नंदिनी...

21 फरवरी 2019   |  श्रीमती अर्चना श्रीवास्तव   (71 बार पढ़ा जा चुका है)

नंदिनी...

'तुमको तो कोई चिंता ही नहीं है बस अपने चार पंचों को लेके बैठ जाते हो गपशप करने, थोड़ा घर की तरफ भी देख लिया करो, घर में जवान बेटी बैठी हुई है, लोग बातें करने लगे हैं तरह-तरह की। मगर..तुम... तुमको क्या....' नंदिनी की मां ने मुंशी जी के घर आते ही उन पर लगभग रोज की तरह बरसना शुरू कर दिया। करती भी क्या बेटी का भरा पूरा शरीर देखकर उसे भी चिंता खायी जा रही थी। मगर ऐसा नहीं था कि मुंशी जी को उसकी चिंता नहीं है वो भी जगह-जगह जाकर एक अच्छा सा वर अपनी लाड़ली बेटी के लिए तलाश करते फिरते हैं गांव भर में। मुंशी की काफी इज्जत थी गांव भर में, सब सम्मान से उन्हें देखते थे मगर मुंशी ईमानदार होने के कारण जिंदगी भर कुछ पैसा-धेला जोड़ न पाये।


नंदिनी...एक पड़ी-लिखी और गृहकार्य में दक्ष परिपूर्ण थी। नंदिनी की शादी की चिंता मुंशी जी को उसके बचपन के दिनों से ही सताती रही है। वो जानते थे कि लड़की के जन्म के साथ-साथ उसकी शादी की चिंता व दहेज प्रथा चलन की प्रथा के वजह से उन्हें उसके विवाह के लिए काफी दिक्कत आ सकती है और कितना भी अमीर आदमी हो लड़की की शादी के लिए हर माता-पिता चिन्ता में रहते है। उस पर बेटी का कद से छोटा होना ये एक पिता के लिए बहुत बड़ी समस्या होती है। एक पिता के लिए यदि बेटी की कद-काठी न बड़े तो ये चिन्ता कई गुना बढ़ जाती है।


नंदिनी की उम्र भी अब शादी लायक हो चुकी थी पर उसकी कदकाठी से वह बच्ची ही दिखाई देती थी। उसकी मां को भी ये चिंता खाये जा रही थी पर वह तो अपने पति से कह कर अपना दिल को हल्का कर लेती पर मुन्शी जी जो कि एक सीधे-साथे और ईमानदार व्यक्ति थे वो कहां से लाते इतना पैसा कि उनकी नाटी बेटी को कोई अपना वर दे देता। कुछ लोगों ने तो कहा कि भाई अगर बेटी की कद काठी कम है तो सोने की कुछ सिक्कों को अपनी बेटी के सर पर रख दो वह अपने आप विदा हो जायेगी.... पर न तो मुंशी के पास इतना दहेज देने को पैसे थे और न ही वह अपनी बेटी को किसी ऐसे व्यक्ति के साथ बांधना चाहते थे जो कि लालची या नाकारा हो।

बेटी नंदिनी भी अपने माता-पिता के इस दु:ख से दुखी रहती की कि न जाने मेरे कर्मो की सजा मेरे माता-पिता को क्यों मिल रही है नंदिनी में नाटे कद के अलावा कोई और खामी नहीं थी।

कुछ दिन बाद...


'जल्दी से खाना लगाओ मुझे बहुत भूख लगी है आज पूरा दिन हो गया कुछ खाया ही नहीं...' मुंशी जी घर पर आते ही नंदिनी की मां से कहा।


'क्यों, क्या हुआ सुबह ही तो बोल रही थी खाना खा लो मगर तुमको तो पता कहां जाना था जल्दी'...नंदिनी की मां खाना परसते हुए बोली।


मुंशी जी - 'अरे, जल्दी आओ तुम्हें एक खुशखबरी सुनाता हूं'...


नंदिनी की मां -' क्या हुआ, खाना तो परोसने दो'...


मुंशी जी - 'अरे रहने दो तुम तो, आज तो भूख भी परेशान नहीं कर सकती मुझे'...


