खरमास

20 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (39 बार पढ़ा जा चुका है)

खरमास

*सनातन धर्म के संस्कार , संस्कृति एवं वैज्ञानिकता सर्वविदित है | सनातन धर्म के महर्षियों ने जो भी नीति नियम बनाये हैं उनमें गणित से लेकर विज्ञान तक समस्त सूत्र स्पष्ट दिखाई पड़ते हैं | सनातन धर्म के संस्कार रहे हैं कि मनुष्य जब गुरु के यहां जाता था तब वह सेवक बनकर जाता था | इस पृथ्वी पर एकछत्र शासन करने वाले राजा - महाराजा भी जब वहां जाते थे तो अपना छत्र एवं मुकुट का त्याग करके ही उनके आश्रम में प्रवेश करते थे | अर्थात गुरु के तेज के सामने स्वयं कांतिहीन हो जाया करते थे | पृथ्वी पर शासन करने वाले राजाओं की बात छोड़ दो यहाँ तक कि ग्रहराज सूर्यदेव , देवगुरु बृहस्पति के घर अर्थात उनकी राशि धनु एवं मीन में जब भी प्रवेश करते हैं तो अपने तेज का त्याग कर देते हैं अर्थात कान्तिहीन हो जाते हैं , क्योंकि यह सनातन परंपरा रही है कि अपने सद्गुरु के समक्ष स्वयं का तेज , बल एवं ज्ञान नहीं दर्शाना चाहिए | जब जब सूर्य बृहस्पति की राशि धनु एवं मीन में प्रवेश करते हैं तब वे कांतिहीन हो जाते हैं एवं पृथ्वी पर खरमास माना जाता है | वैवाहिक एवं मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं , क्योंकि उस समय गुरुदेव बृहस्पति एवं सूर्य देव में मंत्रणा तो चलती ही है साथ ही सूर्य देवगुरु के समक्ष साधना में लीन हो जाते हैं | किसी भी मांगलिक कार्य में सूर्य का होना एवं वैवाहिक कार्यक्रमों में गुरुदेव का होना परम आवश्यक है और जब यह दोनों ही व्यस्त होते हैं मांगलिक कार्य कैसे हो सकते हैं | इसीलिए खरमास में मांगलिक कार्यों को वर्जित किया गया है | खरमास से संबंधित एक और कथानक प्राप्त होता है कि जब सूर्य धन एवं मीन राशि में होता है तब उनके रथ को घोड़ों की जगह गधे अर्थात खर खींचते हैं इसलिए इसे खरमास कहा जाता है |* *आज सनातन धर्म की वैज्ञानिकता एवं नियमों को आधुनिक वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं | आज के वैज्ञानिकों का मानना है कि बृहस्पति एवं सूर्य लगभग समान ग्रह हैं | जिस तरह सूर्य का निर्माण हाइड्रोजन एवं हीलियम से हुआ है उसी प्रकार बृहस्पति का भी निर्माण हुआ है | सूर्य की तरह बृहस्पति का केंद्र भी द्रव्य से भरा हुआ है जिसमें ज्यादातर हाइड्रोजन है | बृहस्पति सौर मंडल के सभी ग्रहों के सम्मिलित भार से भी अधिक है | वैज्ञानिक मानते हैं कि बृहस्पति ग्रह थोड़ा और बड़ा होता तो शायद दूसरा सूर्य बन गया होता | जब दोनों बड़े ग्रह एक साथ होते हैं एक ही कक्षा में तो अपनी किरणों से एक दूसरे को आंदोलित करते हैं जिससे नकारात्मक ऊर्जा निकलती है और धरती पर मांगलिक कार्यों में नकारात्मकता प्रकट कर सकती है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" इसके अतिरिक्त यदि आज के शिष्यों की बात करूं तो अधिकतर शिष्यों ने गुरु के यहां अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए प्रवेश लिया है | स्वार्थ सिद्ध हो जाने के बाद वह गुरु के भी गुरु बनने का प्रयास करते हैं | ऐसे सभी मौकापरस्त शिष्यों को ग्रहमंडल में उपस्थित ग्रहों के राजा सूर्यदेव से शिक्षा लेनी चाहिए कि किस प्रकार गुरु की राशि में , उनके घर में जाने पर सूर्यदेव अपने तेज को कम कर लेते हैं | परंतु आज के शिष्य अपने गुरु को ही अपना तेज दिखा करके अपने संस्कारों का परिचय दे रहे हैं | जो कि उनके लिए पतन का मार्ग ही कहा जा सकता है |* *सनातन धर्म के प्रचार की मुहिम चलाने वाले कुछ नवयुवक सनातन धर्म की पारदर्शिता , संस्कृति एवं संस्कार से सरोकार भी नहीं रखना चाहते यही कारण है कि वे कुछ दिन के उपरान्त असफल हो जाते हैं |*

