राष्ट्रधर्म :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

28 फरवरी 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (38 बार पढ़ा जा चुका है)

राष्ट्रधर्म :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस धराधाम पर भाँति - भाँति के धर्म , सम्प्रदाय एवं पंथ विद्यमान हैं जो अपने - अपने मतानुसार जीवन को दिशा देते हैं | वैसे तो मनुष्य जिस धर्म में जन्म लेता है वही उसका धर्म हो जाता है परंतु इन धर्मों के अतिरिक्त भी मनुष्य के कुछ धर्म होते हैं जिसे प्रत्येक मनुष्य को मानना चाहिए | इनको कर्तव्य धर्म भी कहा जा सकता है | कर्तव्य धर्म में तीन प्रमुख माने गये हैं :- वैयक्तिक धर्म , समाज धर्म एवं राष्ट्रधर्म | वैयक्तिक धर्म व्यक्ति के विकास एवं सुख सुविधा के लिए होता है , समाज धर्म में व्यक्ति एवं समाज को निरन्तर गतिशील बनाये रखने पर विचार किया जाता है | इन तीनों में प्रमुख है "राष्ट्रधर्म" क्योंकि राष्ट्रधर्म में व्यक्ति , समाज एवं राष्ट्र तीनों की उन्नति निहित होती है | इसलिए भिन्न - भिन्न धर्मों का पालन करने के बाद प्रत्येक मनुष्य को राष्ट्रधर्म का पालन अवश्य करना चाहिए | राष्ट्रधर्म को ही सबसे बड़ा धर्म माना जाना चाहिए , क्योंकि हमने जिस भूमि पर जन्म लिया है जिसे हम जन्मभूमि कहते हैं वह हमारी माँ के तुल्य होती है | हमारे धर्म ग्रंथों में लिखा गया है :-- "जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी" अर्थात :-;अपनी जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है | जब भी राष्ट्र के ऊपर कोई संकट आ जाए या कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए तब सभी धर्मावलंबियों को अपने धर्म की चिंता को छोड़कर के राष्ट्रधर्म का पालन करना चाहिए क्योंकि राष्ट्रधर्म से बड़ा कोई दूसरा धर्म नहीं हो सकता है | यदि राष्ट्र है तो हमारे धर्म जीवित रहेंगे और जब राष्ट्र ही नहीं रह जाएगा तो ना हम रह जाएंगे और ना ही हमारा धर्म रह जाएगा , अतः हम सब को सर्वप्रथम राष्ट्र धर्म का पालन अवश्य करना चाहिए |* *आज हमारे देश भारत में अनेक धर्म फल - फूल रहे हैं | साथ ही हमारे देश को आगे ले जाने के लिए अनेक राजनीतिक पार्टियां अपने - अपने नियमानुसार अपने धर्म एवं अपने पार्टी के नियमों का पालन करके अपना धर्म निभा रही हैं | आज दलगत राजनीति इतनी विकृत हो चुकी है कि कुछ लोग अपने दल को आगे ले जाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हो जा रहे हैं | प्राय: देखा गया है कि जब - जब देश पर संकट आया है तब - तब सभी लोगों ने आपसी वैमनस्यता को भूल कर के एकजुटता का परिचय दिया है | परंतु मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज देख रहा हूं कि जब पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ हमारी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है ऐसे समय में भी अनेक दल अपने अपने हितों को साधने में लगे हूए हैं | जबकि ऐसे में सभी देशवासियों को अपने धर्म अपने नियम एवं अपनी नीतियों को दरकिनार करके राष्ट्रधर्म का पालन करना चाहिए | राष्ट्र धर्म का पालन करते समय हृदय में एक ही विचार होना चाहिए कि :- "हम भारतवासी हैं हमारा एक ही धर्म है वह है राष्ट्रधर्म" | क्योंकि जब राष्ट्र सुरक्षित रहेगा तो हम अपने धर्म का पालन अपने दल की नीतियों का पालन कर सकेंगे | परंतु दुखद यह है कि ऐसे समय में भी कुछ लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने में लगे हैं | ऐसे लोग किसी धर्म के नहीं होते एवं दिखावे के लिए राष्ट्रधर्म एवं अपने स्वयं के धर्म का पालन करने का ढोंग करते हैं | ये ऐसे लोग होते हैं जो न तो अपनी जननी (माता) के होते हैं और न ही अपनी जन्मभूमि के | ईश्वर ऐसे लोगों को सद्बुद्धि प्रदान करे |* *राष्ट्रधर्म सभी धर्मों से ऊपर होना चाहिए और इसका पालन प्रत्येक देशवासी को हृदय से करना चाहिए |*

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