नीति व नियम :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

08 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (19 बार पढ़ा जा चुका है)

नीति   व नियम :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*आदिकाल से इस धराधाम का पालन राजा - महाराजाओं के द्वारा होता आया है | किसी भी राजा के सफल होने के पीछे मुख्य रहस्य होता था उसकी नीतियाँ | अनेक नीतिज्ञ सलाहकारों से घिरा राजा राजनीति , कूटनीति एवं राष्ट्रनीति पर चर्चा करके ही अपने सारे कार्य सम्पादित किया करता था | कब , किस समय , कौन सा निर्णय लेना है इसकी परख जिस राजा में होती थी वह बहुत दिनों तक शासन करता था | कोई भी राजा कब तक कितना राज्य करेगा यह उसकी नीतियों पर निर्भर होता था | इसी तथ्य को प्रमाणित करते हुए परमपूज्यपाद गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी अपनी कालजयी रचना "मानस" में लिख दिया है :- "राज कि होइ नीति बिनु जाने" अर्थात बिना नीति के ज्ञान के कोई भी शासन नहीं कर सकता , किसी भी शासक की सफलता में एक महत्त्वपूर्ण बात यह होती थी कि राजा के मंत्री / सलाहकार कैसे हैं | प्रजा द्वारा किसी विषय पर समवेत स्वर में आवाज उठाने पर राजा उस पर ध्यान तो देते थे परंतु उनकी माँग को कब , कैसे पूर्ण करना है उस उचित समय की प्रतीक्षा करके ही कार्य करने वाले शासक कभी असफल नहीं हुए | बिना उचित अवसर के एवं बिना रणनीति बनाये कोई भी कार्य करने से सफलता संदेहात्मक हो जाती है , जबकि कुशल शासक वही होता था जो उचित समय पर समुचित रणनीति के साथ किसी कार्य को सम्पादित करता था | उसकी इस कार्यकुशलता पर प्रजा तो जय जयकार करती ही थी साथ ही उसका राज्य भी सुदृढ़ एवं अभेद्य रहता था |* *आज राजशाही समाप्त हो गयी अनेक छोटे - बड़े देशों का अस्तित्व प्रकाश में आया | राजा तो नहीं रह गये परंतु जनता द्वारा चुने गये शासक देशों पर राज्य कर रहे हैं | इन शासकों ने पुरातन नीतियों का त्याग नहीं किया है और जिसने नीतिविरोध कार्य किया वे संसार के पटल से मिट गये | राजनीति , कूटनीति एवं विदेशनीति का आज भी महत्त्वपूर्ण स्थान विद्यमान है | किसी भी देश का विकास आंतरिक नीतियों पर तो निर्भर ही होता है साथ यह पड़ोसी देशों पर निर्भर करता है कि वे कैसे हैं | यदि पड़ोसी दुष्ट मिल जाता है तो आधी ऊर्जा उधर ही लगी रहती है | हमारे देश भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान की दुष्टता जगजाहिर है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" कहना चाहूँगा कि विगत १४ फरवरी को हमारे देश के जवानों पर जो आत्मघाती हमला हुआ उसके विरोध पूरे देश में उबाल आ गया , प्रत्येक व्यक्ति बदला लेने की माँग करने लगा | परंतु हमारे देश के शासकों ने संयम का परिचय दिया | एक कुशल नीतिज्ञ शासक की तरह कूटनीति एवं राजनीति का सहारा लेकर उचित समय पर उचित कार्यवाही हमारे देश की सेना व शासकों ने करके देशवासियों का दिल तो जीत ही लिया साथ ही अपनी नीतिकुशलता का परिचय भी दिया | कोई भी शासक संयम का परिचय देते हुए उचित समय पर उचित निर्णय लेकर ही कुशलतापूर्वक शासन कर सकता है | जब तक शासन में बैठे लोग नीतियों का पालन न करके मनमानी करते है तब तक कोई भी देश सफल नहीं हो सकता |* *मानव जीवन में नीतियों का विशेष स्थान है नीति निपुण होकर ही जीवन को सुचारु ढंग से जिया जा सकता है |*

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