कांग्रेस ने आज तक उस राज्य और वहाँ के लोगो को भी सिर्फ सत्ता भोग के लिए गुमराह कर के रखा था। नार्थ ईस्ट का राज्य नागालैंड विकास के पथ पर

10 फरवरी 2019   |  संजय अमान   (47 बार पढ़ा जा चुका है)

कांग्रेस ने आज तक उस राज्य और वहाँ के लोगो को भी सिर्फ सत्ता भोग के लिए गुमराह कर के रखा था।

नार्थ ईस्ट का राज्य नागालैंड विकास के पथ पर


- संजय अमान


ज्यो -ज्यो लोकसभा चुनाव के दिन नजदीक आते जा रहे है चुनावी सरगर्मिया बढ़ती जा रही है तरह -तरह के आरोप राजनीतिक पार्टिया एक दूसरे पर लगा रही है यैसे में मोदी सरकार के किए गए विकास के कार्यों को रफैल जैसे मुद्दे को उठा कर काँग्रेस जनता का ध्यान बटा रही है।

मैं आज यहाँ नार्थ ईस्ट के एक राज्य नागालैंड की बात लिखूंगा जो पिछले कई वर्षो से विकास की राह देख रहा था परन्तु केंद्र की भाजपा सरकार और वर्तमान में स्थापित राज्य की भाजपा सरकार के कारण उस राज्य में विकास को ले कर जो काम किए जा रहे है वह सराहनिए तो है ही हमें सोचने पर मजबूर भी करता है कि सौंदर्य के दृष्टिकोण के अनुसार देश का दूसरा कश्मीर नागालैंड राज्य इतने वर्षो से क्यों पिछड़ा रहा। दरअसल कॉंग्रेस राज्य में खाओ और खाने दो की नीति के कारण आज तक यह राज्य उपेक्षित रहा है।

पिछले दिनों मैं इस राज्य के दौरे पर था। मुंबई से हवाई मार्ग से कोलकत्ता होते हुए दीमापुर पंहुचा वहां से राज्य की राजधानी कोहिमा जाने के लिए मैंने एक प्राइवेट कार ली और निकल पड़ा। दीमापुर से कोहिमा की दुरी तक़रीबन ८० किलोमीटर है ,जो दुर्गम पहाड़ियों और रास्तो से हो कर जाया जा सकता है।


हवाई अड्डे से दीमापुर शहर क़रीब ५ से ६ किलोमीटर की दुरी पर है शहर से हो कर कोहिमा जाने वाला मार्ग बहुत ही खराब है जहा अभी भी सड़क निर्माण का काम तेज गति से चल रहा है। मैं जिस कर से जा रहा था उसका ड्राइवर जमील कोहिमा का ही था मैंने उस से पूछा -''क्यों भाई ये सड़क कहा तक ख़राब है और कब से रोड का काम चल रहा है ? उसने मेरी बात का जवाब देते हुए कहा -साहब लगता है आप पत्रकार है ? मैंने भी कहा -' जी हां। फिर कार ड्राइवर जमील ने बताना शुरू किया -'' साहब दीमापुर से कोहिमा मैं सवारी ले कर रोज़ आता जाता हूँ , पहले यहां सड़क की हालत बहुत ही ख़राब थी जान जोखिम में डाल कर हम सवारियों को ले कर आया जाया करते थे , मगर जब से मोदी जी प्रथानमंत्री बने है जब से सड़क निर्माण का काम बहुत ही तेजी के साथ हो रहा है यहाँ के हालत बहुत बदल गए है , छोटे से छोटा आदमी भी हर रोज़ १०० से १५०० कमा लेता है , तेजी से बन रहे सड़क के कारण हमारे जैसे लोगो और टूरिस्टों को काफी सुविधा हो रही है। -'' ओके , - मैंने उसकी बात सुनी और इतना कह कर कार की पिछली सीट पर पीठ को आराम की मुद्रा में ला कर बैठ गया। इतने में ड्राइवर ने कार रोकी , मैंने देखा वह एक मिलिट्री का चेक पोस्ट था , आप को यहाँ बता दूँ दीमापुर सिटी से कोहिमा या कही बॉर्डर एरिये में जाने के लिए वहां की कोर्ट से आप को परमिट लेना होता है , खैर मैंने तो लिया नहीं था मेरे पास मेरा प्रेस कार्ड था जो काम आया और हम मामूली जांच के बाद आगे के सफर की वोर निकल पड़े। खुबसूरत वादियों से होते हुए पहाड़ो का सीना चीरते हुए हम आगे बढ़ रहे थे कुछ किलोमीटर तक सड़के पक्की बन चुकी थी लगभग ३० किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद कार के ड्राइवर ने एक होटल पर चाय नाश्ते के लिए फिर से गाड़ी रोकी आदतन मैंने उस होटल वाले से भी पूछ लिया -भाई यहाँ मोदी सरकार में आप खुश है ? होटल वाला वहा का नागा ट्राइव पढ़ा लिखा था छूटते ही बोलै -'' यस , यु आर कमिंग फ्रॉम ,- मैंने आई एम किंग फ्रॉम मुंबई - , -ओके , फिर होटल वाला हिंदी में बात करते हुए बोलने लगा -''हम सब बहुत खुश है यहाँ पर दिन रात सड़क का काम चल रहा है जिस कारण हमारा होटल भी खूब चलता है। पहले बहुत ही खराब हालत थे हम खुश है।

