कई बीमारियों को जड़ से खत्म करता है भुजंगासन

11 फरवरी 2019   |  मिताली जैन   (71 बार पढ़ा जा चुका है)

कई बीमारियों को जड़ से खत्म करता है भुजंगासन

पिछले कुछ समय से योग के महत्व को पूरी दुनिया ने समझा है और यही कारण है कि कई तरह की शारीरिक व मानसिक समस्याओं से राहत पाने के लिए अब लोग योग का सहारा लेने लगे हैं। योग में ऐसे कई आसनों के बारे में बताया गया है जो पूरे स्वास्थ्य का बखूबी ख्याल रखते हैं। इन्हीं में से एक है भुजंगासन। इस आसन के अभ्यास के दौरान शरीर एक सर्प की भांति दिखाई देता है। यह एक बेहतरीन योगासन माना गया है क्योंकि इसके अभ्यास से कई तरह की शारीरिक समस्याओं से आसानी से निजात पाई जा सकती है। तो चलिए जानते हैं भुजंगासन करने के तरीके और उससे होने वाले लाभों के बारे में-


करने की विधि-


भुंजगासन का अभ्यास करने के लिए सबसे पहले किसी साफ हवादार जगह पर आसन बछा कर पेट के बल लेट जाएं। अब दोनों परों को अच्छी तरह से लंबा कर के फैला दें तथा ठोड़ी को जमीन पर लगा दें। इसके बाद दोनों कुहनिया दोनों तरफ की पसलियों से सटी हुयी रख कर, दोनों हाथों की हथेलियाँ जमीन पर लगा दें। इस आसन के अभ्यास के दौरान एक बात का हमेशा ख्याल रखें कि दोनों हाथों के पंजे, हमेशा दोनों कंधों के ठीक नीचे जमीन पर लगे होने चाहिए।

अब अपनें सिर को भी जमीन से लगा दें और फिर अपनी दोनों आँखें बंद कर के सांस शरीर के अंदर भरते हुए धीरे धीरे ठोड़ी को ऊपर उठाएँ। उसके बाद गर्दन को ऊपर आकाश की तरफ उठाएँ। फिर अपनी छाती को धीरे धीरे ऊपर उठाएँ और उसके बाद अपने पेट के भाग को धीरे धीरे ऊपर उठा लें।

अब आगे, गर्दन को ऊपर की ओर ले जाते हुए पीठ को पीछे की ओर जुकाना है (कमान की तरह )। ऊपर उठनें के लिए शरीर से जोर लगाएं, हाथों पर हो सके उतना कम बल लगाएं। ध्यान में रखें कि इस दौरान आपके पैर न उठें। बस आपको शरीर के अग्र भाग को ऊपर उठने का प्रयत्न करना है।

यह आसन करते समय सांस सामान्य गति से अंदर लें तथा बाहर छोड़े। अब कुछ क्षण इसी अवस्था में रूके। इसके बाद धीरे-धीरे ऊपर उठाए शरीर को नीचे की ओर ले जाना शुरू करें और प्रारंभिक अवस्था में लौट आए। अब कुछ क्षण रूके, उसके बाद फिर से यही अभ्यास दोहराएं। अगर आप भुजंगासन कर रहे हैं तो अंत में शवासन का अभ्यास करना भी बेहद फायदेमंद रहेगा।


रखें सावधानी


वैसे तो यह आसन बेहद लाभदायक माना गया है, लेकिन इसका सर्वाधिक लाभ उठाने के लिए कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। सबसे पहले तो कभी भी इस आसन को करते समय एकदम से पीछे की तरफ बहुत अधिक न झुकें। इससे आपकी छाती या पीठ की माँस-पेशियों में खिंचाव आ सकता है तथा बाँहों और कंधों की पेशियों में भी बल पड़ सकता है जिससे दर्द पैदा होने की संभावना बढ़ती है। वहीं जिन लोगों को पेट में किसी प्रकार की समस्या या पीठ में दर्द हो, वह इस आसन का अभ्यास न करें। अगर कर रहे हैं तो किसी योगा विशेषज्ञ की सलाह व उनकी देखरेख में ही करें।


लाभ ही लाभ


  1. भुजंगासन करने से शरीर को कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। सबसे पहले तो यह बढ़े हुए पेट को कम करने में बेहद प्रभावी है। जो लोग अपने पेट पर जमा चर्बी से परेशान हैं, उन्हें इस आसन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए।
  2. यह आसन पेट के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यह आसन पाचन तंत्र को बेहतर तरीके से काम करने के लिए प्रेरित करता है। अगर इसका नियमित रूप से अभ्यास किया जाए तो पेट की कई परेशानियां जैसे कब्ज, गैस, बवासीर आदि को आसानी से दूर किया जा सकता है। इतना ही नहीं, महिलाओं के लिए भी यह बेहद लाभदायक माना गया है। इसके अभ्यास से महिलाओं को मासिक चक्र से जुड़ी समस्याओं में लाभ मिलता है तथा प्रजनन सम्बन्धी रोग भी दूर हो जाते हैं।
  3. भुजंग आसन रीढ़ की हड्डी के लिए भी बेहद लाभदायक है। नित्य इसका अभ्यास करने से पीठ की हड्डी मजबूत व लचकदार बन जाती है।
  4. भुजंगासन अस्थमा के रोगियों के लिए भी बेहद प्रभावी है। अगर अस्थमा के रोगी इसका अभ्यास करें तो श्वसन क्रिया तो बेहतर होती है ही, साथ ही गले में होने वाली सभी समस्याएं आसानी से दूर हो जाती है। दूसरे शब्दों में, यह आसन फेफड़ों की शुद्धि करता है।
  5. आयु बढ़ने के कारण से पेट के नीचे के हिस्से की पेशियां ढीली होने लगती हैं लेकिन इस आसन की मदद से पेशियों को ढीला होने से रोकने में सहायता मिलती है।
  6. यह आसन मस्तिष्क के लिए भी काफी अच्छा माना गया है। इसके अभ्यास से मस्तिष्क से निकलने वाले ज्ञानतंतु बलवान बनते है।
  7. ज्ब इस आसन का अभ्यास किया जाता है तो पूरे शरीर में एक खिंचाव आता है। इसी खिंचाव के कारण यह आसन शरीर को सुडौल एवं खूबसूरत बनाने में मदद करता है।
  8. जो व्यक्ति मधुमेह ग्रस्त हैं, उन्हें भी इस आसन का अभ्यास अवश्य करना चाहिए। दरअसल, भुजंगासन पैंक्रियाज को सक्रिय करता है और सही मात्रा में इन्सुलिन के बनने में मदद करता है। वहीं यह आसन थाइरॉइड एवं पैराथाइरॉइड ग्रंथियों को सक्रिय करने में मददगार है। जिसके कारण थायराॅइड ग्रस्त व्यक्ति को भी इस आसन का अभ्यास करने की सलाह दी जाती है।

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