जो बात छिपाये हो तुम होठों में कहीं ,आज नैनों को सब कहने दो न ा

10 मार्च 2019   |  आयेशा मेहता   (13 बार पढ़ा जा चुका है)

जो बात छिपाये हो तुम होठों में कहीं ,आज नैनों को सब कहने दो न ा  - शब्द (shabd.in)

जो बात छिपाए हो तुम होठों में कहीं , आज नैनों को सब कहने दो न ,

कई जन्मों से प्यासी है ये निगाहें , आज मेरी जुल्फों में ही रह लो न ा


एक लम्हा जो नहीं कटता तेरे बिन ,उम्र कैसा कटेगा तुम बिन वो साथिया ,

छोड़ दे अगर ज़िन्दगी साथ मेरा , मेरे नब्ज में साँस बन तुम ही धड़कना माहिया ा


अधूरे -अधूरे से हम दोनों है , मेरी धड़कनो पर अपना चेहरा लिख दो न ,

जो बात छिपाये हो तुम होठों में कहीं , आज नैनों को सब कहने दो न ा


दूर क्यों हो , पास आओ बैठो जरा , जो भी है दरमियाँ महसूस कर लो जरा ,

कल सफर में रहूँ या न रहूँ , तू जो कह दो तो आज हमदर्द बन जाऊ तेरा ा


खामोश हूँ मगर हलचल सी है अंदर कहीं , इस अनकहे अल्फ़ाज़ को सुन लो न ,

जो बात छिपाये हो तुम होठों में कहीं , आज नैनों को सब कहने दो न ा

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