनशीलता मनुष्य को महामानव बनाती है | मथुरा में जन्म लेकर गोकुल आने के बाद कंस के
22 जनवरी 2019
21 जनवरी 2019
ग्रहों की स्थिति कब बदल जाये कुछ कहा नहीं जा सकता, ज्योतिष की मानें तो रोज़ाना किसी न किसी ग्रह में परिवर्तन ज़रूर होता है जिसकी वजह से 12 रशियन प्रभावित होती हैं। तो आइये जानते हैं पं दयानन्द शास्त्री से कि किन-किन राशियों पर है भोलेनाथ की असीम कृपा और साथ ही कैसा रहेगा आपका आज का दिन । मेष आप स्नेह
21 जनवरी 2019
18 जनवरी 2019
ग्रहों की स्थिति कब बदल जाये कुछ कहा नहीं जा सकता, ज्योतिष की मानें तो रोज़ाना किसी न किसी ग्रह में परिवर्तन ज़रूर होता है जिसकी वजह से 12 रशियन प्रभावित होती हैं। तो आइये जानते हैं पं दयानन्द शास्त्री से कि किन-किन राशियों पर है माँ लक्ष्मी की असीम कृपा और साथ ही कैसा रहेगा आपका आज का दिन । मेष किसी
18 जनवरी 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
22 जनवरी 2019
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x