दाम्पत्य जीवन में व्यवहारिक सोच

10 फरवरी 2019   |  श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव   (141 बार पढ़ा जा चुका है)

दाम्पत्य जीवन में व्यवहारिक सोच

आप चाहे गांव या कस्बे के मध्यवर्गीय परिवार के पढ़े-लिखे व्यक्ति हों अथवा महानगर के किसी संपन्न कुलीन परिवार के सदस्य हों या फिर सामान्य आर्थिक स्तर के कोई अधिकारी अथवा व्यापारी, इस सत्य को मन-ही-मन स्वीकार कर लें कि दाम्पत्य जीवन की सफलता का सीध संबंध पति-पत्नि के आपसी रिश्तों से होता है। पति-पत्नि में यह भावनात्मक जुड़ाव और सेवा भावना जितनी अधिक होगी, संबंधों में दृढ़ता उतनी ही अधिक होगी।

विवाह के बाद स्त्री गृह कार्य का संचालन कर गृहलक्ष्मी बन जाती है और पुरूष परिवार का संरक्षक बन परिवार का कर्ता बन जाता है घर के कामों में दोनों ही एक-दूसरे का सहयोग करने लगते हैं। किसान दिन भल हल चलाकर खेती करता है, तो पत्नि उसका भोजन लेकर कुंए-खेत पर आती है। लेकिन यह रही पुरानी बातें अब समय बदल गया है, तो भी पत्नि ही घर को सजाती-संवारती है। पारिवारिक अपेक्षाओं की पूर्ति करती है। आर्थिक आवश्यकताओं के लिए उच्च जीवन-यापन की इच्छा के लिए अब उसने नौकरी करना भी प्रारंभ कर दिया है। पत्नि की मान-प्रतिष्ठा तभी बढ़ती है, जब वह अपनी पारिवारिक अपेक्षाओं की पूर्ति करने लगती है। चाहे वह नौकरी करते हुए इसे निभाये। यदि उसके नौकरी करने से दाम्पत्य जीवन पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता अथवा तो और मधुरता आती है, वह पति की सहयोगी बन उसके कंधे से कंधा मिलाकर उसे सहयोग देती है तो इस व्यवहार में दोष नहीं देखा जा सकता है।

दाम्पत्य संबंधों मेंं निकटता लाने के लिए पति-पत्नि को अपनी सोच में हमेशा नया पन लाते रहना चाहिए। पति-पत्नि को चाहिए कि वे एक-दूसरे के अच्छे कार्यों, गुणों की प्रशंसा करें। प्रशंसा से आशय केवल उसके रूप-सौंदर्य की प्रशंसा नहीं, बल्कि उनके उन कार्यों की प्रशंसा से है, जिससे पति अथवा पत्नि की मान-प्रतिष्ठा बढ़ रही है।

स्त्री का बहु रूप उसके ससुराल परिवार का केन्द्र बिन्दु होता है। अपने इस रूप के कारण ही उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा बढ़ती है। परिवार के हर सदस्य की अपेक्षाएं उसी से जुड़ी रहती हैं। एक तरह पति की इच्छाओं का सम्मान तो दूसरी ओर परिवार में सास-ससुर, नंद,देवर-देवरानी, जेठ-जेठानी और उनके बच्चों आदि की रूचियों, इच्छाओं और मर्यादाओं सभी का ध्यान भी रखना पड़ता है। यही स्त्री का बहु रूप में प्रमुख कर्तव्य होता है। यही कर्तव्य उसके अच्छे व्यवहार का परिणाम भी होता है।

दाम्पत्य जीवन में मधुरता लाने के लिए पति-पत्नि दोनों को जीवन की कठोर वास्तविकताएं स्वीकार करना चाहिए। हर विषम परिस्थिति में किसी को अकेला छोड़ना दाम्पत्य संबंधों पर प्रश्न चिन्ह लगा सकता है। हमेशा एक – दूसरे से सलाह लें और उसे स्वीकार भी करें। दोनों परिवार और अपने भविष्य की योजनाएं मिलकर करें। सबसे जरूरी बात जिद पर न अड़े अथवा संबंध तोड़ लेने की हदों तक न पहुंचे। यह सभी बातें यदि दोनों पति-पत्नि ध्यान में रखें तो अपने दाम्पत्य जीवन में खुशियां लाने से कोई नहीं रोक सकता।

