दाम्पत्य जीवन में व्यवहारिक सोच

10 फरवरी 2019   |  श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव   (48 बार पढ़ा जा चुका है)

दाम्पत्य जीवन में व्यवहारिक सोच - शब्द (shabd.in)

आप चाहे गांव या कस्बे के मध्यवर्गीय परिवार के पढ़े-लिखे व्यक्ति हों अथवा महानगर के किसी संपन्न कुलीन परिवार के सदस्य हों या फिर सामान्य आर्थिक स्तर के कोई अधिकारी अथवा व्यापारी, इस सत्य को मन-ही-मन स्वीकार कर लें कि दाम्पत्य जीवन की सफलता का सीध संबंध पति-पत्नि के आपसी रिश्तों से होता है। पति-पत्नि में यह भावनात्मक जुड़ाव और सेवा भावना जितनी अधिक होगी, संबंधों में दृढ़ता उतनी ही अधिक होगी।

विवाह के बाद स्त्री गृह कार्य का संचालन कर गृहलक्ष्मी बन जाती है और पुरूष परिवार का संरक्षक बन परिवार का कर्ता बन जाता है घर के कामों में दोनों ही एक-दूसरे का सहयोग करने लगते हैं। किसान दिन भल हल चलाकर खेती करता है, तो पत्नि उसका भोजन लेकर कुंए-खेत पर आती है। लेकिन यह रही पुरानी बातें अब समय बदल गया है, तो भी पत्नि ही घर को सजाती-संवारती है। पारिवारिक अपेक्षाओं की पूर्ति करती है। आर्थिक आवश्यकताओं के लिए उच्च जीवन-यापन की इच्छा के लिए अब उसने नौकरी करना भी प्रारंभ कर दिया है। पत्नि की मान-प्रतिष्ठा तभी बढ़ती है, जब वह अपनी पारिवारिक अपेक्षाओं की पूर्ति करने लगती है। चाहे वह नौकरी करते हुए इसे निभाये। यदि उसके नौकरी करने से दाम्पत्य जीवन पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता अथवा तो और मधुरता आती है, वह पति की सहयोगी बन उसके कंधे से कंधा मिलाकर उसे सहयोग देती है तो इस व्यवहार में दोष नहीं देखा जा सकता है।

दाम्पत्य संबंधों मेंं निकटता लाने के लिए पति-पत्नि को अपनी सोच में हमेशा नया पन लाते रहना चाहिए। पति-पत्नि को चाहिए कि वे एक-दूसरे के अच्छे कार्यों, गुणों की प्रशंसा करें। प्रशंसा से आशय केवल उसके रूप-सौंदर्य की प्रशंसा नहीं, बल्कि उनके उन कार्यों की प्रशंसा से है, जिससे पति अथवा पत्नि की मान-प्रतिष्ठा बढ़ रही है।

स्त्री का बहु रूप उसके ससुराल परिवार का केन्द्र बिन्दु होता है। अपने इस रूप के कारण ही उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है। परिवार के हर सदस्य की अपेक्षाएं उसी से जुड़ी रहती हैं। एक तरह पति की इच्छाओं का सम्मान तो दूसरी ओर परिवार में सास-ससुर, नंद,देवर-देवरानी, जेठ-जेठानी और उनके बच्चों आदि की रूचियों, इच्छाओं और मर्यादाओं सभी का ध्यान भी रखना पड़ता है। यही स्त्री का बहु रूप में प्रमुख कर्तव्य होता है। यही कर्तव्य उसके अच्छे व्यवहार का परिणाम भी होता है।

दाम्पत्य जीवन में मधुरता लाने के लिए पति-पत्नि दोनों को जीवन की कठोर वास्तविकताएं स्वीकार करना चाहिए। हर विषम परिस्थिति में किसी को अकेला छोड़ना दाम्पत्य संबंधों पर प्रश्न चिन्ह लगा सकता है। हमेशा एक – दूसरे से सलाह लें और उसे स्वीकार भी करें। दोनों परिवार और अपने भविष्य की योजनाएं मिलकर करें। सबसे जरूरी बात जिद पर न अड़े अथवा संबंध तोड़ लेने की हदों तक न पहुंचे। यह सभी बातें यदि दोनों पति-पत्नि ध्यान में रखें तो अपने दाम्पत्य जीवन में खुशियां लाने से कोई नहीं रोक सकता।

दाम्पत्य जीवन में व्यवहारिक सोच - शब्द (shabd.in)

अगला लेख: बजरंग बाण का क्या महत्व है?