'अरे बस आई...हां अब बोलो क्या बोल रहे थे'... नंदिनी की मां खाना मुंशी जी को खाना देते हुए


'नंदनी की शादी पक्की कर के आ रहा हूँ, बहुत अच्छे लोग हैं,'


'अच्छा सच, क्या करता है लड़का, घर वाले कैसे हैं, कितने भी बहन है, अच्छा खासा कमाता होगा, नौकरी करता है या खुद का कुछ करता है....'


'अरे.... अरे, भागवान रुको तो, मुझे भी तो बोलने दो। तुम तो बस बोलती ही जा रही हो' मुंशी ने नंदनी की माँ को बीच मे रोकते हुए बोला।

'अरे क्या बताऊँ तुम्हे लड़के का बाप जौहरी है अच्छी बड़ी दुकान है बीच बाजार में, लड़का भी वाहन बैठता है आज नही तो कल वो दुकान उसकी ही होगी। मैने जब बिटिया का फोटो दिखाया तो लड़के बाप एक दम राजी हो गया। लड़का भी मान जाएगा। लड़का तो सीधा साधा है पूरा बाप का आज्ञाकारी है। और होना भी चाइये, आखिर इतनी बड़ी दुकान जो चलता है बाप उसका।


'मगर तुमने नंदनी के बारे में सब बोल दिया। क्या वो मान गए।'


'हाँ हाँ बोल दिया, उनको कोई समस्या नही है उन्हें तो बस सुशील और आज्ञाकारी और घर के काम काज में निपुण बधू चाइये। अरे उन्होंने तो विवाह की तारीख भी निकलवा दी। इश्लिये तो मुझे आने में देर हो गई।'

'ये तो बड़ी अच्छी बात है ईश्वर की कृपा है हम पर लड़कीं के तो भाग्य खुल गए।'


नंदनी ये सब अंदर अपने कमरे से सुन रही थी, उसे लग रहा था कि इतने अच्छे लोग कैसे मिल गए, पैसे वाले होने के बाबजूद मुझसे शादी क्यों करना चाहते है। और मेरे प्यार का क्या होगा।


क्या थी नंदनी की चिंता, उसका प्यार या उसका बिता हुआ कल जानेगे अगले भाग में....


नंदिनी...

