ओला बौछार

08 फरवरी 2019   |  जानू नागर   (44 बार पढ़ा जा चुका है)

ओला बौछार

काले घने बादल जब अपनी जवानी मे आते हैं आसमान मे।

जमीन मे मोर पपीहा खूब इतराते हैं, नृत्य करते हैं आसमान को निहार कर, कल वह भी बौरा गए ओला वृष्टि को देख कर। कल शहरी लोग पहले खूब इतराए ओलो को देख कर फिर पछते सड़क मे जब निकले ऑफिस से कार पर। किसान खुश था पानी की धार को देखकर वह भी पछताया गेंहू गाजर के खेत को देख कर। माली भी खुश था पानी की फुहार देखर वह भी पछताया फूल पत्तियों को बुहार कर। मजदूर भी खुश था काले घने बादल को देखर अंत मे वह भी पछताया टूटे गीले चूल्हे को देख कर। प्रकृति भी सहम गई थी ओलो की मार देख कर। हम भी खुश हुए ओलो भरी कटोरी देख कर, पर रोए हम भी कटोरी मे पानी देख कर ।

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