सिंगल लाइफ बेहतर और मैरिड लाइफ

08 फरवरी 2019   |  श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव   (62 बार पढ़ा जा चुका है)

सिंगल लाइफ बेहतर और मैरिड लाइफ

प्रत्येक शख्स किसी खास मकसद से इस दुनिया में आया है, यदि आप सिंगल हैं तो इस का तात्पर्य यह है कि संभवतया अकेले रह कर ही आप अपना मकसद पा सकती हैं। तभी आप को सोच और परिस्थितियां इस के अनुरूप हैं यह भी हो सकता है कि आने वाले समय में आप स्वयं शादी के बंधन में बंध जाएं। मगर जब तक सिंगल हैं अपने इस स्टेटस का पौजिटिव यूज करें। नैगेटिव न सोंचे। वहीं शादी शुदा होने के भी कई मजेदार और खूबी भरे पल होतें है।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि बहुत से लोग ऐसे हैं, जो स्वयं अपनी इच्छा से कुंआरा रहना पसंद करते हैं, उन के एि शादी से कहीं और बड़े मकसद जिंदगी में होते हैं, तो कुछ ऐसे भी हैं, जो गलत व्यक्ति के साथ जीने के बजाय सिंगल लाइफ जीना ज्यादा पसंद करते हैं,

सिंगल व्यक्तियों को लोग अधूरा मानते हैं भले ही शादी किसी ऐसे शख्स से ही क्यों न हो जाए जो किसी भी तरह उसके लायक न हो, शादीशुदा हो जाना ही एक अचीवमेंट माना जाता है।

ऐसा जरूरी नहींहैं कि जो अविवाहित हैं, वे खुश नहीं रह सकते हैं, पश्चिमी देशों में करीब आधी शादियों का अंत तलाक में होता है। इसलिए शादी करना सामाजिक जीवन में सफल होने का एकमात्र तरीका नहीं है। दोनों ही विकल्पों में जीवन के अन्य क्षेत्रों की तरह ही अलग अलग जोखिम है। बहुत से लोगों हैं जो भावनात्मक रूप से शादीशुदा युवक या युवती की अपेक्षा कहीं ज्यादा मजबूत होते हैं, कुछ लोग कहते हैं कि परिवार का वंश बढ़ाने के लिए हमें शादी करना चाहिए एक बच्चे को जन्म देना चाहिए। जबकि वहीं कुछ लोग बच्चे को गोद लेना पंसद करते हैं।

विवाह के बाद इंसान अपने दोस्तों और अभिभावकों से कम कनेक्टेड रह जाता है यह सिर्फ तुरंत शादी के बाद ही नहीं वरन इस के कई सालों बाद भी यह स्थिति बनी रहती है। वे लोग जो अविवाहित रहे हैं वे अपने दोस्तों, परिवार और पड़ोसियों से ज्यादा विनीत और उदार पाए गए, उन के बजाय जो विवाहित हैें।

जिंदगी में कभी हम स्वयं तो कभी हमारे हितैषी हमारे लिए एक टाइमटेबल सैट कर देते हैं इस उम्र में पढ़ाई, इस उम्र में शादी तो इस उम्र में बच्चे, वैसे तो जिंदगी में सब कुछ समय पर होना जरूरी है मगर कई बार इस तरह की अपेक्षाएं जिदंगी को बहुत ही रोबोटिक बना डालती है और यदि समय पर कुछ करने में सफल न हों पाएं तो मानसिक तनाव पैदा हो जाता है।

क्या करें - स्वस्थ या पौजिटिव अपेक्षाएं तो स्वीकार कीजिए, मगर जिन पर हमारा वश नहीं उन की वजह से नैगेटिव सोच डैवलेप करने से बचें। अपने मैंटल अलार्म क्लॉक को बंद कर लीजिए और वर्तमान में जीने का प्रयास कीजिए। फिर देखिए जिंदगी खूबसूरत रूप में सामने आएगी।


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