शायरी

11 मार्च 2019   |  आयेशा मेहता   (98 बार पढ़ा जा चुका है)

शायरी

मुझे देवी कहलाने का शौक नहीं , मुझे इंसान ही रहने दो ,

मत जकड़ो मुझे बेड़ियों में , मुझे आज़ाद ही रहने दो ,

नहीं चाहिए मुझे पल दो पल का दिखावटी सम्मान ,

कुछ देना ही है तो मुझे मेरा आसमान दे दो ा

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