अगला लेख: घर पर गर्भावस्था की जांच (प्रेग्नेंसी टेस्ट) कैसे करे



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
09 फरवरी 2019
एक राजा की दो पत्नियां थी। प्रथम पत्नि सांवली थी वह राजा को बिल्कुल पंसद नहीं थी वहीं दूसरी पत्नि बहुत सुंदर देह व आकर्षक थी। राजा हमेशा दूसरी पत्नि को अपने साथ रखता था। वह उसकी अचूक एवं आकर्षक सुन्दरता में डूबा रहता था प्रथम पत्नि सुशील एवं बहुत गुण थी लेकिन उसका रंग सावंला होने के कारण राजा उसे पस
09 फरवरी 2019
08 फरवरी 2019
प्रत्येक शख्स किसी खास मकसद से इस दुनिया में आया है, यदि आप सिंगल हैं तो इस का तात्पर्य यह है कि संभवतया अकेले रह कर ही आप अपना मकसद पा सकती हैं। तभी आप को सोच और परिस्थितियां इस के अनुरूप हैं यह भी हो सकता है कि आने वाले समय में आप स्वयं शादी के बंधन में बंध जाएं। मगर जब तक सिंगल हैं अपने इस स्टेटस
08 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन (एआईएम) के तहत अटल टिंकरिंग लैब (एटीएल) की स्‍थापना की इसका क्या काम है कृपया बताएं.
09 फरवरी 2019
08 फरवरी 2019
जिस प्रकार पौधा लगाने से पहले बीज आरोपित किया जाता है उसी प्रकार के युवा लड़के-लड़कियों के मन में दाम्पत्य जीवन के संबंधों के भावों को पैदा करने के लिए विवाह पूर्व ही अनेक संस्कार आरोपित किए जाते हैं। यद्यपि वे सारे के सारे विवाह के ही अंग माने जाते हैं। जैसे-हल्दी चढ़ाना, तैल चढ़ाना, कन्या पूजन, गाना ब
08 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
नींद में कुछ लोग बड़बड़ाने लगते हैं जिससे ना सिर्फ उनकी नींद टूट जाती है बल्कि कमरे में मौजूद दूसरे लोग भी परेशान हो जाते हैं। नींद में बड़बड़ाना कोई बीमारी नही है लेकिन ये इससे पता चलता है कि आपकी सेहत कुछ गड़बड़ है।क्‍यों बड़बड़ाते हैं नींद में लोग?नींद में बोलने को बड़बड़ा कहते हैं क्योंकि जब आप
09 फरवरी 2019
08 फरवरी 2019
जिस प्रकार पौधा लगाने से पहले बीज आरोपित किया जाता है उसी प्रकार के युवा लड़के-लड़कियों के मन में दाम्पत्य जीवन के संबंधों के भावों को पैदा करने के लिए विवाह पूर्व ही अनेक संस्कार आरोपित किए जाते हैं। यद्यपि वे सारे के सारे विवाह के ही अंग माने जाते हैं। जैसे-हल्दी चढ़ाना, तैल चढ़ाना, कन्या पूजन, गाना ब
08 फरवरी 2019
16 फरवरी 2019
सुशीला जो की एक मध्यम परिवार की महिला हैं॰॰॰॰॰ उसका पति मोहन गावों के बाहर एक मील में सुबह 10 बजे से रात को 11 बजे तक की नौकरी करता हैं. सुशीला और मोहन के अलावा घर में बापूजी भी साथ रहते हैं. तीनो में आपस में बड़ा लगाव और प्रेम है. ये छोटा सा परिवार बड़ी ख़ुशी से अपनी ज़िंदगी जीता है. बापूजी भी आपने आप
16 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
एक राजा की दो पत्नियां थी। प्रथम पत्नि सांवली थी वह राजा को बिल्कुल पंसद नहीं थी वहीं दूसरी पत्नि बहुत सुंदर देह व आकर्षक थी। राजा हमेशा दूसरी पत्नि को अपने साथ रखता था। वह उसकी अचूक एवं आकर्षक सुन्दरता में डूबा रहता था प्रथम पत्नि सुशील एवं बहुत गुण थी लेकिन उसका रंग सावंला होने के कारण राजा उसे पस
09 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
जैसे छींकने पर हमारा कोई नियंत्रण नहीं है। छींकते समय जैसे आंखे बंद हो जाती है वैसे ही महिलाएं भी चरमसुख के समय चाह कर भी आंखे नहीं खोल पातीं। दरअसल इस वक्त उनकी ग्लैंड से तरल स्त्रावित होता है जो दिमाग को आंखें बंद करने के लिए संदेश भेजता है।लवमेकिंग, दो विपर‍ित लिंग के बीच न सिर्फ एक इंटीमेसी बल्क
09 फरवरी 2019
09 फरवरी 2019
मौन की महिमा अपरंपार है, इसके महत्व को शब्दों के जरिए अभिव्यक्त करना संभव नहीं है।प्रकृति में सदैव मौन का साम्राज्य रहता है। पुष्प वाटिका से हमें कोई पुकारता नहीं, पर हम अनायास ही उस ओर खिंचते चले जाते हैं। बड़े से बड़े वृक्षों से लदे सघन वन भी मौन रहकर ही अपनी सुषमा से सारी वसुधा को सुशोभित करते है
09 फरवरी 2019
10 फरवरी 2019
आप चाहे गांव या कस्बे के मध्यवर्गीय परिवार के पढ़े-लिखे व्यक्ति हों अथवा महानगर के किसी संपन्न कुलीन परिवार के सदस्य हों या फिर सामान्य आर्थिक स्तर के कोई अधिकारी अथवा व्यापारी, इस सत्य को मन-ही-मन स्वीकार कर लें कि दाम्पत्य जीवन की सफलत
10 फरवरी 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x