होलिकादहन :--- आचार्य अर्जुन तिवारी

20 मार्च 2019   |  आचार्य अर्जुन तिवारी   (18 बार पढ़ा जा चुका है)

होलिकादहन :--- आचार्य अर्जुन तिवारी  - शब्द (shabd.in)

*भारतीय संस्कृति में समय-समय पर त्यौहार एवं पर्वों का आगमन होता रहता है | यह त्यौहार भारतीय संस्कृति की दिव्यता तो दर्शाते ही हैं साथ ही सामाजिकता एवं वैज्ञानिकता को भी अपने आप में समेटे हुए हैं | विभिन्न त्यौहारों में होली का अपना एक अलग एवं महत्त्वपूर्ण स्थान है | होली मनाने के एक दिन पूर्व "होलिकादहन" की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है | पौराणिक कथाओं के अनुसार दैत्यराज हरिणाकश्यप के पुत्र प्रहलाद भगवद्भक्ति में लीन हो गए जो कि हरिणाकश्यप को अच्छा नहीं लगता था | दैत्य ने प्रहलाद को मारने के कई उपाय किये परंतु वह सफल नहीं हुआ | हरिणाकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था उसने ब्रह्मा जी की तपस्या करके एक चूनर प्राप्त कर रखी थी जिसे ओढ़ने के बाद वह अग्नि में भी नहीं जल सकती थी | प्रहलाद को मारने के लिए वह अपनी चूनर ओढ़करके भक्त प्रहलाद को गोदी में बिठाकर अग्नि के ढेर में बैठने पर तैयार हो गयी , परंतु अग्नि लगते ही हवा का झोंका आया और चूनर उड़कर प्रहलाद पर चली गयी | वरदान के अनुसार प्रहलाद तो बच गये परंतु होलिका उस अग्नि में जल गयी | बुराई की प्रतीक होलिका का दहन आज भी भक्तों द्वारा प्रतिवर्ष करके बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व मनाया जाता है | होलिकादहन का सीधा सा अर्थ है अपने घर एवं आस - पास व्याप्त नकारात्मकता एवं बुराईयों की सफाई करके उसे अग्नि में जलाना क्योंकि जब आपके आस पास की नकारात्मकता एवं बुराई जलकर भस्म हो जायेगी तभी मनुष्य में पारिवारिक एवं सामाजिक कटुता का विनाश होगा एवं मनुष्य आपसी वैमनस्यता को भूलकर समरसता की अनुभूति करेगा |* *आज भी भारत के प्रत्येक अंचल में लोग अपने अपने ढंग से होली के पूर्व होलिकादहन करते हैं | प्रत्येक गाँव एवं शहरों के प्रत्येक चौराहे पर आज भी पूर्ण हर्षोल्लास के आम जनमानस के द्वारा नकारात्मकता की प्रतीक होलिका का दहन किया जाता है | होलिकादहन की वैज्ञानिकता भी है कि ऋतु परिवर्तन के कारण पर्यावरण में अनेकों प्रकार की बैक्टीरिया की वृद्धि हो जाती है तब होलिका के जलाने से प्रतट गुआ ताप उन बैक्टीरिया का विनाश करता है | मैं "आचार्य अर्जुन तिवारी" आज समाज में देख रहा हूँ कि कटुता , वैमनस्यता आज चहुँओर व्याप्त है ऐसे में होलिका दहन के समय सबका इकट्ठे होकर होलीगीत एवं फाग आदि का गायन करके आपसी कटुता को भले ही एक क्षण के लिए ही सही परंतु भूलने का प्रयास अवश्य करते हैं | होलिकादहन मात्र एक त्यौहार नहीं बल्कि बुराई पर अच्छाई एवं नकारात्मकता पर सकारात्मकता तथा आसुरी शक्तियों पर देवत्व की विजय का प्रतीक है |* *मात्र कुछ लकड़ी , कण्डे एवं कूड़ों को जला देने से होलिकादहन पूर्ण नहीं हो सकता | होलिकादहन तभी सार्थक हो सकता है जब हम अपनी बुराईयों एवं नकारात्मकता का दहन करें |*

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