babri masjid: आइए जानते हैं कि क्या है बाबरी विध्वंस मामला और क्या हैं इसके तथ्य

13 फरवरी 2019   |  अंकिशा मिश्रा   (269 बार पढ़ा जा चुका है)

babri masjid: आइए जानते हैं कि क्या है बाबरी विध्वंस मामला और क्या हैं इसके तथ्य


6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद (babri masjid) के विध्वंस किया गया। जिसके बाद से वर्तमान समय में इस मामले की सुनवाई चल रही है। चूंकि Babri Masjid Case काफी समय से कोर्ट में है जिसके चलते सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर रोज सुनवाई करने पर हामी भरी। जिस तरीके से सुप्रीम कोर्ट में लगातार इस मामले पर सुनवाई चल रही है ऐसे में ये उम्मीद की जा सकती है कि 2019 में बाबरी मस्जिद (babri masjid) विध्वंस मामले पर कोर्ट का फैसला आ सकता है।


आइए जानते हैं कि क्या है बाबरी विध्वंस मामला (babri masjid) और क्या हैं इसके तथ्य

इस विषय को न्याय की दृष्टि से सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के नज़रिए के अनुरुप लिखा गया है।


बाबरी मस्जिद- राम जन्मभूमि विवाद 1528 से 2019


6 दिसंबर 1992 :- वो दिन जब अयोध्या की गली गली जय श्री राम के नारों से गूंज रही थी। ठीक अगले दिन यानी 7 दिसंबर 1992 को ये नारेबाजी बंद हो गयी। हालांकि ये मामला 26 सालों से सुनाई दे रहा है लेकिन बाबरी मस्जिद और राम जन्मभूमि विवाद 490 साल पुराना है।


1528:- इस सन में मुगल शासक बाबर ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया। हालांकि हिन्दू मान्यता के अनुसार यहां पर त्रेतायुग में भगवान श्री राम का जन्म हुआ था और श्रीराम का मंदिर था।


1528:- लगभग 300 सालों बाद हिन्दुओं ने आरोप लगाया कि भगवान राम का मंदिर तोड़कर यहां पर बाबरी मस्जिद बनी है। जिसके चलते दोनों धर्मों के अनुयायियों के बीच पहली बार हिंसा हुई।


1859:- ब्रिटिश सरकार ने विवादित स्थान के आंतरिक और बाहरी परिसर में तारों की बाड़ लगवाकर दोनों धर्मों के अनुयायियों को अलग अलग प्रार्थना करने की इजाज़त दी।


1885:- पूरा मामला पहली बार अदालत पहुंचा। महंत रघुबर दास ने फैजाबाद अदालत में बाबरी मस्जिद से लगे राम मंदिर के निर्माण की याचिका दायर की। उनका कहना था कि राम का जन्म यहां हुआ था, जिसके चलते उनका पूजन इसी स्थान पर होगा। गौरतलब हैकि उन्होंने मस्जिद को हटाने की बात नहीं की।


23 दिसंबर 1949:- इस दिन 50 हिंदुओं ने कथित तौर पर मस्जिद के केंद्रीय स्थल पर भगवान राम की मूर्ति रख दी। जिसके बाद हिंदूओं ने भगवान राम की पूजा शुरू कर दी। परिणाम स्वरुप मुसलमानोंं ने नमाज पढ़ना बंद कर दिया।


16 जनवरी 1950:- गोपाल सिंह विशारद ने फैजाबाद अदालत में राम लला की पूजा-अर्चना करने की विशेष इजाज़त मांगी।


5 दिसंबर 1950:- महंत परमहंस रामचद्रं दास ने हिंदू प्रार्थनाएं जारी रखने और बाबरी मस्जिद में राममूर्ति रखने के लिए मुकदमा दायर किया। साथ ही मस्जिद को ढांचा नाम दिया गया।


17 दिसंबर 1959:- निर्मोही अखाड़ा ने विवादित स्थल हस्तांतरित करने का मुकदमा दायर किया।


18 दिसंबर 1961:- उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बाबरी मस्जिद के मालिकाना हक के लिए मुकदमा दायर किया।


1984:- पहली बार विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने बाबरी मस्जिद के ताले खोलने साथ ही राम जन्म स्थान को स्वतंत्र कराने के अलावा राम मंदिर निर्माण के लिए विशाल अभियान का कार्य शुरु किया। जिसके लिए वीएचपी ने एक समीति का गठन भी किया।

1फरवरी 1986:- फैजाबाद जिला न्यायधीश ने विवादित स्थल पर हिंदूओं को पूजा करने की इजाज़त दी।

जिसके तहत ताले खोले गए। इस फैसले से गुस्साए मुसलमानों ने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी का गठन किया।


1989:- भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने वीएचपी को औपचारिक समर्थन देकर राम मंदिर निर्माण को नया जीवन दे दिया।


1 जुलाई 1989:- इस तारीख को रामलला विराजमान के नाम से पांचवा मुकदमा दायर किया गया।


9 नवंबर 1989:- तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी की सरकार ने बाबरी मस्जिद के समीप शिलान्यास की इजाज़त दी।


25 सितंबर 1990:- तत्कालीन बीजपी अध्यक्ष लाल कृष्ण आडवाणी ने गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक राम रथ यात्रा निकाली। जिसके बाद सांप्रदायिक दंगे हुए ।


नवंबर 1990:- आडवाणी को बिहार के समस्तीपुर से रथ यात्रा निकालने के लिए गिरफ्तार कर लिया जाता है।

जिसके बाद बीजेपी तत्कालीन वीपी सिंह की सरकार से समर्थन वापस ले लेती है।


इसे भी पढ़े:-

वकील, लॉयर, बैरिस्टर, एटॉर्नी जनरल, सॉलिसिटर जनरल में जानिए क्या है मुख्य अन्तर ?


