परदोष दर्शन :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

16 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (39 बार पढ़ा जा चुका है)

परदोष दर्शन :---- आचार्य अर्जुन तिवारी

*इस पृथ्वी पर जन्म लेने के बाद मनुष्य का परम लक्ष्य होता है भगवतप्राप्ति करना | भगवान को प्राप्त करने के लिए हमारे महापुरुषों ने अनेकानेक उपाय बताये हैं | अनेक उपाय करने के पहले आवश्यक है कि मनुष्य के हृदय में भक्ति का उदय हो क्योंकि बिना भक्ति के भगवान को प्राप्त कर पाना कठिन ही नहीं वरन् असम्भव है | इसी क्रम में स्वयं को प्राप्त करने का सबसे सरल साधन स्वयं मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने मैया शबरी से नवधा भक्ति के रूप में बताया है | नवधा भक्ति का वर्णन करने के बाद भगवान स्वयं कहते हैं इन नौ प्रकार की भक्ति में से एक भी जिसके पास हो जाती है वह हमको प्राप्त कर लेता है | इसी नवधा भक्ति में सातवीं भक्ति बताया गया है परदोष ना देखना | भगवान का बहुत बड़ा भक्त हो और दूसरों के दोष दर्शन करने का दोष उसके अंदर है तो वह कभी भगवान को प्राप्त नहीं कर सकता है | परदोष दर्शन बहुत बड़ा अवगुण है जो मनुष्य में व्याप्त हो जाता है तो उसे दूसरों में दोष ही दोष दिखाई पड़ते हैं | दूसरों के दोष देखने के चक्कर में वह अपने दोषों को भूल जाता है | और अपने भक्तिमार्ग से विमार्गी हो जाता है | अत: यदि भगवान को प्राप्त करना है तो दूसरों की अपेक्षा अपने दोषों का अवलोकन करके उनको समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए |* *आज समाज में भगवान को प्राप्त करने के लिए अनेकानेक उपाय किए जा रहे हैं , परंतु यह भी सत्य है कि मनुष्य आज अनेक प्रकार के उपाय करने के बाद भी अपने हृदय में व्याप्त दोषों का शमन न करके दूसरों के दोषों को देखने में अधिक व्यस्त दिखाई देता है | यही कारण है कि मनुष्य सब कुछ करते हुए भी भगवान से दूर होता चला जा रहा है | मेरा "आचार्य अर्जुन तिवारी" का मानना है कि मनुष्य अपने जीवन में जिस गुण की ओर ज्यादा आकर्षित होता है वही गुण उसमें प्रकट हो जाते हैं | ठीक उसी प्रकार जब मनुष्य सिर्फ दूसरों के दोष ही देखता रहेगा तो वह दोष उसमें स्वयं प्रकट हो जाते हैं , क्योंकि मनुष्य जिसका चिंतन करता रहता है वहीं उसके क्रियाकलाप में उपस्थित होते रहते हैं | आज कोई भी मनुष्य अपना दोष ना तो देखना चाहता है ना ही किसी के बताने पर मानना चाहता है , जबकि यही सत्य हैं कि जब हम किसी के ऊपर एक उंगली उठाते हैं तो तीन उंगलियां स्वयं अपनी और मुड़ी होती हैं और वह यही कहती रहती हैं कि पहले अपने मन को , बचन को , और अपने कर्म को देखो तब दूसरों का दोष देखना | परंतु मनुष्य उसको समझ नहीं पाता है और दोष दर्शन में ही संपूर्ण जीवन व्यतीत कर देता है |* *यदि वास्तव में भगवान को प्राप्त करना है तो भगवान श्री राम जी के द्वारा बताई हुई नवधा भक्ति का पालन करना ही पड़ेगा |*

अगला लेख: प्रसन्नता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
08 मार्च 2019
*आदिकाल से इस धराधाम पर ऋषियों - महर्षियों एवं राजा - महाराजाओं द्वारा लोक कल्याण के लिए यज्ञ / महायज्ञ का अनुष्ठान किया जाता रहा है | जहाँ सद्प्रवृत्तियों द्वारा लोक कल्याण की भावना से ये सारे धर्मकार्य किये जाते रहे हैं वहीं नकारात्मक शक्तियों के द्वारा इन धर्मानुष्ठानों का विरोध करते हुए विध्वंस
08 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*आदिकाल से इस धराधाम का पालन राजा - महाराजाओं के द्वारा होता आया है | किसी भी राजा के सफल होने के पीछे मुख्य रहस्य होता था उसकी नीतियाँ | अनेक नीतिज्ञ सलाहकारों से घिरा राजा राजनीति , कूटनीति एवं राष्ट्रनीति पर चर्चा करके ही अपने सारे कार्य सम्पादित किया करता था | कब , किस समय , कौन सा निर्णय लेना ह
08 मार्च 2019
20 मार्च 2019
*सनातन धर्म के संस्कार , संस्कृति एवं वैज्ञानिकता सर्वविदित है | सनातन धर्म के महर्षियों ने जो भी नीति नियम बनाये हैं उनमें गणित से लेकर विज्ञान तक समस्त सूत्र स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं | सनातन धर्म के संस्कार रहे हैं कि मनुष्य जब गुरु के यहां जाता था तब वह सेवक बनकर जाता था | इस पृथ्वी पर एकछत्र शासन
20 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*सृष्टि का सृजन करने वाली आदिशक्ति भगवती महामाया , जिसकी सत्ता में चराचर जगत पल रहा है ! ऐसी कृपालु / दयालु आदिमाता को मनुष्य अपनी आवश्यकता के अनुसार विभिन्न नामों से जानता है | स्वयं महामाया ने उद्घोष किया है कि :- मैं ही ब्रह्मा , विष्णु एवं शिव हूँ | वही आदिशक्ति जहां जैसी आवश्यकता पड़ती है वहां
08 मार्च 2019
16 मार्च 2019
*सनातन काल से मनुष्य भगवान को प्राप्त करने के अनेकानेक उपाय करता रहा है , परंतु इसके साथ ही भगवान का पूजन , ध्यान एवं सत्संग करने से कतराता भी रहता है | मनुष्य का मानना है कि भगवान का भजन करने के लिए एक निश्चित आयु होती है | जबकि हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य के जीवन का कोई भरोसा नहीं ह
16 मार्च 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x