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
09 फरवरी 2019
एक राजा की दो पत्नियां थी। प्रथम पत्नि सांवली थी वह राजा को बिल्कुल पंसद नहीं थी वहीं दूसरी पत्नि बहुत सुंदर देह व आकर्षक थी। राजा हमेशा दूसरी पत्नि को अपने साथ रखता था। वह उसकी अचूक एवं आकर्षक सुन्दरता में डूबा रहता था प्रथम पत्नि सुशील एवं बहुत गुण थी लेकिन उसका रंग सावंला होने के कारण राजा उसे पस
09 फरवरी 2019
14 फरवरी 2019
- संजय अमान भारत का ईतिहास गवाह है सत्ता के लिए किसी भी हद तक चले जाना राजनीतिक संस्कृति का हिस्सा ही नहीं ज़रूरत भी होता है परन्तु इनसब से ऊपर राष्ट्र हीत की चिंता बहुत ही कम राजनीतिज्ञों को करते हुए देखा गया है वर्त्तमान में यही दृश्य देखने को मिलता है। अब वह दिन नहीं रहे या सिर्फ क़िताबों में या पु
14 फरवरी 2019
10 फरवरी 2019
कांग्रेस ने आज तक उस राज्य और वहाँ के लोगो को भी सिर्फ सत्ता भोग के लिए गुमराह कर के रखा था। नार्थ ईस्ट का राज्य नागालैंड विकास के पथ पर - संजय अमानज्यो -ज्यो लोकसभा चुनाव के दिन नजदीक आते जा रहे है चुनावी सरगर्मिया बढ़ती जा रही है तरह -तरह के आरोप राजनीतिक पार्टिया एक दूसरे पर लगा रही है यैसे मे
10 फरवरी 2019
07 फरवरी 2019
पु
पुरानी यादेंविजय कुमार तिवारी1983 में 4 सितम्बर को लिखा-डायरी मेरे हाथ में है और कुछ लिखने का मन हो रहा है। आज का दिन लगभग अच्छा ही गुजरा है।ऐसी बहुत सी बातें हैं जो मुझे खुश भी करना चाहती हैं और कुछ त्रस्त भी।जब भी हमारी सक्रियता कम होगी,हम चौकन्ना नहीं होंगे तो निश्चित मानिये-हमारी हानि होगी।जब हम
07 फरवरी 2019
07 फरवरी 2019
नींद व्यक्ति की सबसे ज्यादा आवश्यक है, बिना नींद या कम नींद के हम कई बीमारियों और समस्याओं के शिकार हो सकते हैं.जिस तरह पोषण के लिए आहार की जरुरत होती है उसी तरह थकान मिटने के लिए पर्याप्त नींद की जरुरत होती है, निद्रा के समय मस्तिष्क सर्वथा शान्त, निस्तब्ध या निष्क्रिय होता हो, सो बात नहीं। पाचन तं
07 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
नींद में कुछ लोग बड़बड़ाने लगते हैं जिससे ना सिर्फ उनकी नींद टूट जाती है बल्कि कमरे में मौजूद दूसरे लोग भी परेशान हो जाते हैं। नींद में बड़बड़ाना कोई बीमारी नही है लेकिन ये इससे पता चलता है कि आपकी सेहत कुछ गड़बड़ है।क्‍यों बड़बड़ाते हैं नींद में लोग?नींद में बोलने को बड़बड़ा कहते हैं क्योंकि जब आप
09 फरवरी 2019
08 फरवरी 2019
जिस प्रकार पौधा लगाने से पहले बीज आरोपित किया जाता है उसी प्रकार के युवा लड़के-लड़कियों के मन में दाम्पत्य जीवन के संबंधों के भावों को पैदा करने के लिए विवाह पूर्व ही अनेक संस्कार आरोपित किए जाते हैं। यद्यपि वे सारे के सारे विवाह के ही अंग माने जाते हैं। जैसे-हल्दी चढ़ाना, तैल चढ़ाना, कन्या पूजन, गाना ब
08 फरवरी 2019
05 फरवरी 2019
तुलसी दास कहते हैं- 'भाव-अभाव, अनख-आलसहुं, नाम जपत मंगल दिषी होहुं।' भाव से, अभाव से, बेमन से या आलस से, और तो और, यदि भूल से भी भगवान के नाम का स्मरण कर लो तो दसों दिशाओं में मंगल होता है। भगवान स्वयं कहते हैं, भाव का भूखा हूं मैं, और भाव ही इक सार है, भाव बिन सर्वस्व भी दें तो मुझे स्वीकार नहीं! ऐ
05 फरवरी 2019
10 फरवरी 2019
चु
चुनाव-2019विजय कुमार तिवारीहम वोट देने वाले हैं।वोट देना हमारा अधिकार है और कर्तव्य भी।यह बहुत संयम, धैर्य और विचार का विषय है।आज से पहले शायद कभी भी हमने इस तरह नहीं सोचा।चुनाव आयोग और हमारे संविधान ने इस विषय में बहुत से दिशा-निर्देश जारी किये हैं।हम सभी सामान्य वोटर को बहुत कुछ पता भी नहीं है।कई
10 फरवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
अंग्रेजी  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x