इतना मेरे लिए काफी था , आप को बता दूँ पूर्वी राज्यों में ८० प्रतिशत से ज्यादा लोग वह पढ़े लिखे है। बहरहाल मैं निर्माणधीन उबड़ खाबड़ सड़क के झटको के कारण धकान सी हो रही थी। शाम होते होते मैं कोहिमा पंहुचा , वहा सीधे राज भवन पंहुचा , मैंने पहले से कोई राज्य पाल महोदय बीपी आचार्य जी से समय नहीं ले रखा था इस कारण थोड़ा डरा सा भी था कि क्या पता मिलेंगे या नहीं मगर जैसे ही उनको यह संदेशा पहुँचा कि मुम्बई से कोई मिलने को आया है तो उन्होंने मुझे तुरंत अंदर बुलाया और बड़े ही स्नेह के साथ मिले जबकि मुम्बई के उनके मित्र संघ के रमेश मेहता जी से मैं कह दिया था कि वे पीबी आचार्य जी को बोल थे मगर उनका संपर्क नहीं हो पा रहा था। मुलाकात करीब एक घंटा रही।

मैं वह से निकल कर मेरे मित्र और वह के भाजपा सरकार में शिक्षा मंत्री तथा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Temjen Imna Along के बगले पर पंहुचा। वहा उनके साथ रात बिताई और शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे काम के बारे में लम्बी बात हुई उन्होंने कहा कि -'' जैसा आप को पता है यहाँ पर शिक्षा का दर बहुत अच्छा है मगर हम लोग बहुत ही सजकता के साथ मोदी जी के शिक्षा के लिए गए कदम को लागू करने का काम कर रहे है हर फिल्ड में हमारी सरकार बहुत काम कर रही है।

बहरहाल फिर सुबह मैं उसी कार ड्राइवर के साथ दीमापुर के लिए निकल पड़ा। रास्ते में चल रहे सड़क निर्माण के काम का जायजा लेता रहा।

जलमहल होटल मेरा पहले से ही बुक था मैं वह दोपहर तक पहुंच गया। खाने के बाद मैं सो गया। अगले दिन २६ जनवरी था मैं तैयार हो कर बहार निकला कि जा कर कही तिरंगे को सलामी दी जाए मगर जैसे ही मैं बहार निकला देखा होटल का रेस्टोरेंट भी बंद था और सड़के सुनसान थी मैंने होटल वाले को पूछा कि आज यहाँ हड़ताल जैसा माहौल क्यों है ? उसने बताया -नागरिक संसोधन बील को ले कर यहाँ के स्टूडेंट फोरम ने बंद का आह्वाहन किया है। मैंने चरण होटल के काउंटर पर रखे उसदिन के समाचारपत्र नागालैंड पोस्ट को हाथ में लिया और हड़ताल से सम्बंधित खबर पड़ी। मन बड़ा दुखी हुवा , २६ जनवरी को हड़ताल विरोध का और कोई माध्यम भी सकता था वहा के लोगो ने उसदिन नागरिक संसोधन बील के लिए २६ जनवरी का वहिष्कार किया था।


मैंने पैदल ही दीमापुर शहर का जायजा लिया कि कही तो सार्वजानिक तौर पर झंडा वंदन का कार्यक्रम हो रहा होगा मगर मैं निराश हो कर वापस होटल आया और त्रिपुरा के प्रभारी रहे सुनील देवधर जी से फोन पर बात कर के मन को हल्का किया।

आखिर ये हालात क्यों है वहां पर मैं सोचने पर मजबूर हो गया , सोचने और वहाँ के स्थानीय लोगो से बात चीत करने पर पता चला कि हालात पहले यहाँ बहुत ही ख़राब थे अब थोड़ा सुधार हो रहा है मगर आज भी यहाँ की सरकार के पैरलर एक और सरकार है जिसे वहाँ के उग्रवादी कह सकते है जो बड़ा दखल रखते है।

पिछली कांग्रेस सरकारों के समय में जो भी पैसा यहाँ के राज्य के विकास के लिए आया सभी ने मिल कर खाया है। आज जब केंद्र में मोदी और राज्य में भी भाजपा सरकार है तो हालात पे काबू पाने में काफी हद तक सफल हुई है , मगर समय लगेगा भारत के दूसरे बेहतरीन राज्य को सुधारने के लिए।


दीमापुर में बाहरी लोग है जो बिहार से है ज्यादातर बिहारी वहां ऑटो रिक्शा चलाते है या छोटा मोटा कार्य कर के अपना पेट भरते है। वहाँ के व्यापारियों को आज भी वहाँ सरकार को टैक्स देने के साथ साथ एक पैरलर सरकार को भी टैक्स हर साल देना पड़ता है।


खैर इस राज्य में बहुत काम करने की जरुरत है कोहिमा के लोग आज भी जब दीमापुर आते है तो कहते है हम इण्डिया में जा रहे है आखिर ये सोच वह के लोगो में क्यों पैदा हुई है ? इस का जिम्मेदार कौन लोग है ? जाहिर है कांग्रेस ने आज तक उस राज्य और वहाँ के लोगो को भी सिर्फ सत्ता भोग के लिए गुमराह कर के रखा था।

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