मेरे देश का किसान

12 मार्च 2019   |  सौरभ शर्मा   (135 बार पढ़ा जा चुका है)

किसी ने उसे हिंदु बताया,

किसी ने कहा वो मुसलमान था,

खुद को मौत की सजा सुनाई जिसने,

वो मेरे देश का किसान था।


जिसकी उम्मीदाें से कहीं नीचा आसमान था,

मुरझाकर भी उसका हौंसला बलवान था,

जब वक्त ने भी हिम्मत और आस छोड़ दी,

उस वक्त भी वो अपने हालातों का सुल्तान था।


किस्मत उसकी हारी हुई बाजी का फरमान था,

बिना मांस की देह वाला वो जवान था,

खुशी उसकी समा गई थी धरती की दरारों में,

घर उसका बस भूख का रेगिस्तान था।


दुनिया के मेले में वो बस दुःखों का धनवान था,

दाना चुगने वाले पंछियों से उसका खेत विरान था,

नजरों से पानी को टटोलता वो बादल में,

जाने किस धुन में मस्त वो भगवान था।


खुशहाल भविष्य की आस लगाकर,

उसके आंगन में खेलता हर बच्चा नादान था,

वो बचपन नहीं समझता था बाप की मजबूरी,

परतों तलें दबी आग से वो मासूम अंजान था।


अगला लेख: जिंदगी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
06 मार्च 2019
दोस्तों हम आपके लिए बेस्ट लाइन फॉर लाइफ इन हिंदी (best line for life in hindi) में लाए है और ये उम्मीद करते है कि ये कोट्स आपके जीवन में किसी भी लक्ष्य को पाने के लिए प्रेरक के तौर पर काम करेगा। अक्सर कई
06 मार्च 2019
07 मार्च 2019
#नारी - हिम्मत कर हुंकार तू भर ले#नारी के हालात नहीं बदले,हालात अभी, जैसे थे पहले,द्रौपदी अहिल्या या हो सीता,इन सब की चीत्कार तू सुन ले। राम-कृष्ण अब ना आने वाले,अपनी रक्षा अब खुद तू कर ले,सतयुग, त्रेता, द्वापर युग बीता,कलयुग में अपनी रूप बदल ले।लक्ष्य कठिन है, फिर भी
07 मार्च 2019
15 मार्च 2019
जि
जिंदगी एक मौका है कुछ कर दिखाने का,एक बढ़िया रास्ता है खुद को आजमाने का,मत डरना कभी सामने आई मुसीबत से,कुदरत का इंसान पर किया एहसान जिंदगी है।धर्म-जात में बाँट दिया संसार को कुछ शैतानों ने,दिलों को बाँट दिया नफरत की हदों से,सहुलियत के लिए बनाई थी ये सरहदें हमने,मगर इंसान को मिली असली पहचान जिंदगी है।
15 मार्च 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x