शायरी

11 मार्च 2019   |  आयेशा मेहता   (65 बार पढ़ा जा चुका है)

शायरी

ऐ ज़िन्दगी मेरी तबाही पर इतना वक़्त न जाया कर ,

मैं तेरे हर वार को हँसते हुए सह लूँगी ,

मुझे हारने की आदत नहीं ,

और तू जीत जाए ये मैं होने नहीं दूँगी ा

अगला लेख: सच कहूँ तो आज बाबा की मजबूरी सी हूँ



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
10 मार्च 2019
जो बात छिपाए हो तुम होठों में कहीं , आज नैनों को सब कहने दो न , कई जन्मों से प्यासी है ये निगाहें , आज मेरी जुल्फों में ही रह लो न ा एक लम्हा जो नहीं कटता तेरे बिन ,उम्र कैसा कटेगा तुम बिन वो साथिया ,छ
10 मार्च 2019
23 मार्च 2019
कैसे शक करूं..........उसकी मोहब्बत पर........जब लाइट नहीं होती...........वो मोमबत्ती जलाकर.............वीडियो कॉल करती थी............
23 मार्च 2019
11 मार्च 2019
मुझे देवी कहलाने का शौक नहीं , मुझे इंसान ही रहने दो ,मत जकड़ो मुझे बेड़ियों में , मुझे आज़ाद ही रहने दो , नहीं चाहिए मुझे पल दो पल का दिखावटी सम्मान ,कुछ देना ही है तो मुझे मेरा आसमान दे दो ा
11 मार्च 2019
05 मार्च 2019
आजकल वो लड़की बड़ी गुमसुम सी रहती है , हमेशा बेफिक्र रहने वाली ,आजकल कुछ तो फिक्र में रहती है ा अल्हड़ सी वो लड़की ,हर बात पर बेबाक हंसने वाली ,आजकल चुप-चुप सी रहती है ा आँखों में मस्ती , चेहरे पर नादानी ,खुद में ही अलमस्त रहने वाली ,हमेश
05 मार्च 2019
सम्बंधित
लोकप्रिय
आज के प्रमुख लेख
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x