क्षणभंगुर जीवन :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

16 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (49 बार पढ़ा जा चुका है)

क्षणभंगुर जीवन :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

*सनातन काल से मनुष्य भगवान को प्राप्त करने के अनेकानेक उपाय करता रहा है , परंतु इसके साथ ही भगवान का पूजन , ध्यान एवं सत्संग करने से कतराता भी रहता है | मनुष्य का मानना है कि भगवान का भजन करने के लिए एक निश्चित आयु होती है | जबकि हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य के जीवन का कोई भरोसा नहीं है , यह कब समाप्त हो जाए यह आज तक कोई नहीं जान पाया है | मनुष्य के जन्म लेने के पहले तो यह सारा संसार जान जाता है कि एक नया प्राणी संसार में आने वाला है परंतु यह प्राणी संसार से कब जाएगा यह आज तक कोई नहीं जान पाया | जो लोग भगवान का भजन करने के लिए वृद्धावस्था की प्रतीक्षा करते हैं उनको बालक ध्रुव , प्रहलाद एवं मीराबाई के आदर्शों का अवलोकन करना चाहिए जिन्होंने बाल्यावस्था में ही भगवान के विषय में जान करके उनको प्राप्त करने का प्रयास किया और आज उनका नाम अमर हो गया | कहने का तात्पर्य सिर्फ इतना है कि भगवान का भजन करने के लिए कोई उम्र नहीं होती है जब भी हृदय जागृत हो जाए तो हो जाए उसी दिन से भगवतद्भक्ति में लग जाना चाहिए | भगवान की भक्ति करने का यह अर्थ नहीं हुआ कि मनुष्य परिवार को छोड़कर भगवान की भक्ति करें | महात्माओं ने इसी विधा का पालन करते हुए भगवान को प्राप्त किया है |* *आज इसे कलयुग का प्रभाव कहें या मनुष्य की भौतिकता मनुष्य रा मन सिर्फ विषयों पर लगा हुआ है | संसार में क्यों आया है ? आने का कारण क्या है ? इस पर विचार नहीं कर पा रहा है , यही कारण है मनुष्य प्राय: विपत्तियों में पड़ता रहता है | आज के मनुष्य की सोच बन गई कि भगवान का भजन करने के लिए वृद्धावस्था ही उपयुक्त होगी | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" ऐसे सभी लोगों से इतना ही पूछना चाहूंगा कि वृद्धावस्था प्राप्त हो जाएगी इसका क्या भरोसा है ? अनेक लोग युवावस्था , बाल्यावस्था एवं प्रौढ़ावस्था में ही इस संसार को छोड़कर जा रहे हैं उन्होंने भी भगवद्भजन करने के लिए वृद्धावस्था की प्रतीक्षा करने का विचार अवश्य किया होगा , परंतु उनको यह समय नहीं मिल पाया | प्रत्येक मनुष्य को कोई भी कार्य कल के लिए ना छोड़ करके आज और अभी करने का विचार करना चाहिए , क्योंकि इस जीवन का कोई भरोसा नहीं है | कब परमात्मा के यहां से बुलावा आ जाए और इस असार संसार को छोड़कर जाना पड़ जाए अभी तक अबूझ पहेली ही बना है |* *भगवद्भजन करने का अर्थ यह नहीं हुआ कि आप अपने परिवार का त्याग कर दें | सत्कर्म एवं सदाचरण ही सबसे बड़ा भजन कहा गया है प्रत्येक मनुष्य को इसे अपनाना ही चाहिए |*

अगला लेख: प्रसन्नता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
08 मार्च 2019
*आदिकाल से इस धराधाम का पालन राजा - महाराजाओं के द्वारा होता आया है | किसी भी राजा के सफल होने के पीछे मुख्य रहस्य होता था उसकी नीतियाँ | अनेक नीतिज्ञ सलाहकारों से घिरा राजा राजनीति , कूटनीति एवं राष्ट्रनीति पर चर्चा करके ही अपने सारे कार्य सम्पादित किया करता था | कब , किस समय , कौन सा निर्णय लेना ह
08 मार्च 2019
16 मार्च 2019
*सनातन धर्म में मानव जीवन को चार आश्रमों के माध्यम से प्रतिपादित किया गया है | ब्रह्मचर्य , गृहस्थ , वानप्रस्थ एवं सन्यास | सनातन धर्म में आश्रम व्यवस्था विशेष महत्व रखती है | यही आश्रम व्यवस्था मनुष्य के क्रमिक विकास के चार सोपान हैं , जिनमें धर्म , अर्थ , काम एवं मोक्ष आदि पुरुषार्थ चतुष्टय के समन
16 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*सृष्टि का सृजन करने वाली आदिशक्ति भगवती महामाया , जिसकी सत्ता में चराचर जगत पल रहा है ! ऐसी कृपालु / दयालु आदिमाता को मनुष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार विभिन्न नामों से जानता है | स्वयं महामाया ने उद्घोष किया है कि :- मैं ही ब्रह्मा , विष्णु एवं शिव हूँ | वही आदिशक्ति जहां जैसी आवश्यकता पड़ती है वहां
08 मार्च 2019
16 मार्च 2019
*इस धराधाम पर सर्वोच्च प्राणी मनुष्य ने अपने व्यवहार व कुशल नीतियों के कारण समस्त पृथ्वी पर शासन करता चला आ रहा है | मानव जीवन में कौन किसका हितैषी है और कौन विपक्षी यह मनुष्य के वचन एवं व्यवहार से परिलक्षित होता रहा है | मनुष्य जीवन में मनुष्य अपने वचन पर स्थिर रहते हुए वचन पालन करते हुए समाज में स
16 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*सम्पूर्ण सृष्टि परमपिता परमात्मा के द्वारा निर्मित है | इस सृष्टि में वन , नदियाँ , पहाड़ , जलचर , थलचर एवं नभचर सब ईश्वर को समान रूप से प्रिय हैं | मनुष्य उस ईश्वर का युवराज कहा जाता है | युवराज का अर्थ है राजा का उत्तराधिकारी जो राजा द्वारा संरक्षित वस्तुओं का संरक्षण करने का उत्तरदायित्व सम्हाले
08 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*इस धरा धाम पर अनेक प्राणियों के मध्य में मनुष्य सबसे ज्यादा सामर्थ्यवान एवं शक्ति संपन्न माना जाता है | अनेक प्राणी इस सृष्टि में ऐसे भी हैं जो कि मनुष्य अधिक बलवान है परंतु यह भी सत्य है कि मनुष्य शारीरिक शक्ति में भले ही हाथी , शेर , बैल , घोड़े आदि से कम हो परंतु बौद्धिक बल , सामाजिक बल एवं आत्
08 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*अपने संपूर्ण जीवन काल में मनुष्य में अनेक गुणों का प्रादुर्भाव होता है | अपने गुणों के माध्यम से ही मनुष्य समाज में सम्मान या अपमान अर्जित करता है | यदि मनुष्य के गुणों की बात की जाए तो धैर्य मानव जीवन में एक ऐसा गुण है जिसके गर्भ से शेष सभी गुण प्रस्फुटित होते हैं | यदि किसी में धैर्य नहीं है तो
08 मार्च 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x