दाम्पत्य जीवन में व्यवहारिक सोच

अगला लेख: घर पर गर्भावस्था की जांच (प्रेग्नेंसी टेस्ट) कैसे करे



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
06 फरवरी 2019
प्
प्रार्थना जितनी सरल होती शायद ही कुछ इतना सरल हो, मैं यहाँ पर उतने ही कम शब्दों में और इसके बारे में कहना चाहूँ की प्रार्थना जितनी निःशब्द रहे उतनी सरल और तेज प्रभाव वाली होती है। शब्दों में कमी रह सकती है मगर निःशब्द प्रार्थना बहुत कुछ कहती है।वैसे प्रार्थना निवेदन करके ऊर्जा प्राप्त करने की शक्ति
06 फरवरी 2019
10 फरवरी 2019
कांग्रेस ने आज तक उस राज्य और वहाँ के लोगो को भी सिर्फ सत्ता भोग के लिए गुमराह कर के रखा था। नार्थ ईस्ट का राज्य नागालैंड विकास के पथ पर - संजय अमानज्यो -ज्यो लोकसभा चुनाव के दिन नजदीक आते जा रहे है चुनावी सरगर्मिया बढ़ती जा रही है तरह -तरह के आरोप राजनीतिक पार्टिया एक दूसरे पर लगा रही है यैसे मे
10 फरवरी 2019
14 फरवरी 2019
हम चार मंजिला बिल्डिंग के सबसे निचले वाले माले में रहते हैं। यूँ तो सरकारी मकानों में सबसे निचले वाले घर की स्थिति ऊपरी मंजिलों में रहने वाले लागों के जब-तब घर-भर का कूड़ा-करकट फेंकते रहने की आदत के चलते कूड़ेदान सी बनी रहती है, फिर भी यहाँ एक सुकून वाली बात जरूर है कि बागवानी के लिए पर्याप्त जगह न
14 फरवरी 2019
06 फरवरी 2019
मन्वन्तर एक संस्कॄत शब्द है, जिसका संधि-विच्छेद करने पर = मनु+अन्तर मिलता है। इसका अर्थ है मनु की आयु. प्रत्येक मन्वन्तर एक विशेष मनु द्वारा रचित एवं शासित होता है, जिन्हें ब्रह्मा द्वारा सॄजित किया जाता है। मनु विश्व की और सभी प्राणियों की उत्पत्ति करते हैं, जो कि उनकी आयु की अवधि तक बनती और चलती र
06 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
जैसे छींकने पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। छींकते समय जैसे आंखे बंद हो जाती है वैसे ही महिलाएं भी चरमसुख के समय चाह कर भी आंखे नहीं खोल पातीं। दरअसल इस वक्त उनकी ग्लैंड से तरल स्त्रावित होता है जो दिमाग को आंखें बंद करने के लिए संदेश भेजता है।लवमेकिंग, दो विपर‍ित लिंग के बीच न सिर्फ एक इंटीमेसी बल्क
09 फरवरी 2019
08 फरवरी 2019
जिस प्रकार पौधा लगाने से पहले बीज आरोपित किया जाता है उसी प्रकार के युवा लड़के-लड़कियों के मन में दाम्पत्य जीवन के संबंधों के भावों को पैदा करने के लिए विवाह पूर्व ही अनेक संस्कार आरोपित किए जाते हैं। यद्यपि वे सारे के सारे विवाह के ही अंग माने जाते हैं। जैसे-हल्दी चढ़ाना, तैल चढ़ाना, कन्या पूजन, गाना ब
08 फरवरी 2019
01 फरवरी 2019
भारत के इतिहास में कई महान संत हुए हैं जिन्होंने अपने जीवन में कविताओं के जरिए लोगों के दिलों में जगह बनाई। मगर संत कबीरदास की रचनाओं का कोई जोड़ नहीं था। वे एक आध्यात्मिक कवि थे जिन्होंने अपनी रचनाओं से हिंदी साहित्य को बदल दिया था और
01 फरवरी 2019
08 फरवरी 2019
जिस प्रकार पौधा लगाने से पहले बीज आरोपित किया जाता है उसी प्रकार के युवा लड़के-लड़कियों के मन में दाम्पत्य जीवन के संबंधों के भावों को पैदा करने के लिए विवाह पूर्व ही अनेक संस्कार आरोपित किए जाते हैं। यद्यपि वे सारे के सारे विवाह के ही अंग माने जाते हैं। जैसे-हल्दी चढ़ाना, तैल चढ़ाना, कन्या पूजन, गाना ब
08 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
एक राजा की दो पत्नियां थी। प्रथम पत्नि सांवली थी वह राजा को बिल्कुल पंसद नहीं थी वहीं दूसरी पत्नि बहुत सुंदर देह व आकर्षक थी। राजा हमेशा दूसरी पत्नि को अपने साथ रखता था। वह उसकी अचूक एवं आकर्षक सुन्दरता में डूबा रहता था प्रथम पत्नि सुशील एवं बहुत गुण थी लेकिन उसका रंग सावंला होने के कारण राजा उसे पस
09 फरवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x