स्टोन क्रशर

04 फरवरी 2019   |  रवीन्द्र सिंह यादव   (31 बार पढ़ा जा चुका है)

पथरीले हठीले

हरियाली से सजे पहाड़

ग़ाएब हो रहे हैं

बसुंधरा के शृंगार

खंडित हो रहे हैं

एक अवसरवादी

सर्वे के परिणाम पढ़कर

जानकारों से मशवरा ले

स्टोन क्रशर ख़रीदकर

एक दल में शामिल हो गया

चँदा भरपूर दिया

संयोगवश / धाँधली करके

हवा का रुख़

सुविधानुसार हुआ

पत्थर खदान का ठेका मिला

कारोबार में बरकत हुई

कुछ और स्टोन क्रशर की

आमद हुई

खदान पर कार्यरत मज़दूर

घिरे हैं गर्द-ओ-ग़ुबार से

पत्थरों को तोड़कर

बनती पृथक-पृथक आकार की

बेडौल गर्वीली गिट्टी

पत्थर होते खंड-खंड

महीन से महीनतर

फिर महीनतम होती

चूरा-चूरा गिट्टी

मज़दूरों की साँसों के रास्ते

फेफड़ों में जमा हो रही है

और दौलत.....

तथाकथित नेता की

तिजोरियों में!

अगले चुनाव तक

ठेकेदार नेता हो जायेगा

और मज़दूर

भगवान् को प्यारा हो जायेगा !!!

© रवीन्द्र सिंह यादव


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रेणु
05 फरवरी 2019

अवसरवादियों ने वसुंधरा का श्रृंगार-- हरीतिमा युक्त पर्वत मालाओं का सीना छलनी कर उन्हें खंडित कर दिया | उन्हें उन्सनों की प्रवाह नहीं बेजुबान पहाड़ों का दर्द कैसे जानेगे | ये स्टोन कटर अभी ना जाने कितने और पर्वतों को खंडित करेंगे और ना जाए कितने मजदूरों की सांसे अवरुद्ध कर अपनी तिजोरी भरेंगे | विचारणीय रचना आदरणीय रवीन्द्र जी | सादर --

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