होई पतन विकास के साथ।

15 मार्च 2019   |  जानू नागर   (11 बार पढ़ा जा चुका है)

होई पतन विकास के साथ।


नेता कहते हैं भारत का विकास हो रहा हैं।

गाँव मे नहर, तालाब, कुआँ सूख रहा हैं।

कहने को पैसा बहुत हैं सरकार के पास मे।

नेशनल हाईवे के गड्डो से धूल उड़ रहा हैं।

पुराने पुल भरभरा जाते हैं रेल की धमक से।

मौत जिसकी होती हैं वह उसकी किस्मत थी।

सरकार को यह पता हैं इसपुल से कौन आतंकी गुजरा था?

सरकार को यह मालूम नहीं था की,पुल अपनी किस्मत मे रो रहा था।

यह पुल भी अजीब था, आतंकी को निकाल कर,अपनों को निगल गया।

वन्दे भारत की रफ्तार से पटरियाँ कापती हैं,वह भी रुक जाती हैं टूंडला मे।

मेल-एक्स्प्रेस, राजधानी, शताब्दी, सुपरफास्ट, हमसफर घंटो लेट हो जाती हैं।

नेता कहते हैं भारत का विकास हो रहा हैं।

उड़ती फ्लाइटे अब जमीन मे बंध गईं हैं। यह कहकर कि उड़ाने वाले नहीं।

पता नहीं सच क्या हैं? जो मीडिया दिखा रही हैं, जनता उसी के गुन गा रही हैं।

मिडिया को आईना मानकर जनता चिल्ला रही हैं। 2019 का चुनाव आ रहा हैं।

किसको बनाऊ अपना नेता, बदन से कपड़े भी न छीन ले। पैसा गया सो गया।

रोजगार देना न देना उसका बहाना हैं,कही ऐसा न हो सबका निवाला ही छीन ले।

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