एक तपोवन है गृहस्थी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

16 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (20 बार पढ़ा जा चुका है)

एक तपोवन है गृहस्थी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों के माध्यम से प्रतिपादित किया गया है | ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ एवं सन्यास | सनातन धर्म में आश्रम व्यवस्था विशेष महत्व रखती है | यही आश्रम व्यवस्था मनुष्य के क्रमिक विकास के चार सोपान हैं , जिनमें धर्म , अर्थ , काम एवं मोक्ष आदि पुरुषार्थ चतुष्टय के समन्वय के साथ जीवन की चरम उपलब्धि को प्राप्त करने की व्यवस्थित व्यवस्था है | इन चारों आश्रमों में गृहस्थाश्रम अपना विशेष महत्त्व रखता है , क्योंकि मनुष्य का जन्म ही गृहस्थाश्रम में होता है | गृहस्थाश्रम ही जीवन की महायात्रा में परम लक्ष्य की ओर अग्रसर होने का एक विशेष सोपान है | यही एक ऐसा आश्रम है जहाँ एक सुयोग्य पीढ़ी का निर्माण होता है | गृहस्थाश्रम के लिए बनाये गये नियमों का यदि अक्षरश: पालन कर लिया जाय तो यह किसी वरदान से कम नहीं कहा जा सकता | गृहस्थाश्रम का पालन करते हुए भी आध्यात्मिक लाभ लेते हुए जीवन लक्ष्य का संधान किया जा सकता है | मनुष्य को आदर्शपथ पर अग्रसर होने के लिए संयम , सेवा एवं सहिष्णुता जैसे संदेश गृहस्थाश्रम से ही मिलते हैं | जब मनुष्य इनका पालन करने लगता है तब उसके दीवन में शान्ति , सामंजस्य एवं आनंद का स्रोत निकल पड़ता है जबकि इनके अभाव में गृहस्थी की गाड़ी लड़खड़ा जाती है |* *आज के आधुनिक युग में जहाँ अधिकतर व्यवस्थायें या तो लुप्त हो चुकी हैं या फिर लड़खड़ा रही हैं वहीं हमारे महान ऋषियों द्वारा बनाई गयी आश्रम व्यवस्था भी समाप्त प्राय हो गयी है | आज लगभग सभी जगह गृहस्थाश्रम ही बचा है शेष तीनों आश्रम लुप्त ही हो गये हैं | मनुष्य के विवाह के बाद ही उसका गृहस्थाश्रम में प्रवेश माना जाता था परमतु आज संचारक्रान्ति के युग में सोशल मीडिया का प्रयोग करके बच्ते समय से पहले ही बड़े होकर अपने कृत्यों द्वारा गृहस्थों को भी पीछे छोड़ रहे हैं | जहाँ एक ओर सोशल मीडिया के जाल में जकड़े आज के युवाओं द्वारा आपराधिक कृत्य हो रहे हैं वहीं गृहस्थाश्रम की पवित्रता भी नष्ट हो रही है | आज पति - पत्नी की मर्यादायें तार तार हो रही हैं | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज की स्थिति देखकर विचार करता हूँ कि आज संयास आश्रम भी अपनी गरिमा बचाये रखने में असफल हो रहा है | साधु - संयासियों द्वारा गृहस्थों की भाँति लज्जित करने वाले आचरण करने के अनेक समाचार लगभग प्रतिदिन समाचार पत्रों में पढ़ने को मिल रहे हैं | यह सब देखते हुए आज के मानव को अपने गृहस्थाश्रम को मजबूत करने पर विचार करना होगा | स्वयं इन्द्रिय संयम का पालन करते हुए समर्पण की भावना बनाकर वैमनस्यता मिटानी होगी | गृहस्थ से सद्गृहस्थ बनकर ही यह कार्य सम्पादित किया जा सकता है | आचरण एवं संस्कार का पुन: बीजारोपण करना होगा और यह गृहस्थाश्रम में ही सम्भव है | शायद इसीलिए गृहस्थाश्रम को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है |* *गृहस्थी एक तपोवन है , यह भोग , स्वार्थ एवं लोभ का प्रतीक न होकर मानव जीवन की पौधशाला है इसका महत्त्व तपस्वी मनोभूमि का व्यक्ति ही समझ सकता है |*

