सर्दी जुकाम खांसी को दूर करने के तुलसी के रामबाण नुस्खे

24 फरवरी 2019   |  सतीश कालरा   (47 बार पढ़ा जा चुका है)

तुलसी के बारे में आप जानते है । यह बुखार सर्दी, जुकाम, खाँसी मे प्रयोग की जाती है । तुलसी सर्वरोग निवारक, जीवनीय शक्तिवर्धक होती है । इसे वृंदा, वैष्णवी, विष्णु बल्लभा, श्री कृष्ण बल्लभा आदि नामो से जाना जाता है । इस औषधि की देवी की तरह पूजा की जाती है । ये सब जगह पायी जाती है । ये सुगंधित, सुन्दर व सस्ती औषधि है । तुलसी की कई जातियां पायी जाती है । जिसमे श्वेत तुलसी व कृष्ण तुलसी प्रमुख हैं ।

Tulsi ka Paudha


तुलसी कफ नाशक, दुर्गन्ध नाशक ,पाचन, अग्नि दिपन , रक्तशोधक व ज्वर को हरने वाली होती है । इसके बीज मूत्रल व शक्ति देने वाले होते हैं । इसकी पत्तियाँ ज्वर एवं विषम ज्वर मे उपयोगी हैं ।

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Tulsi ke Patte


मलेरिया के मच्छर जब तुलसी के संपर्क मे आते है तो मच्छरों पर ऐसा प्रभाव पड़ता है की मच्छर दूर भाग जाते हैं । तुलसी का पत्ता मलेरिया प्रतिरोधी होता है । इसके पत्तों के स्वरस मे पांच से दस मिलीग्राम मिर्च का चूर्ण मिलाकर दिन मे तीन बार पिये इससे मलेरिया दूर होता है ।

Tulsi ki branch


खांसी के लिए तुलसी के पत्र का सवरस 5 से 10 मिली ग्राम मे काली मिर्च का चूर्ण मिलाकर देना चाहिए इससे खांसी कम होती है । तुलसी के पत्ते मंजरी सहित 50 ग्राम मे काली मिर्च 10 ग्राम, अदरक 25 ग्राम को आधा ली. पानी मे उबाल कर क्वाथ बना ले, चौथाई बाकी रह जाने पर छोटी इलाइची के बीजो का चूर्ण व 200ग्राम चीनी मिलाकर पकाले ,एक तार की चासनी बन जाए तो छान कर रख ले । इस चासनी की 1 से 1.5 चम्मच की मात्रा बच्चों को व 2 से 4 चम्मच की मात्रा बड़ों को देने से खाँसी,श्वास, कुकुर खाँसी, काली खाँसी, को फायदा होता है ।

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तुलसी की मंजरी प्याज का रस,सौंठ और शहद मिला कर चाटने से बच्चे के दमे मे व सुखी खांसी मे फायदा होता है । श्यामा तुलसी के पत्तो के 5 से 10 ग्राम रस में दुगनी मात्रा में गाये का घी गुनगना करके मिला कर चाटने से दो तीन दिन मे न्यूमोनिया मे लाभ मिलता है ।

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