भितरघाती :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

08 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (40 बार पढ़ा जा चुका है)

भितरघाती :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*हमारा देश भारत सदैव से एक सशक्त राष्ट्र रहा है | हमारा इतिहास बताता है कि हमारे देश भारत में अनेक ऐसे सम्राट हुए हैं जिन्होंने संपूर्ण पृथ्वी पर शासन किया है | पृथ्वी ही नहीं उन्होंने स्वर्ग तक की यात्रा करके वहाँ भी इन्द्रपद को सुशोभित करके शासन किया है | हमारे देश का इतिहास बहुत ही गौरवशाली रहा है इसीलिए हमारे देश भारत को विश्वगुरु कहा जाता था | अपने ज्ञान , शौर्य एवं वैज्ञानिकता का लोहा भारत ने सम्पूर्ण विश्व में मनवा कर कीर्ति पताका फहराई है | देश के पाहरी दुशमनों को तो हमारे वीर शासकों ने परास्त कर दिया परंतु वे हार गये अपने देश में बैठे कुछ चंद गद्दारों से | धनलोलुपता के कारण कुछ चंद लोगों ने अपने धर्म एवं मान - सम्मान को तिलांजलि देकर दुशमनों के साथ मिल गये और कालांतर हमारा देश परतंत्र (गुलाम) हो गया | देश को दासता की बेड़ियों में जकड़ने में उतना साहस विदेशी आक्रांताओं का नहीं रहा जितना इन चंद भितरघातियों / गद्दारों का रहा है | पृथ्वीराज चौहान , अमरसिंह राठौर , चन्द्रशेखर आजाद की पराजय एवं मृत्यु इस पात का ज्वलंत उदाहरण है कि हम विदेशियों से न हारकर जयचंदों से हारे हैं | ये मुट्ठी भर लोग जिनका न कोई धर्म होता है और न ही ईमान अपने लोभ के वशीभूत होकर सम्पूर्ण राष्ट्र को भी बलिदान करने से नहीं चूकते है | इन्हीं ऑस्तीन के सर्पों के कारण हम एक लम्बी अवधि तक परतंत्र रहे हैं |* *आज हम स्वतंत्र राष्ट्र में साँसे ले रहे हैं | हमें स्वतंत्रता दिलाने के लिए हमारे पूर्वजों ने दुशमनों से तो लोहा लिया ही साथ अपने घर में बैठे गद्दारों को भी यमलोक पहुँचाया | आज अनेक संघर्षों के बाद हमारा देश पुन: एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ है | हम किसी भी देश को पराजित करने का साहस रखते हैं , हमारी तीनों सेनायें स्वयं में सक्षम हैं | परंतु मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" देख रहा हूँ कि आज भी कुछ चंद लोग अपने पद एवं धन के लोभ में देशविरोधी कृत्य कर रहे हैं | आज पुन: आवश्यकता है कि देश के बाहरी दुशमनों को परास्त करने के साथ ही इन ऑस्तीन के सर्पों का फन कुचला जाय | ये कुछ चंद भितरघाती पुन: देश को दासता की बेड़ियों में जकड़ने का कुचक्र करते हुए दिखाई पड़ रहे हैं | आज प्रत्येक भारतवासी को इन जहरीले सर्पों / जयचंदों की पहचान करके उनसे सावधान रहते हुए उन्हें सबक सिखाने का उपक्रम करना चाहिए , अन्यथा वह दिन दूर नहीं जब ये मुट्ठी भर लोग एक विशाल राष्ट्र को अपनी लोभ की तराजू में रखकर तोल देंगे और हम पुन: किसी आक्रान्ता के दास कहलाने लगेंगे | हमारा इतिहास रहा है कि हमने देश के सम्मान में बाधक बन रहे अपने प्रियजनों को भी बलिवेदी पर चढ़ा दिया है | आज पुन: वही समय उपस्थित हो रहा है कि जिन्हें हम अपना प्रिय जननायक मानते हैं यदि वही देशविरोधी कृत्य कर रहा हो तो उसका बलिदान (परित्याग) कर दिया जाय | यही समय की मांग के साथ देशहित में भी है |* *प्रत्येक देशवासी के लिए देश ही सर्वोपरि होना चाहिए | हमारा कर्तव्य है कि देश के लिए यदि अपनों का भी बलिदान देना पड़े तो पीछे न हटें |*

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