बजरंग बाण का क्या महत्व है?

09 फरवरी 2019   |  श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव   (57 बार पढ़ा जा चुका है)

बजरंग बाण का क्या महत्व है?

बजरंग बाण. जिस भी घर,परिवार में बजरंग बाण का नियमित पाठ,अनुष्ठान होता है वहां दुर्भाग्य, दारिद्रय,भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य रोग,शारीरिक कष्ट कभी नहीं सताते। बजरंग बाण में पूरी श्रद्धा रखने और निष्ठापूर्वक उसके बार बार दोहराने से हमारे मन में हनुमान जी की शक्तियां जमने लगती हैं। शक्ति के विचारों में रमण करने से शरीर में वही शक्तियां बढ़ती हैं। शुभ विचारों को मन में जमाने से मनुष्य की भलाई की शक्तियों में बढोत्तरी होने लगती है। उसका सत् चित् आनंद स्वरूप खिलता जाता है। मामूली कष्टों और संकटों के निरोध की शक्तियां विकसित हो जाती हैं तथा साहस और र्निभीकता आ जाती है।

बजरंग बाण के श्रद्धापूर्वक उच्चारण कर लेने से जो मनुष्य शक्ति के पुंज महावीर हनुमान जी को स्थायी रूप से अपने मन में धारण कर लेता है उसके सब संकट अल्पकाल में ही दूर हो जाते हैं। साधक को चाहिए कि वह अपने सामने हनुमान जी का कोई चित्र रख ले और पूरे आत्मविश्वास तथा निष्ठाभाव से उनका मानसिक ध्यान करें। मन में ऐसी धारणा करें कि हनुमान जी की दिव्य शक्तियां धीरे धीरे मेरे अंदर प्रवेश कर रही हैं। मेरे अंतर तथा चारों ओर के वायु मंडल आकास में स्थित संकल्प के परमाणु उत्तेजित हो रहे हैं। ऐसे सशक्त वातावरण में निवास करने से मेरी मन शक्ति के बढ़ने में सहायता मिलती है। जब यह मूर्ति मन मंदिर में स्थायी रूप से उतरने लगे, अंदर से शक्ति का स्त्रोत खुलने लगे तभी बजरंग बाण की सिद्धि समझनी चाहिए। श्रद्धायुक्त अभ्यास ही पूर्णता की सिद्धि में सहायक होता है। पूजन में हनुमान जी की शक्तियों पर एकाग्रता की आवश्यकता है।

यह साधना कहीं एकान्त स्थान अथवा एकान्त में स्थित हनुमानजी के मन्दिर में प्रयोग करें। हनुमान जी के अनुष्ठान में अथवा पूजा आदि में दीपदान का विशेष महत्त्व होता है। 5 अनाजों (गेहूं, चावल, मूंग, उड़द और काले तिल) को अनुष्ठान से पूर्व एक-एक मुट्ठी प्रमाण में लेकर शुद्ध गंगाजल में भिगो दें। अनुष्ठान वाले दिन इन अनाजों को पीसकर उनका दीया बनाएं।

बजरंग बाण का जप और पाठ मंगलवार या शनिवार के दिन शुरु करें.इस दिन यथाशक्ति हनुमान कृपा और शनिदेव की प्रसन्नता के लिए व्रत भी रख सकते हैं. बजरंग बाण के नित्य पाठ से व्यक्ति के तन, मन और धन से जुड़े सभी कलह और संताप दूर होते हैं और भौतिक सुख प्राप्त होते हैं.

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