सुबह की चाय

16 फरवरी 2019   |  श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव   (75 बार पढ़ा जा चुका है)

सुबह की चाय

सुशीला जो की एक मध्यम परिवार की महिला हैं॰॰॰॰॰ उसका पति मोहन गावों के बाहर एक मील में सुबह 10 बजे से रात को 11 बजे तक की नौकरी करता हैं. सुशीला और मोहन के अलावा घर में बापूजी भी साथ रहते हैं. तीनो में आपस में बड़ा लगाव और प्रेम है. ये छोटा सा परिवार बड़ी ख़ुशी से अपनी ज़िंदगी जीता है. बापूजी भी आपने आप में बड़े सतुष्ट व्यक्ति हैं, मगर हैं बड़े चाय के शौक़ीन.


मोहन को घर आते-आते काफी रात हो जाने के कारण सुशीला रसोईघर का सामान दो दिन पहले ही लाने को कह देना उचित समझती हैं । जिससे मोहन सुबह या जब भी उसके पास समय हो, वो सामान लेके रख दे. क्यूंकि घर की और सुशीला की जरुरत की चीज़े न भी हों तो वो काम चला लेती है मगर बापू जी को भले एक समय का भोजन देर से मिले पर सुबह-सुबह की चाय तो उनको समय पर चाहिए.


गाँव का परिवार है ऐसे में बहू घर से बाहर जाकर कोई सामान लाती है तो गाँव में दस तरह की बातें तो होती है और फिर बापूजी भी भला किसी पडोसी से समान ले ये तो इनके स्वभिमान के परे ही हैं ।


चीनी कम होते देख सुशीला ने अपने पति को चीनी लेन के लिए दो दिन पहले से कह कर रखा पर मोहन की नौकरी से आते-आते दुकाने ही बंद हो जाती है॰॰॰ गाँव की वहीं चार- पाँच दुकाने.


'चीनी ले आये क्या..सुबह बापूजी को चाय बनानी हैं?' सुशीला ने मोहन को आते ही बोला, सुशीला जानती थी की मोहन आज भी चीनी लेकर नहीं आये होंगे, लेकिन ये उसका याद दिलाने का बहाना था.


'अरे मैं क्या करू दुकाने बंद हो गई ॰॰॰॰' मोहन ने आँखें चुराते हुए सुशीला को जवाब दिया.

'अब क्या करें'-सुशीला बोली.


'करना क्या हैं, सुबह थोड़ी डॉट खा लेना...' मोहन सुशीला से बोला.


'अरे वाह ! मैं क्यों डॉट सुनु,' सुशीला पलटते हुए बोली, 'मैंने तो दो रोज पहले से ही आपको बता दिया था की घर में चीनी लाना हैं, अब आप ही सब सभालना बड़े आये डांट खा लेना...' कहते हुए सुशीला किचन में चली गई.


'अच्छा -अच्छा सुबह देखते हैं ॰॰॰' मोहन ने झट से बोला और दोनों खाना खाने की लिए तैयारी करने लगे.


सुबह हुई, बापूजी उठे स्नान आदि कर के तैयार हो गए और सुशीला को आवाज़ लगाई की.. 'अरे अख़बार के साथ चाय कहा हैं ॰॰'

बहु सुशीला अपने तेज़ तर्रार दिमाग से तरकीब लगाई और थोड़ा झिझकते हुए बोली- '॰॰॰बापूजी, दूध बिल्ली पी गयी,'


'....तो मोहन कहाँ है उससे बोल की दूध और ले आये.,' बापू जी ने अखबार का पन्ना पलटते हुए सुशीला को बोला.


'वो... बापूजी ये गए थे, तब तक पूरा दूध बिक चूका था, लेकिन बापू जी आप चिंता मत करो बस थोड़ी देर में ही दुकान खुलते से ही दूध मांगा कर चाय बना दूँगी'


फिर क्या बापू जी को चाय ना मिलने पर बापूजी का मूड ख़राब हो गया. ये बात सुशीला भी जानती थी की बापू जी का मूड अब ख़राब होने वाला है मगर वो क्या करती.


उधर बाबूजी की बड़बड़ शुरू ॰॰॰॰


इधर मोहन दुकान खुलते ही चुपके से शक्कर लेकर किचन में रख देता है. उस समय मोहन सुशीला और बापू जी सारी बातें सुन चूका था.


मोहन सुशीला को धन्यवाद देते हुए कहता हैं ॰॰'सुशीला आज तुमने बाबूजी की कहासुनी सुन कर मेरी गलती अपने सर ले ली पर अब से तुम्हारे रसोईघर की चीजें दो दिन पहले ही ला दूंगा॰॰॰॰'


अपनी मुस्कराहट को दबाते हुए सुशीला बोली - 'ठीक हैं ॰॰ठीक हैं, हटो अब मुझे बापू जी को चाय देने दो, वैसे ही बहुत देर हो चुकी है' मोहन के चेहरे पर भी एक हलकी से मुस्कान आ चुकी थी.


सुशीला ने लाकर बापूजी को चाय दी, बापूजी भी अपनी सुबह की चाय को देखते हुए सारा गुस्सा भूल गए. सुशीला, मोहन और बापूजी अपनी-अपनी 'सुबह की चाय' की चुस्कियां लेने में मस्त हो गए.