अक्टूबर 1991:- उत्तर प्रदेश में कल्याण सिंह की सरकार ने बाबरी मस्जिद के आस पास की 2.77 एकड़ जमीन को अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया।


6 दिसंबर 1992:- हजारों की संख्या में कार सेवक अयोध्या पहुंचे और मस्जिद को गिरा दिया। जिसके बाद सामप्रदायिक दंगे हुए। अस्थाई रुप से राम मंदिर भी बनाया गया।


16 दिसंबर 1992:- मस्जिद की तोड़ फोड़ के लिए जिम्मेदार स्थितियों का पता लगाने के लिए लिब्रहान आयोग का गठन किया जाता है।


जनवरी 2002:- प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यलय में अयोध्या विभाग शुरु किया । जिसका उद्देश्य मुसलमानों और हिंदुओं के बीच बातचीत से विवाद सुलझाना था।


अप्रैल 2002:- विवादित स्थल के मालिकाना हक को लेकर न्यायलय के तीन जजों की पीठ ने न्याय प्रक्रिया शुरू की ।


मार्च-अगस्त 2003:- इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण को आदेश दिया कि विवादित स्थल पर खुदाई की जाए। पुरातत्व विभाग का कहना है कि उसे मंदिर के अवशेषों के प्रमाण मिलें हैं। मुसलमानों में इसे लेकर अलग अलग मत हैं।

सितंबर 2003:- एक अदालत ने फैसला दिया कि बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले को उकसाने वाले सात हिंदू नेताओं को सुनवाई के लिए बुलाया जाए।

जुलाई 2009:- लिब्रहान आयोग ने 17 साल बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को रिपोर्ट सौंपी।


28 सितंबर 2010:- सर्वोच्च न्यायलय ने इलाहाबाद उच्च न्यायलय को विवादित स्थल मामले में फैसला देने से रोकने वाली याचिका को खारिज करते हुए फैसले का मार्ग प्रशस्त किया।


30 सितंबर 2010:- इलाहाबाद उच्च न्यायलय की लखनऊ पीठ ने फैसला सुनाते हुए विवादित भूमि को तीन हिस्सों में बांटा, जिसमें एक हिस्सा राम मंदिर, एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड और एक हिस्सा निर्मोही अखाड़ा को दिया गया।


9 मई 2011:- सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद न्यायलय के फैसले पर रोक लगा दी।


जुलाई 2016:- बाबरी मामले के सबसे उम्रदराज वादी हाशिम अंसारी का निधन हो गया ।


21 मार्च 2017:- सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद सुलझाने की बात कही।

19 अप्रैल 2017:- सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद गिराए जाने के मामले में लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती समेत आरएसएस के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक केस चलाने के आदेस दिए।


5 दिसंबर 2017:- सुप्रीम कोर्ट में मामले को लेकर सुनवाई शुरु हुई ।

29 सितंबर 2018:- बाबरी मस्जिद मामले में रोज सुनवाई चल रही है



इसे भी पढ़े:-

ज़िंदगी पर बेहतरीन 17 शायरी



अगला लेख: एक स्पून टेस्ट से जाने घर पर ही कि आप कितने स्वस्थ हैं........



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
12 फरवरी 2019
Valentine`s week चल रहा है। 12 फरवरी को हग डे और फिर 13 फरवरी को किस डे और उसके बाद 14 फरवरी को valentine day मनाया जाता है। इस valenine`s week में हम अपने पार्टनर को ROSE DAY पर गुलाब देकर, PROPOSE DAY पर प्रपोज कर तो PROMISE DAY पर वादा करके तो वहीं TEDDY DAY पर टेडीबियर, CHOCOLATE DAY पर चॉक
12 फरवरी 2019
11 फरवरी 2019
11 फरवरी यानी प्रोमिस डे इस दिन अपने पार्टनर को जिंदगी भर साथ रहने का वादा किया जाता है। ऐसे में अगर ये प्रोमिस लंबे चौड़े भाषण में किया जाए तो बोरिंग हो सकता है। ऐसे में अगर आप चाहते हैं कि कम शब्दों में आप ज्यादा से ज्यादा बात कहेें त
11 फरवरी 2019
11 फरवरी 2019
Thought in Hindi one line: हम अपनी जिंदगी में कई बार हार और जीत का मुंह देखते हैं। जब भी हमें जीत का स्वाद देखने को मिलता है तो हम सिर्फ ख़ुशी में मग्न रहते हैें लेकिन अगर हार से दो चार होना पड़ जाए तो कोई विक्लप नहीं सूझता। अक्सर संघर्ष के दिनों में हम इतना ज्यादा दु
11 फरवरी 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x