भारत का हाल इस चुनावी राजनीति के माहौल में – शुभम महेश

28 मार्च 2019   |  शुभम महेश   (13 बार पढ़ा जा चुका है)

देश में इस समय चुनाव का माहौल चल रहा है। राजनीतिक पार्टीओ के समर्थक चुनाव प्रचार में लगे है और हम मतलब जनता अपने-अपने कामो में व्यस्त है। इस व्यस्त जनता को अपने देश में क्या चल रहा है इस से कोई मतलब नहीं है और जिन्हे लगता है की देश को वाकई में बदलाव की जरुरत है उनकी कोई सुनता नहीं है। तो इस पूरी बात का निचोड़ यह है की देश की जनता या राजनेता किसी को देश के विकास की नहीं पड़ी है, सब अपने में व्यस्त है और इस देश को असुरक्षित, अविकसित या यूँ कहे की और खराब बनाने में लगे है।

तो मित्रो, मार्च का महीना चल रहा है और देश की राजनीति चुनावी भागदौड़ में लगी है। दोनों पार्टीओ के लिए इस बार 2019 का चुनाव निर्णायक साबित होने वाला है। मेरे हिसाब से इस वक़्त देश की हालत ख़राब चल रही है। 70 से 80 प्रतिशत जनता किसी चमत्कार के होने का इंतज़ार कर रही होगी और बाकि की जनता को किसी से कोई मतलब नहीं होगा। देश का आम आदमी इन 5 सालो में बस एक जुमला बन कर रह गया है, मंहगाई इतनी हो गयी है की एक गरीब परिवार को दो वक़्त का खाना भी नसीब नहीं हो पा रहा है और मेने थोड़े दिन पहले सुना था के सत्ताधारी पार्टी के एक नेता कह रहे है की हवाई जहाज़ का किराया ऑटोरिक्शा से भी सस्ता हो गया है, जहाँ आम आदमी 1 लीटर पेट्रोल भराने से पहले पेट्रोल के दाम चेक करता है और सोचता है की इतने रूपये में इतने किलोमीटर तो चला ही जायेगा ना। इन नेताओ ने आम जनता का मजाक बना के रख दिया है, देश की आधी जनता इस भरम में है की देश में इस बार “सबका विकास होगा ” हमारे “प्रधान सेवक” जी सब सही कर देंगे। अब जनता कैसे समझे की ये राजनेता हमरे चूल्हो पर अपनी रोटियां सकते है।

एक तरफ नेता जी कहते है की देश में विकास हो रहा है और एक तरफ भारत में बेरोजगारों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जारी है और भारत बेरोज़गारी दर में 217 देशो में से 103 वे नंबर पर आता है और रोज़गार दर में 47 देशो में से 42 वे नंबर पर आता है। मुझे समझ नहीं आता की ये कैसा विकास हो रहा है।

जहाँ देश में हर साल सरकारी नोकरियो की परीक्षा को रोक दिया जाता है या फिर निरस्त कर दिया जाता है देश के भविष्य के साथ हर साल ऐसा ही होता है, सरकारी नोकरिया वैसे तो निकल नहीं रही है पर जो सरकारी नोकरिया निकलती है उनमे नियुक्ति होने में सालो का समय लग जाता है। कभी कभार तो परीक्षा का रिजल्ट भी निरस्त कर दिया जाता है या फिर पूरी की पूरी परीक्षा को ही निरस्त कर दिया जाता है और नेता जी कहते है की विकास हो रहा है। यहाँ देश की साक्षरता दर 234 देशो में से 168 वे नंबर पर है और शिक्षा सूचकांक की दर 191 देशो में से 145 वे नंबर पर है और साथ ही मानव पूंजी दर 130 देशो में से 103 वे नंबर पर है। सरकार जहाँ साल 2017-18 में एजुकेशन के नाम पर 79,685.95 करोड़ खर्च कर देती है वहां ऐसा हो रहा है और देश में इसे विकास कहा जा रहा है।

नेता जी कहते है की देश से भ्र्ष्टाचार ख़तम हुआ है अब कोई रिश्वत नहीं लेता है वही देश करप्शन परसेप्शन इंडेक्स में 180 देशो में से 81 वे नंबर पर आता है और प्रेस के स्वतंत्रता सूचकांक में भारत 180 देशी में से 138 वे नंबर पर आता है जिस देश में सी.बी.आई. जैसी सरकारी संस्था पर भ्रष्टाचार का दाग लग जाता है वहाँ पर नेता जी कहते है की भ्रष्टाचार खतम हुआ है जहाँ सरकारों पर ही रक्षा सोदो पर भ्र्ष्टाचार के आरोप लगे हो वो देश कैसे इस भ्र्ष्टाचार रूपी राक्षश से मुक्त हो सकता है।

अगर देश की राजनीति ऐसी ही रही और देश का वोटर जागरुक नहीं हुआ तो ऐसा ही होता रहेगा। जनता को अब समझना चाहिये जनसँख्या बढ़ रही है, किसान मर रहा है, पानी ख़तम हो रहा है, बेरोजगारी बढ़ रही है, शिक्षा का स्तर और नीचे होता जा रहा है, देश में हिन्दू मुस्लिम का बीज फिर से पनप रहा है, मीडिया पर लगाम लगा दी जा रही है, सच बताने वालो को सुना नहीं जा रहा है, प्रदुषण का स्तर बढ़ रहा है, और लोग जातीवाद की तरफ फिर से बढ़ रहे है। ये ही सही समय है देश की जनता के जागरूक होने का।

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