अगला लेख: प्रसन्नता :-- आचार्य अर्जुन तिवारी



शब्दनगरी पर हो रही अन्य चर्चायें
08 मार्च 2019
*इस धरा धाम पर अनेक प्राणियों के मध्य में मनुष्य सबसे ज्यादा सामर्थ्यवान एवं शक्ति संपन्न माना जाता है | अनेक प्राणी इस सृष्टि में ऐसे भी हैं जो कि मनुष्य अधिक बलवान है परंतु यह भी सत्य है कि मनुष्य शारीरिक शक्ति में भले ही हाथी , शेर , बैल , घोड़े आदि से कम हो परंतु बौद्धिक बल , सामाजिक बल एवं आत्
08 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*अपने संपूर्ण जीवन काल में मनुष्य में अनेक गुणों का प्रादुर्भाव होता है | अपने गुणों के माध्यम से ही मनुष्य समाज में सम्मान या अपमान अर्जित करता है | यदि मनुष्य के गुणों की बात की जाए तो धैर्य मानव जीवन में एक ऐसा गुण है जिसके गर्भ से शेष सभी गुण प्रस्फुटित होते हैं | यदि किसी में धैर्य नहीं है तो
08 मार्च 2019
20 मार्च 2019
*भारतीय संस्कृति में समय-समय पर त्यौहार एवं पर्वों का आगमन होता रहता है | यह त्यौहार भारतीय संस्कृति की दिव्यता तो दर्शाते ही हैं साथ ही सामाजिकता एवं वैज्ञानिकता को भी अपने आप में समेटे हुए हैं | विभिन्न त्यौहारों में होली का अपना एक अलग एवं महत्त्वपूर्ण स्थान है | होली मनाने के एक दिन पूर्व "होलि
20 मार्च 2019
08 मार्च 2019
*इस सकल सृष्टि में हर प्राणी प्रसन्न रहना चाहता है , परंतु प्रसन्नता है कहाँ ? लोग सामान्यतः अनुभव करते हैं कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि प्रसन्नता के मुख्य सूचक हैं | यह सत्य है कि धन, शक्ति और प्रसिद्धि अल्प समय के लिए एक स्तर की संतुष्टि दे सकती है | परन्तु यदि यह कथन पूर्णतयः सत्य था तब वो सभी जिन्ह
08 मार्च 2019
आसान हिन्दी  [?]
तीव्र हिंदी  [?]
ऑनस्क्रीन कीबोर्ड  [?]
हिन्दी टाइपिंग  [?]
डिफ़ॉल्ट कीबोर्ड  [?]

(फोन के लिए विकल्प)
X
1 2 3 र्4 ज्ञ5 त्र6 क्ष7 श्र8 (9 )0 --   =
q w e r t y u i o p [   ]
a s d िfि g h  j k l ; '  \
  z x c  v  b n m ,, .. ?/ एंटर
शिफ्ट                                                         शिफ्ट बैकस्पेस
x