यादों का मानसून

10 मार्च 2019   |  सौरभ शर्मा   (53 बार पढ़ा जा चुका है)

शाम को ऑफिस से घर जा रहा था कि तभी चिलचिलाती गर्मी के दरवाजे पर मानसून ने दस्तक दी। बारिश होने लगी और सड़क पर चलते लोग बचने के लिए आड़ ढूंढने लगे। मगर मुझे कुछ अलग महसूस हुआ ऐसा लगा कि जैसे इस पल को मैं पहले जी चुका हूं। फिर कुछ पल याद आए जो आज फिर से जीवंत होते लगने लगे। दोस्तों के साथ बिताए पल आँखों के सामने तैरने लगे। दोस्तों से मिलने से पहले मैं सिर्फ जिंदा था मगर अब जीवन को नई राह नए आयाम मिल गए थे।

रातों का जागकर तारों के बीच कई बार उन हसीं चेहरों को ढूंढने की कोशिश की मगर दोस्ती के वो तारे कुछ देर बाद ही जिंदगी के आसमान में लकीरें बनाते हुए एक छोर से दूसरे छोर पर जाकर गायब हो गए, टूट गए जिंदगी से कभी ना जुड़ने के लिए, मगर उन्होंनें माहौल को कुछ देर के लिए खुशनुमा जरुर बना दिया था। अब सालों बाद वक्त के समंदर में उठती लहरों ने जिंदगी के किनारे पर बने रेत के महलों को इस कदर ढहा दिया कि निशानी के नाम पर सिर्फ यादें बाकी हैं। इसी समंदर में उम्र की हवा के थपेड़ों के सहारे जिंदगी की नाव आगे बढ़ती गई और इतनी आगे निकल आई कि अब पीछे मुड़कर देखने पर समंदर के अलावा कुछ नहीं दिखता।

अब खुद कमाने लगा हूँ मगर दिल में अब वो खुशी नहीं रहती। महीने में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसे होते हैं मगर अब कोई बिना किसी बात के पार्टी नहीं मांगता। ये कोई जीत है या फिर वक्त के सामने मेरी हार? अब किसी पल में बचपन की मासूमियत नहीं है, किसी फूल में दोस्ती की महक नहीं है और हवा के झोंके में चाहत का एहसास नहीं है। आज सिर पर जवानी की छतरी है जिसने बचपन की मासूमियत भरी बूँदों से हमें भीगने से बचा रखा है। आज मेरे पास करने के लिए दो ही काम हैं उम्मीद और इंतजार। उन पलों के लिए जो कभी वापस नहीं आ सकते। मगर ये तो एक ऐसी हार है जिसका सामना न चाहते हुए भी हर शख्स को अपनी जिंदगी में करना ही पड़ता है।

तभी अचानक सड़क पर भरे पानी की छींटें कपड़ों पर पड़ी। मैंने देखा कुछ बच्चे साईकिल चलाते हुए बारिश का मजा ले रहे थे। उन्हीं की साईकिल से छींटें मुझ पर पड़ी थी। उनमें से एक ने रुककर ‘‘सॉरी भैया’’ कहा लेकिन मैं मुस्कुराने के अलावा कुछ ना कर सका। क्यों मैं उनसे ये मस्ती भरे पल छीन लूं जिनका लुत्फ मैंने भी बचपन में उठाया था। ये सोचकर मैं भी आड़ से निकलकर बारिश की बूँदों का मजा लेने लगा। आज कई बारिशें बीतने के बाद सब के सब जिंदगी के चौराहों पर बिछड़ते चले गए कभी ना मिलने के लिए। मगर दुनिया में सब कुछ वैसे ही चलता रहा है और चलता रहेगा।


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