शायरी

11 मार्च 2019   |  आयेशा मेहता   (24 बार पढ़ा जा चुका है)

शायरी  - शब्द (shabd.in)

ऐ ज़िन्दगी मेरी तबाही पर इतना वक़्त न जाया कर ,

मैं तेरे हर वार को हँसते हुए सह लूँगी ,

मुझे हारने की आदत नहीं ,

और तू जीत जाए ये मैं होने नहीं दूँगी ा

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सबकी नज़रों में सबकुछ था मेरे पास , लेकिन सच कहूँ तो खोने को कुछ भी नहीं था मेरे पास ,एक रेगिस्तान सी जमीन थी ,जिसपर पौधा तो था लेकिन सब काँटेदार ,धूप की गर्दिश में मुझे मेरी ही जमीन तपती थी ,कुछ छाले थे ह्रदय पर ,जो रेत की छुअन
21 मार्च 2019
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