अगला लेख: घर पर गर्भावस्था की जांच (प्रेग्नेंसी टेस्ट) कैसे करे



रेणु
24 जुलाई 2019

बहुत प्यारी कहानी है अर्चना जी |

शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
06 फरवरी 2019
प्
प्रार्थना जितनी सरल होती शायद ही कुछ इतना सरल हो, मैं यहाँ पर उतने ही कम शब्दों में और इसके बारे में कहना चाहूँ की प्रार्थना जितनी निःशब्द रहे उतनी सरल और तेज प्रभाव वाली होती है। शब्दों में कमी रह सकती है मगर निःशब्द प्रार्थना बहुत कुछ कहती है।वैसे प्रार्थना निवेदन करके ऊर्जा प्राप्त करने की शक्ति
06 फरवरी 2019
08 फरवरी 2019
प्रत्येक शख्स किसी खास मकसद से इस दुनिया में आया है, यदि आप सिंगल हैं तो इस का तात्पर्य यह है कि संभवतया अकेले रह कर ही आप अपना मकसद पा सकती हैं। तभी आप को सोच और परिस्थितियां इस के अनुरूप हैं यह भी हो सकता है कि आने वाले समय में आप स्वयं शादी के बंधन में बंध जाएं। मगर जब तक सिंगल हैं अपने इस स्टेटस
08 फरवरी 2019
01 मार्च 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
01 मार्च 2019
09 फरवरी 2019
जैसे छींकने पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। छींकते समय जैसे आंखे बंद हो जाती है वैसे ही महिलाएं भी चरमसुख के समय चाह कर भी आंखे नहीं खोल पातीं। दरअसल इस वक्त उनकी ग्लैंड से तरल स्त्रावित होता है जो दिमाग को आंखें बंद करने के लिए संदेश भेजता है।लवमेकिंग, दो विपर‍ित लिंग के बीच न सिर्फ एक इंटीमेसी बल्क
09 फरवरी 2019
21 फरवरी 2019
'तुमको तो कोई चिंता ही नहीं है बस अपने चार पंचों को लेके बैठ जाते हो गपशप करने, थोड़ा घर की तरफ भी देख लिया करो, घर में जवान बेटी बैठी हुई है, लोग बातें करने लगे हैं तरह-तरह की। मगर..तुम... तुमको क्या....' नंदिनी की मां ने मुंशी जी के घर आते ही उन पर लगभग रोज की तरह बरसना शुरू कर दिया। करती भी क्या ब
21 फरवरी 2019
15 फरवरी 2019
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedContent> <w:AlwaysShowPlaceh
15 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
एक राजा की दो पत्नियां थी। प्रथम पत्नि सांवली थी वह राजा को बिल्कुल पंसद नहीं थी वहीं दूसरी पत्नि बहुत सुंदर देह व आकर्षक थी। राजा हमेशा दूसरी पत्नि को अपने साथ रखता था। वह उसकी अचूक एवं आकर्षक सुन्दरता में डूबा रहता था प्रथम पत्नि सुशील एवं बहुत गुण थी लेकिन उसका रंग सावंला होने के कारण राजा उसे पस
09 फरवरी 2019
06 फरवरी 2019
मन्वन्तर एक संस्कॄत शब्द है, जिसका संधि-विच्छेद करने पर = मनु+अन्तर मिलता है। इसका अर्थ है मनु की आयु. प्रत्येक मन्वन्तर एक विशेष मनु द्वारा रचित एवं शासित होता है, जिन्हें ब्रह्मा द्वारा सॄजित किया जाता है। मनु विश्व की और सभी प्राणियों की उत्पत्ति करते हैं, जो कि उनकी आयु की अवधि तक बनती और चलती र
06 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
मौन की महिमा अपरंपार है, इसके महत्व को शब्दों के जरिए अभिव्यक्त करना संभव नहीं है।प्रकृति में सदैव मौन का साम्राज्य रहता है। पुष्प वाटिका से हमें कोई पुकारता नहीं, पर हम अनायास ही उस ओर खिंचते चले जाते हैं। बड़े से बड़े वृक्षों से लदे सघन वन भी मौन रहकर ही अपनी सुषमा से सारी वसुधा को सुशोभित करते है
09 फरवरी 2019
05 फरवरी 2019
तुलसी दास कहते हैं- 'भाव-अभाव, अनख-आलसहुं, नाम जपत मंगल दिषी होहुं।' भाव से, अभाव से, बेमन से या आलस से, और तो और, यदि भूल से भी भगवान के नाम का स्मरण कर लो तो दसों दिशाओं में मंगल होता है। भगवान स्वयं कहते हैं, भाव का भूखा हूं मैं, और भाव ही इक सार है, भाव बिन सर्वस्व भी दें तो मुझे स्वीकार नहीं! ऐ
05 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
बजरंग बाण. जिस भी घर,परिवार में बजरंग बाण का नियमित पाठ,अनुष्ठान होता है वहां दुर्भाग्य, दारिद्रय,भूत-प्रेत का प्रकोप और असाध्य रोग,शारीरिक कष्ट कभी नहीं सताते। बजरंग बाण में पूरी श्रद्धा रखने और निष्ठापूर्वक उसके बार बार दोहराने से हमारे मन में हनुमान जी की शक्तियां जमने लगती हैं। शक्ति के विचारों
09 फरवरी 2019
23 फरवरी 2019
शा
<!--[if gte mso 9]><xml> <w:WordDocument> <w:View>Normal</w:View> <w:Zoom>0</w:Zoom> <w:TrackMoves/> <w:TrackFormatting/> <w:PunctuationKerning/> <w:ValidateAgainstSchemas/> <w:SaveIfXMLInvalid>false</w:SaveIfXMLInvalid> <w:IgnoreMixedContent>false</w:IgnoreMixedC
23 फरवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x