एक तपोवन है गृहस्थी :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

अगला लेख: प्रसन्नता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
08 मार्च 2019
*आदिकाल से इस धराधाम का पालन राजा - महाराजाओं के द्वारा होता आया है | किसी भी राजा के सफल होने के पीछे मुख्य रहस्य होता था उसकी नीतियाँ | अनेक नीतिज्ञ सलाहकारों से घिरा राजा राजनीति , कूटनीति एवं राष्ट्रनीति पर चर्चा करके ही अपने सारे कार्य सम्पादित किया करता था | कब , किस समय , कौन सा निर्णय लेना ह
08 मार्च 2019
16 मार्च 2019
*इस पृथ्वी पर जन्म लेने के बाद मनुष्य का परम लक्ष्य होता है भगवतप्राप्ति करना | भगवान को प्राप्त करने के लिए हमारे महापुरुषों ने अनेकानेक उपाय बताये हैं | अनेक उपाय करने के पहले आवश्यक है कि मनुष्य के हृदय में भक्ति का उदय हो क्योंकि बिना भक्ति के भगवान को प्राप्त कर पाना कठिन ही नहीं वरन् असम्भव है
16 मार्च 2019
23 मार्च 2019
*इस धरा धाम पर मनुष्य सर्वश्रेष्ठ प्राणी बनकर स्थापित हुआ | अपने विकासक्रम में मनुष्य समाज में रहकर के , सामाजिक संगठन बनाकर निरंतर प्रगति की दिशा में अग्रसर रहा | किसी भी समाज में संगठन के प्रति मनुष्य का दायित्व एवं उसकी भूमिका इस बात पर निर्भर करती है कि मनुष्य के अंदर इस जीवन रूपी उद्यान को सुग
23 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*अपने संपूर्ण जीवन काल में मनुष्य में अनेक गुणों का प्रादुर्भाव होता है | अपने गुणों के माध्यम से ही मनुष्य समाज में सम्मान या अपमान अर्जित करता है | यदि मनुष्य के गुणों की बात की जाए तो धैर्य मानव जीवन में एक ऐसा गुण है जिसके गर्भ से शेष सभी गुण प्रस्फुटित होते हैं | यदि किसी में धैर्य नहीं है तो
08 मार्च 2019
27 मार्च 2019
*परमात्मा द्वारा सृजित यह सृष्टि बड़ी ही विचित्र है | ईश्वर ने चौरासी लाख योनियों की रचना की ! पशु , पक्षी , मनुष्य , जलचर आदि जीवों का सृजन किया | कहने को तो यह सभी एक जैसे हैं परंतु विचित्रता यही है कि एक मनुष्य का चेहरा दूसरे मनुष्य से नहीं मिलता है | असंख्य प्रकार के जीव हैं , एक ही योनि के होन
27 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*इस धरा धाम पर चौरासी योनियों का वर्णन मिलता है , इनमें से सर्वश्रेष्ठ प्राणी बनकर मानव ने अनेक कीर्तिमान स्थापित किये | मनुष्य परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ कृति है , सृष्टि के संचालन में सहयोग करने के लिए ईश्वर ने नर के साथ नारी का जोड़ा भी उत्पन्न किया और हमारे सनातन ऋषियों विवाह का अद्भुत विधान बनाया
08 मार्च 2019
16 मार्च 2019
*सनातन काल से मनुष्य भगवान को प्राप्त करने के अनेकानेक उपाय करता रहा है , परंतु इसके साथ ही भगवान का पूजन , ध्यान एवं सत्संग करने से कतराता भी रहता है | मनुष्य का मानना है कि भगवान का भजन करने के लिए एक निश्चित आयु होती है | जबकि हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य के जीवन का कोई भरोसा नहीं ह
16 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*आदिकाल से इस धराधाम पर ऋषियों - महर्षियों एवं राजा - महाराजाओं द्वारा लोक कल्याण के लिए यज्ञ / महायज्ञ का अनुष्ठान किया जाता रहा है | जहाँ सद्प्रवृत्तियों द्वारा लोक कल्याण की भावना से ये सारे धर्मकार्य किये जाते रहे हैं वहीं नकारात्मक शक्तियों के द्वारा इन धर्मानुष्ठानों का विरोध करते हुए विध्वंस
08 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*इस धरा धाम पर अनेक प्राणियों के मध्य में मनुष्य सबसे ज्यादा सामर्थ्यवान एवं शक्ति संपन्न माना जाता है | अनेक प्राणी इस सृष्टि में ऐसे भी हैं जो कि मनुष्य अधिक बलवान है परंतु यह भी सत्य है कि मनुष्य शारीरिक शक्ति में भले ही हाथी , शेर , बैल , घोड़े आदि से कम हो परंतु बौद्धिक बल , सामाजिक बल एवं आत्
08 मार्च 2019
28 मार्च 2019
*मनुष्य जीवन में संयम का बहुत ही ज्यादा महत्त्व है | ईश्वर ने मनुष्य की अनुपम कृति की है | सुंदर अंग - उपांग बनाये मधुर मधुर बोलने के लिए मधुर वाणी प्रदान की | वाणी का वरदान मनुष्य को ईश्वर द्वारा इस उद्देश्य से प्रदान किया है कि वह जो कुछ भी बोले उसके पहले गहन चिंतन कर ले तत्पश्चात वाणी के माध्यम स
28 मार्च 2019
20 मार्च 2019
*सनातन धर्म के संस्कार , संस्कृति एवं वैज्ञानिकता सर्वविदित है | सनातन धर्म के महर्षियों ने जो भी नीति नियम बनाये हैं उनमें गणित से लेकर विज्ञान तक समस्त सूत्र स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं | सनातन धर्म के संस्कार रहे हैं कि मनुष्य जब गुरु के यहां जाता था तब वह सेवक बनकर जाता था | इस पृथ्वी पर एकछत्र शासन
20 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*सम्पूर्ण सृष्टि परमपिता परमात्मा के द्वारा निर्मित है | इस सृष्टि में वन , नदियाँ , पहाड़ , जलचर , थलचर एवं नभचर सब ईश्वर को समान रूप से प्रिय हैं | मनुष्य उस ईश्वर का युवराज कहा जाता है | युवराज का अर्थ है राजा का उत्तराधिकारी जो राजा द्वारा संरक्षित वस्तुओं का संरक्षण करने का उत्तरदायित्व सम्हाले
08 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*सृष्टि का सृजन करने वाली आदिशक्ति भगवती महामाया , जिसकी सत्ता में चराचर जगत पल रहा है ! ऐसी कृपालु / दयालु आदिमाता को मनुष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार विभिन्न नामों से जानता है | स्वयं महामाया ने उद्घोष किया है कि :- मैं ही ब्रह्मा , विष्णु एवं शिव हूँ | वही आदिशक्ति जहां जैसी आवश्यकता पड़ती है वहां
08 मार्च 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x